05/09/2024
फिल्मी गीत-
घूंघट की आढ़ में दिलवर का
की धुन पर
जैन भजन-
दस दिन ये साल के ,जीवन में-ऽ बहार ऐसी-ऽ लाते हैं।
सबके मन में लगन,
नयी जागे हर दिन ,
त्यौहार जब ये -ऽ आते हैं।
1,क्षमा जीवन में कितना जरूरी है?
मान माया से दूरी जरूरी है।
लोभ है पाप का बाप छोड़ो जिया,
झूठ छोड़ो जो बनना है मुक्ति पिया।
पंचमेरु पूरे हुये बीत गये पांच दिन ये हो-ऽ
बिना किसी त्याग के ये पावन दिन
इक बार भी ना -ऽ जाते हैं।
सबके मन में लगन,
नयी जागे हर दिन ,
त्यौहार जब ये -ऽ आते हैं।
दस दिन ये साल के ,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ
बहार ऐसी-ऽ लाते हैं।
२,धरो संयम जो तीर्थंकरों ने धरा,
तप से होती है कर्मों की वो निर्जरा,
त्याग बिन राग की आग बुझती नहीं,
उसको जानो जो आतम है सुख की मही।
ब्रह्म में ही रमने लगे छोड़ के नारी से जो लगन,
विश्रुत करम सब नशा अपने
वासु पूज्य से शिव पाते हैं।
सबके मन में लगन,
नयी जागे हर दिन ,
त्यौहार जब ये -ऽ आते हैं।
दस दिन ये साल के ,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ
बहार ऐसी-ऽ लाते हैं।
३,क्षमा धरने को पहले धरम ने कहा,
दस दिनों बाद भी धर्म ये ही महा।
बात दो दो दफा क्यों ये है की गयी?
क्षमा धारे बिना ना हो मृत्युंजयी।
क्षमा क्षमा सब से कहो मन से वचन से भी हाथ जोड़ के कहो
पार्श्वनाथ पूजा हो तब ही सफल-ऽ
जब पाठ क्षमा पढ़ पाते हैं।
दस दिन ये साल के ,जीवन में-ऽ बहार ऐसी-ऽ लाते हैं।
सबके मन में लगन,
नयी जागे हर दिन ,
त्यौहार जब ये -ऽ आते हैं।
दस दिन ये साल के जीवन में,
,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ
,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ
,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ ,जीवन में-ऽ