02/05/2025
कुतरूओ के बस का कुछ नहीं है।
इन्हें देश की सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिस, एजेंसियों,डिप्लोमेट्स पर भरोसा नहीं है। इन्हें ये तक समझ नहीं कि प्रतिक्रिया क्या होती है? वैचारिक मतभेद को कैसे संभालना है? न इन्हें ये समझ कि सवाल किस से करने है? और ,सही ढंग से सवाल करना क्या होता है?
TRP की भूखी मीडिया इनके दिमाग के बटन दबाकर इन्हें काम पर लगा देती है।
मैं देख रहा था कि शहीद विनय नरवाल की पत्नी के खिलाफ भी मंदबुद्धि घटिया शब्दावली इस्तेमाल कर रहे है। क्योंकि उन्होंने कहा कि "हिन्दू मुस्लिम ना करो" और हमारे साथ न्याय हो।
देशभक्त परिवार की बेटी से यही उम्मीद कर सकते है कि वो देश के बाहरी दुश्मन के षडयंत्र को यहां कामयाब न होने दे।
किसी दूसरे देश के आतंकियों की हरकत से हम अपने देश का माहौल खराब करें। ऐसा ना हो के दुश्मन की चाल में फंस कर अपने ही लोगों को अपना दुश्मन बना ले। सड़कों पर किसी का भी कालर पकड़ कर उनसे नारे लगवाएं।
फ़ौज यही तो कहती है के देश के अंदर शांति हो बाहर वालों को हम देख लेंगे?
लेकिन कुछ मूर्ख लोग देश में अब्दुल टाइट करने वाले उकसावे में गली में रिक्शा वाले से बदला लेने को उतावले है। मतलब देश के अंदर भी J&K वाला अलगाव फैलाकर आतंकियों की चाल कामयाब करना चाहते है।
आज मुजफ्फरनगर में राकेश टिकैत जी के साथ हाथापाई पर उतरने वाले कौन है?? भीड़ के सहारे अपने सनकी पन को हवा देने वाले गीदड़ है। इनके दिमाग के बटन TRP की भूखी मीडिया के पास है। जो किसी के बयान को निगेटिव दिखाकर TRP बढ़ा लेती है। बाद में कितने लोगों के दिमाग की नफरत हिंसक हो जाए इन्हें घंटा फर्क नहीं।
एक अपील है। देश में माहौल खराब न करो। लोग आर्थिक तंगी में इतने ज्यादा मानसिक अवसादों में उलझे,उत्तेजक और हिंसक प्रवृत्ति के हो चुके है। वो बस आसपड़ोस सब कुछ बर्बाद करना या होते देखना चाहते है।
वास्तविक जट्ट।
दिनेश बैनीवाल।
जमीदार ।।