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01/01/2026
ठंड में फल बागों की सुरक्षा अमरुद-आंवला-कटहल के लिए विशेषज्ञ सलाहडॉ. एस. के. सिंहविभागाध्यक्ष, पोस्ट ग्रेजुएट डिपार्टमें...
16/11/2025

ठंड में फल बागों की सुरक्षा अमरुद-आंवला-कटहल के लिए विशेषज्ञ सलाह

डॉ. एस. के. सिंह
विभागाध्यक्ष, पोस्ट ग्रेजुएट डिपार्टमेंट ऑफ़ प्लांट पैथोलॉजी एवं नेमेटोलॉजी एवं पूर्व सह निदेशक अनुसन्धान, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर, बिहार
ईमेल: [email protected] / [email protected]
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उत्तर भारत में जाड़े का मौसम फल वृक्षों के लिए चुनौतीपूर्ण रहता है। कई बार तापमान शून्य से नीचे पहुँच जाता है, लगातार कोहरा छाया रहता है और सूर्य का प्रकाश लगभग नहीं के बराबर मिलता है। ऐसे वातावरण में विशेषकर वे फल वृक्ष अधिक प्रभावित होते हैं जिनमें दूधनुमा स्राव पाया जाता है, क्योंकि अत्यधिक निम्न तापमान में यह स्राव पौधे में सुचारू रूप से प्रवाहित नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप पौधे पीले पड़ने लगते हैं और बीमार जैसे प्रतीत होते हैं।
चूंकि फल वृक्ष बहुवर्षीय प्रकृति के होते हैं, अतः जाड़े के महीनों में इनका रखरखाव सामान्य फसलों से भिन्न होता है। उचित प्रबंधन से न केवल ठंड के दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है बल्कि अगली ऋतु में उच्च गुणवत्ता वाली फसल भी प्राप्त की जा सकती है। नीचे अमरूद, आंवला एवं कटहल के बागों की जाड़े में आवश्यक देखभाल का विस्तृत विवरण प्रस्तुत है।
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1. अमरूद के बागों की देखभाल

(क) फलों की तुड़ाई एवं प्रबंधन

जनवरी माह अमरूद की तुड़ाई का प्रमुख समय होता है। तुड़ाई हमेशा सुबह के समय करनी चाहिए। फलों को उनकी किस्म के अनुसार अधिकतम आकार एवं परिपक्वता (गहरे हरे से हल्के हरे रंग में परिवर्तन) पर तोड़ा जाना चाहिए। इस अवस्था में फल से हल्की सुगंध भी आने लगती है।
• अत्यधिक पके एवं सामान्य परिपक्व फलों को मिश्रित न करें।
• ताजगी व गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रत्येक फल को अखबार से लपेटकर रखें।
• फलों को रगड़ से होने वाली खरोंच से बचाएँ तथा बक्सों में उनकी संख्या को आकार के अनुसार ही निर्धारित करें।

(ख) पोषक तत्व प्रबंधन एवं सूक्ष्म तत्व स्प्रे

जनवरी में पत्तियों पर कत्थई रंग दिखना सूक्ष्म तत्वों की कमी का संकेत है। कॉपर सल्फेट 4 ग्राम + जिंक सल्फेट 4 ग्राम/लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

(ग) उच्च गुणवत्ता वाली (जाड़े की) फसल के लिए प्रबंधन

जाड़े में अच्छी गुणवत्ता की फसल के लिए— अनावश्यक फूलों को तोड़ें। नेफ्थेलीन एसिटिक अम्ल (NAA) 100 ppm का छिड़काव करें। सिंचाई कम कर दें। पिछले मौसम में विकसित शाखाओं के 10–15 सेमी शीर्ष भाग को काटें।

(घ) pruning और रोग प्रबंधन

छंटाई के तुरंत बाद— कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3 ग्राम/लीटर या बोर्डो पेस्ट से कटे स्थानों पर लेपन करें। इसके अतिरिक्त टूटी, रोगग्रस्त एवं एक-दूसरे से उलझी शाखाओं को अवश्य हटाएँ।

(ङ) खेत प्रबंधन

बाग में निराई–गुड़ाई करें। नवस्थापित पौधों की हल्की सिंचाई करें ताकि ठंड में नमी का संतुलन बना रहे।
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2. कटहल के बागों की देखभाल

(क) खाद एवं उर्वरक प्रबंधन

यदि दिसंबर में खाद नहीं दी गई हो तो जनवरी में यह कार्य अवश्य पूरा करें। इससे पेड़ ठंड के बाद तेजी से वृद्धि करते हैं।

(ख) ठंड और पाले से संरक्षण

विशेषकर छोटे पौधे पाले से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। पौधों के चारों ओर पुआल, घास या बोरी का आवरण लगाएँ। पौधों की जड़ों के पास हल्की सिंचाई करें, ताकि तापमान में अत्यधिक गिरावट न हो।

(ग) मीलीबग प्रबंधन

फरवरी के अंत से मीलीबग का प्रकोप बढ़ता है। इससे बचने के लिए— पेड़ों पर पॉलीथीन पट्टी (आम की तरह) बाँधें, ताकि कीट तने पर ऊपर न चढ़ सकें। यह सरल उपाय कटहल में मीलीबग नियंत्रण का अत्यंत प्रभावी तरीका है।
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3. आंवला के बागों की देखभाल

(क) फलों की तुड़ाई एवं सुरक्षा

उत्तरी भारत में आंवला की तुड़ाई जनवरी–फरवरी तक चलती है। फलों से लदे वृक्षों को बांस–बल्ली का सहारा दें ताकि शाखाएँ टूटने से बच सकें। फल विकास जारी रहता है, इसलिए समुचित सिंचाई आवश्यक है। परंतु तुड़ाई के 15 दिन पूर्व सिंचाई बंद कर दें।

(ख) पौध रोपण

जहाँ सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो, वहाँ— फरवरी के दूसरे पखवाड़े से मार्च तक पौध रोपण किया जा सकता है।

(ग) पाले से बचाव

जहाँ पाला पड़ने की संभावना हो— गंधक का अम्ल (0.1%) पूरे वृक्ष पर छिड़कें। आवश्यकता पड़ने पर छिड़काव दोहराएँ।

(घ) फूल आने के समय सिंचाई बंद रखें

फरवरी में नई पत्तियों के साथ फूल आते हैं। इस समय सिंचाई न करें, अन्यथा फूल झड़ सकते हैं।

(ङ) गुड़ाई एवं थाल बनाना

बाग में हल्की गुड़ाई करें। पानी संचयन व खाद देने हेतु उचित थाल बनाएं।

(च) पौधों को आवश्यक खाद–उर्वरक दें

एक वर्ष के पौधे के लिए

गोबर/कम्पोस्ट: 10 किग्रा; नाइट्रोजन: 100 ग्राम; फॉस्फेट: 50 ग्राम; पोटाश: 75 ग्राम

10 वर्ष या इससे अधिक आयु वाले पेड़ो के लिए

गोबर/कम्पोस्ट: 100 किग्रा; नाइट्रोजन: 1 किग्रा; फॉस्फेट: 500 ग्राम; पोटाश: 750 ग्राम
इनमें से—पूरी फॉस्फोरस मात्रा, आधी नाइट्रोजन, तथा आधी पोटाश जनवरी में दें।

(छ) बाग की स्वच्छता

• पूरे बाग में निराई–गुड़ाई एवं सूखी शाखाओं की सफाई करें। यह रोग एवं कीट प्रबंधन का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है।
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अंत में .......

जाड़े के मौसम में अमरूद, आंवला और कटहल के बागों की उचित देखभाल से न केवल पौधों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि आगामी मौसम में उच्च उत्पादकता और बेहतर गुणवत्ता वाले फल प्राप्त होते हैं। समय पर की गई तुड़ाई, खाद–उर्वरक प्रबंधन, रोग–कीट नियंत्रण और पाले से सुरक्षा जैसे उपाय किसान की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। थोड़ी सी सावधानी और वैज्ञानिक प्रबंधन से जाड़े की कठोर परिस्थितियों को अवसर में बदला जा सकता है।

09/11/2025

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