सबक जिंदगी के

सबक जिंदगी के कभी ज्ञान की बातें तो कभी गीतों से गुरु भगवंतों की भक्ति के बारे में बताया जायेगा

23/09/2024

(लो चली मैं अपने देवर की बारात लेके की धुन पर )
जैन गुरुभक्ति भजन
आज जागी देखो किस्मत मेरी आज जागी
आयी घड़ी है ये आज पावन
पाये गुरु बड़भागी
आज जागी देखो किस्मत मेरी आज जागी
1,मेरा चौका लगा,पारणा गुरु का हुआ,
आज महान ये अवसर पुण्यों से पाया,
पाप शेष न बचा,मन मयूर सा नचा ,
दस उपवास पारणा करवा हरसाया
विश्रुत तपस्या तेरी सफल है ,पाये गुरु वैरागी
आज जागी देखो किस्मत मेरी आज जागी
आयी घड़ी है ये आज पावन
पाये गुरु बड़भागी

23/09/2024

जैन भजन
( गुरूवर तेरे चरणों की मुझे धूल जो मिल जायें की धुन पर)
पारस तेरे दर्शन को, जो एक झलक पाये,
मन रहे सदा दर पे ,चाहे कहीं चला जाये।

1,मन से सुमरे तुमको,वच से तेरे भजन करे,
तन से दौड़ा दौड़ा,तेरे द्वार चला आये।
पारस तेरे दर्शन को, जो एक झलक पाये,
मन रहे सदा दर पे ,चाहे कहीं चला जाये।

2,वामा नंदन तेरे, दर आ सब करें नमन,
सच में यदि भक्त है तो तक़दीर बदल जाये।
पारस तेरे दर्शन को, जो एक झलक पाये,
मन रहे सदा दर पे ,चाहे कहीं चला जाये।

3, चंवलेश्वर अंदेश्वर, काशी कचनेर बही,
सम्मेदाचल विश्रुत ,पारस ही नजर आये।
पारस तेरे दर्शन को, जो एक झलक पाये,
मन रहे सदा दर पे ,चाहे कहीं चला जाये।

23/09/2024

सबका अपना अपना भाव है ,सबका अपना अपना स्वभाव है,कोई किसी के सांचे में नहीं ढल सकता,और हम संसारी सबको अपने जैसा बनाने का भरसक प्रयत्न करते हैं,जिसके कारण मन ,वाणी और कर्म से हमारे आसपास रह रहे लोगों को असुविधा या मन:ताप हो जाता है।
विगत समय में मुझसे भी कुछ ऐसा व्यवहार जाने अनजाने में हुआ ही होगा ,उन सब कृत्यों की पूरे अंतरमन से क्षमा मांगती हूं।

23/09/2024

फिर हृष्ट पुष्ट हो जायेगी काया इसकी फिकर मत कर,
किराये की कुटिया का इतना जिकर मत कर।
हर दुख से बचाये दुख में साथ निभाये,
ऐसे धर्म की शरण ले कल की फिकर मत कर।

क्या हुआ अगर उपवास से थोड़ा शरीर घट गया ,
थोड़ा ही सही मन का अंधकार छट गया।
वचन से ही रटा पर थोड़ा धर्म व्यवहार रट गया,
और सच्चे मन से करने वाला संसार के तट गया।
रश्मि संदीप जैन

06/09/2024

पत्थर कठोर है, उसे रस्सी से नहीं काटा जा सकता, शुरुआत में जब रस्सी पत्थर को काटती है तो पत्थर का कुछ नहीं बिगड़ता उल्टा रस्सी घिस जाती है, टूट जाती है,पर अगर ये प्रयास लंबे समय तक जारी रखा जाये तो एक दिन रस्सी का प्रयास रंग लाया है ,पत्थर पर निशान दिखाई देने लगता है।

रोट तीज की सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं
06/09/2024

रोट तीज की सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं

05/09/2024

रक्षा का मन में भाव जगे ,हर नर मन में नारी के प्रति, हो जाये हैवानियत खतम जिसके वश हो हो रही अति।
नर के समान ही नारी भी है प्रकृति की अनमोल कृति ,
इस रक्षाबंधन प्रण लेना न हो नारी को और क्षति।
HAPPY RAKSHABANDHAN
इस रक्षाबंधन पर मेरे विचार
रश्मि संदीप जैन बेगूं

05/09/2024

फिल्मी गीत-
मधुवन खुशबू देता है की धुन पर
जैन भजन-
दस दिन के दशलक्षण ये,
जीवन करते पावन हैं।
बरसे धरम का जन जन में,
इन दस दिन में सावन हैं।
1,क्रोध तजो और मान तजो ,
माया तजो और लोभ तजो,
झूठ न बोलो ,धरो संयम,
तप त्याग करो , निज आत्म भजो,
तप त्याग करो, निज आत्म भजो,
प्रीति स्वयं से करो चेतन,
ये बतलाते दस दिन हैं ,
बरसे धरम का जन जन में,
इस दस दिन में सावन है।
दस दिन के दशलक्षण ये ,,

2,धर्म पितु ,माता भाई,
धर्म ही सबको सुखदाई,
चुनलो धर्म की ही राहें,
जीवन में मंगलदाई,
जीवन में मंगलदाई।
सर्व सुखों का साधन है ,
विश्रुत मुक्ति का कारण है ।
बरसे धरम का जन जन में,
इन दस दिन में तो सावन।
दस दिन के दशलक्षण ये,
जीवन करते पावन हैं।
बरसे धरम का जन जन में,
इन दस दिन में सावन हैं।

05/09/2024

फिल्मी गीत-
लग जा गले कि फिर ये हंसी रात हो न हो की धुन पर
जैन भजन -
कर ले भजन प्रभु का तूने पा लिये वचन,
तब ही वचन हों सार्थक जब गायेगा भजन।
१,वाणी से अपनी जीत ले
सबके दिलों को आज,
जिनने ये काज है किया
सबके दिलों पे राज,
बोलो तो पहले तोल लो ,
स्वमन पे भी वजन।
तब ही वचन हों सार्थक जब गायेगा भजन।
१,हैं गीत भी गाली भी ये ,
शब्दों का हेरफेर,
जो गीत गाये यश मिले,
गाली से कष्ट ढेर।
वचनों के जोड़ से जुड़े
फिर ना अलग हो मन।
तब ही वचन हों सार्थक जब गायेगा भजन।
३,वचनों ने रच दिये यहां
इतिहास हैं तमाम,
इनसे ही काम सब बनें
इनसे ही बिगड़े काम,
इसहित वचन को छोड़ मौन
धर रहें मुनिजन,
तब ही वचन हों सार्थक जब गायेगा भजन।
४,दशलक्षणों में एक सत्य धर्म भी कहे,
सांचे वचन ही बोले वरना मौन जो गहे,
मुक्ति नगर में वास का विश्रुत हुआ जतन ।
तब ही वचन हों सार्थक जब गायेगा भजन।
31-8-24

05/09/2024

फिल्मी गीत-
घूंघट की आढ़ में दिलवर का
की धुन पर
जैन भजन-
दस दिन ये साल के ,जीवन में-ऽ बहार ऐसी-ऽ लाते हैं।
सबके मन में लगन,
नयी जागे हर दिन ,
त्यौहार जब ये -ऽ आते हैं।
1,क्षमा जीवन में कितना जरूरी है?
मान माया से दूरी जरूरी है।
लोभ है पाप का बाप छोड़ो जिया,
झूठ छोड़ो जो बनना है मुक्ति पिया।
पंचमेरु पूरे हुये बीत गये पांच दिन ये हो-ऽ
बिना किसी त्याग के ये पावन दिन
इक बार भी ना -ऽ जाते हैं।
सबके मन में लगन,
नयी जागे हर दिन ,
त्यौहार जब ये -ऽ आते हैं।
दस दिन ये साल के ,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ
बहार ऐसी-ऽ लाते हैं।
२,धरो संयम जो तीर्थंकरों ने धरा,
तप से होती है कर्मों की वो निर्जरा,
त्याग बिन राग की आग बुझती नहीं,
उसको जानो जो आतम है सुख की मही।
ब्रह्म में ही रमने लगे छोड़ के नारी से जो लगन,
विश्रुत करम सब नशा अपने
वासु पूज्य से शिव पाते हैं।
सबके मन में लगन,
नयी जागे हर दिन ,
त्यौहार जब ये -ऽ आते हैं।
दस दिन ये साल के ,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ
बहार ऐसी-ऽ लाते हैं।
३,क्षमा धरने को पहले धरम ने कहा,
दस दिनों बाद भी धर्म ये ही महा।
बात दो दो दफा क्यों ये है की गयी?
क्षमा धारे बिना ना हो मृत्युंजयी।
क्षमा क्षमा सब से कहो मन से वचन से भी हाथ जोड़ के कहो
पार्श्वनाथ पूजा हो तब ही सफल-ऽ
जब पाठ क्षमा पढ़ पाते हैं।
दस दिन ये साल के ,जीवन में-ऽ बहार ऐसी-ऽ लाते हैं।
सबके मन में लगन,
नयी जागे हर दिन ,
त्यौहार जब ये -ऽ आते हैं।
दस दिन ये साल के जीवन में,
,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ
,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ
,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ

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