13/09/2025
आज भी बिसलपुर के पहाड़ पर लोहे का कड़ा गड़ा हुआ है।
बिजोरी कांजरी बगड़ावत राजा सवाई भोज से आधे अंग का गहना पहन कर पूरी धरती के सभी राजाओं के पास गई लेकिन उन्हें कोई पूरा गहना नहीं पहना सका एक दिन बजोरी समुद्र के पार अपना बांस रोप के खेल दिखा रही थी तभी ऊपर चील पक्षियों का झुण्ड उड़ता हुआ आया जिसने बजोरी को बताया कि तू यहां किसको अपना खेल दिखा रही है? तुम्हारे दातार सवाईभोज और 23 भाई बगड़ावत युद्ध में काम आ गए। हम अभी उनका गर्म खून पीकर आ रहे है। यह सुनकर बिजोरी कांजरी बांस से नीचे उतर के आ गई और रोने लगी तब बींजा कांजर ने पूछा तो बिजोरी ने कहा कि अपना बांस समेट ले बींजा अब हमारा क्या होगा हमारे दातार सवाई भोज युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो गए हमें शीघ्र ही गोठा जाना होगा बिजोरी गोठा के लिए रवाना हो गई और देवास में आ पहुंची जहां बांस रोप के बगड़ावत के नाम का गुणगान करने लगी तब माता साढ़ू गुजरी ने बगड़ावतो के नाम का गुणगान सुना तो माता साडू जी महलों से नीचे उतरकर आई तो देखा बिजोरी है ,तब बिजोरी और माता साढ़ू जी के वार्तालाप हुआ कि बगड़ावत तो देवलोक हो गए तुम बगड़ावतो के गुरु रुपनाथ जी के पास जाओ वो अवश्य ही तुम्हारे प्रश्नों के उतर देंगे साढ़ू जी ने उन्हें भेट देकर विदा किया बिजोरी रुपनाथ जी की धुनी रूपारैली की ओर निकल गई रास्ते में बाबा भाट जी मिल गए जो एक दूसरे को पहचान गए बिजोरी ने कहा कि बाबा भाट जी अपने दातार कहा है? तब भाट जी ओर बिजोरी के बीच वार्तालाप हुई बिजोरी के हाथ में माता साढ़ू जी अंगूठी देखकर भाट ने पूछ तो बिजोरी ने बताया कि माता के भगवान अवतार आए है। और वो देवास में है बाबा भाट जी देवास के लिए निकल गए और बिजोरी रुपनाथ के पास आ गई रुपनाथ की धुनी पर आकर बगड़ावतो के गीत गाने लगी तब बाबा रुपनाथ जी बाहर आए तब बिजोरी ने बाबा से उनके चेलों के बारे में पूछा तो बाबा ने कहा कि उनका तो बैकुंठ में वास हो गया है तब बिजोरी बोली बाबा या तो दर्शन देवे भक्त सवाई भोज हो असवार बुली घोड़ी पर,नहीं तो में अपने प्राण यही पर निकाल दूं बाबा रुपनाथ ने बिजोरी को खूब समझाया कि बैकुंठ में गए हुए कौन वापिस आता है लेकिन बिजोरी हट लेकर बैठ गई बाबा को उनकी बात माननी पड़ी और भगवान से विनती की तो सवाई भोज बैकुंठ से वापिस आए उस समय बुली घोड़ी सवार राजा दिया जोध के पास थी तो बुली की 2 काया हो गई एक पर सवाई भोज असवार होकर आए और एक काया से सवार में रही तब सवाई भोज और बिजोरी के वार्तालाप हुई सवाई भोज से कहा कि हे अन्नदाता आपका जैसा लख दातार दानी पूरे संसार में कोई नहीं हे तब सवाई भोज बोले कि बिजोरी तुम्हारा आधे अंग का गहना हमारे बेटा कुंवर मेंढ़ू के पास हैं जो बिसलदेव अजमेर के पास रहते है ।
तुम उनके पास चली जाओ आज से तुम गुर्जर जाति का गुणगान करती रहना और सवाई भोज वापिस बैकुंठ में चले गए। बिजोरी अजमेर जाकर बिसलदेव से मुलाकात की तो पता चला मेंदुजी बीसलपुर में रहते है तब बिजोरी बीसलपुर आ गई वह मेंढ़ुजी से मिली और बनास के दोनों ओर पर्वत पर बांस रोप के करतब दिखने लगी तब बिजोरी ने कहा कि में भगवान शिव के सामने गहना नहीं पहनूं तब गोकर्णश महादेव से 5 किलोमीटर दूर मेंदुजी जी ने गहना पहनाया यहां पर वर्तमान में मेंदुजी जी का देवरा भी हैं।
जय श्री देव दरबार 🙏🙏
नोट: आज भी कंजर जाति के लोग गुर्जरों से ही दान लेते और गुर्जरों का ही गुणगान करते है, किसी ओर से दान नहीं लेते।