23/06/2025
🍁:-))🌸🤎
हम तो बस उनकी, बात का अंदाज़ लगा रहे..
कहीं शब्द आख़िरी, तो कहीं आगाज़ लगा रहे..।
वो करते हैं गुफ्तगू, या कि इंद्र–ज़ाल बुनते हैं..
बात कल–परसों की, मतलब आज लगा रहे..।
ताउम्र गलतियां, दोहराते रहे जानबूझकर वो..
बटन टूटे ही रहे, और हर बार काज लगा रहे..।
पहरेदार हैं मगर, सांसों की लुट रही जमापूंजियां..
मूलधन का पता नहीं, चक्रवर्ती ब्याज लगा रहे..।
उनका मर्ज कभी कम ना हुआ, कि राज क्या है..
चारागर का मशविरा नहीं, अपना इलाज लगा रहे..!🤌🏻
-🖤🖋️😒
Nikhil Tiwary 📚