मनीषा चौधरी

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जब रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से अंतिम युद्ध लड़ते हुए घायल हो गई और अंग्रेज उनका पीछा कर रहे थे, तब एक अंग्रेज ने गोली चल...
28/05/2026

जब रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से अंतिम युद्ध लड़ते हुए घायल हो गई और अंग्रेज उनका पीछा कर रहे थे, तब एक अंग्रेज ने गोली चलाई, जो रानी लक्ष्मीबाई की बाई जंघा में लगी। इस समय रानी के दोनों हाथों में तलवारें थीं, लेकिन गोली लगने के बाद जब सम्भलना मुश्किल हुआ, तो उन्होंने बाएं हाथ की तलवार फेंक दी और लगाम पकड़ी।
इतिहास की किताबों ने आपको झांसी की रानी की बहादुरी तो बताई, लेकिन उनके शरीर पर हुए उन ज़ख्मों की दास्तां शायद कहीं छुप गई, जिसे सुनकर आज भी पत्थरों का कलेजा फट जाए।
मैदान-ए-जंग में चारों तरफ अंग्रेज थे और बीच में अकेली अपनी मातृभूमि की लाज बचाती वो शेरनी! एक अंग्रेज की गोली रानी की जंघा में जा धंसी। असहनीय पीड़ा, बहता खून... पर रानी ने अपनी लगाम नहीं छोड़ी। जिस हाथ ने गोली मारी थी, रानी की तलवार ने उसी पल उस अंग्रेज का अस्तित्व मिटा दिया।
लेकिन इसके बाद जो हुआ, वो रोंगटे खड़े कर देगा...
तभी एक अंग्रेज ने पीछे से रानी के सिर पर तलवार का ऐसा भयानक वार किया कि सिर का दाहिना हिस्सा कटकर अलग हो गया और उनकी दाईं आंख बाहर निकल आई।
ज़रा सोचिए! एक महिला, जिसके शरीर का हिस्सा कट चुका हो, जिसकी आँख बाहर आ गई हो... उसने क्या किया होगा? वो गिरी नहीं! उस भीषण दर्द के बीच भी उन्होंने अपनी आखिरी ताकत समेटी और सामने खड़े अंग्रेज का कंधा काट फेंका!
जब रानी वीरगति को प्राप्त हुईं, तो उनके पास न कोई फौज थी, न कोई आलीशान महल। वहाँ मौजूद थे तो बस कुछ वफादार साथी और उनकी पीठ पर बंधा छोटा सा बालक दामोदर, जो अपनी माँ के लहू से लथपथ शव को देख रहा था।
ये वो बलिदान है जिसकी कीमत हम कभी नहीं चुका सकते। यह शौर्य गाथा उस 'मदर-इंडिया' की है जिसने जीते-जी तो क्या, मरकर भी अंग्रेजों को अपना शरीर छूने नहीं दिया।
रानी लक्ष्मीबाई के अंतिम समय का ये वर्णन वृंदावनलाल वर्मा ने किया है। वृंदावनलाल वर्मा के परदादा झांसी के दीवान आनंदराय थे, जिन्होंने रानी लक्ष्मीबाई का साथ देते हुए वीरगति पाई। इस अंतिम समय के बारे में वृंदावनलाल को उनकी परदादी ने बताया, उस समय वृंदावनलाल की आयु 10 वर्ष थी।
आज जब आप आज़ाद हवा में सांस ले रहे हैं, तो इस वीरांगना के इन घावों को याद ज़रूर करना।
अगर इस बलिदान ने आपकी आँखों में आंसू और सीने में गर्व भर दिया है, तो कमेंट में 'नमन' लिखना न भूलें

युवाओं को मेरी सीधी-सपाट सलाह है — ज़िंदगी कोई ट्रायल वर्ज़न नहीं देती1. अपनी यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखिए। यही नियंत्रण...
28/05/2026

युवाओं को मेरी सीधी-सपाट सलाह है — ज़िंदगी कोई ट्रायल वर्ज़न नहीं देती

1. अपनी यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखिए। यही नियंत्रण आपकी सफलता और असफलता के बीच की पतली रेखा है। जिसने खुद को जीत लिया, उसने आधी दुनिया जीत ली।

2. पोर्न और लगातार हस्तमैथुन को हल्का मत समझिए। यह धीरे-धीरे आपके दिमाग की धार कुंद करता है। जो ऊर्जा सपनों में लगनी थी, वह स्क्रीन पर बह जाती है।

3. ऊँट की तरह शराब पीना बहादुरी नहीं, बेवकूफी है। होश खोकर कोई महान नहीं बना। नशे में इंसान पहले हँसी का पात्र बनता है, फिर अफ़सोस का।

4. अपने मानक ऊँचे रखिए। सिर्फ़ इसलिए किसी चीज़ पर समझौता मत कीजिए क्योंकि वह आसानी से मिल रही है। सस्ता हमेशा सुकून नहीं देता।

5. अगर कोई आपसे ज़्यादा होशियार मिले तो उससे भिड़िए मत, उसके साथ जुड़ जाइए। प्रतिस्पर्धा से ज़्यादा तरक्की सहयोग में है।

6. आपकी समस्याएँ उठाने कोई नहीं आ रहा। 100% ज़िम्मेदारी आपकी है। बहाने सस्ते होते हैं, नतीजे महँगे।

7. सलाह उसी से लीजिए जो वहाँ पहुँचा हो जहाँ आप पहुँचना चाहते हैं। भीड़ दिशा नहीं देती, बस शोर देती है।

8. पैसे कमाने के नए रास्ते खोजिए। कमाइए… और जो मज़ाक उड़ाएँ, उन्हें मुस्कुराकर अनदेखा कीजिए। अंत में हिसाब बैंक बैलेंस से होता है, तालियों से नहीं।

9. 100 सेल्फ-हेल्प किताबें नहीं, एक्शन चाहिए। अनुशासन वह ताकत है जो साधारण को असाधारण बनाती है।

10. नशीली दवाओं से दूर रहिए। “बस एक बार” अक्सर सबसे बड़ा झूठ होता है।

11. YouTube पर कौशल सीखिए, नेटफ्लिक्स पर घटिया कंटेंट में रातें मत डुबाइए। मनोरंजन ठीक है, मगर लत बर्बादी है।

12. सच कड़वा है — कोई आपकी उतनी परवाह नहीं करता जितनी आप सोचते हैं। शर्म छोड़िए, बाहर जाइए, अवसर खुद बनाइए।

13. आराम सबसे खतरनाक लत है। ज्यादा आराम, सस्ता अवसाद।

14. परिवार को प्राथमिकता दीजिए। वे परफेक्ट नहीं होंगे, मगर अपने हैं। उनकी कमज़ोरियों को ढाल बनाइए, हथियार नहीं।

15. नए अवसर तलाशिए और अपने से आगे के लोगों से सीखिए। ठहरा पानी सड़ता है।

16. आँख बंद कर किसी पर भरोसा मत कीजिए। विश्वास कीजिए, मगर पहले खुद पर।

17. चमत्कार का इंतज़ार बंद कीजिए। मदद मिल सकती है, मगर शुरुआत आपको ही करनी होगी। राय सुनिए, मगर अपनी राह खुद चुनिए।

18. कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प का कोई विकल्प नहीं। और याद रखिए — विनम्रता ही असली ऊँचाई है।

19. खुद को “खोजने” का इंतज़ार मत कीजिए। खुद को गढ़िए। पहचान बनती है, मिलती नहीं।

20. दुनिया आपके लिए धीमी नहीं होगी। आपको ही तेज़ चलना होगा।

21. कोई भी आपका कुछ कर्जदार नहीं है। हक़ कमाइए, मांगिए मत।

22. जीवन एक सिंगल-प्लेयर गेम है। आप अकेले पैदा हुए, अकेले जाएँगे। तीन पीढ़ियों बाद नाम भी धुँधला पड़ जाता है। इसलिए दूसरों की तालियों से ज्यादा अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनिए।

23. ज़िंदगी आपको कई बार ज़रूरतमंद, उदास और कमज़ोर महसूस कराएगी। बाहर निकलने का दरवाज़ा एक ही है — फैसला। और वह फैसला सिर्फ़ आप ले सकते हैं।

24. हर दिल आपके जैसा साफ़ नहीं होता। कुछ लोग इस्तेमाल करेंगे और आगे बढ़ जाएँगे। जागरूक रहिए, कड़वे नहीं।

25. 25 की उम्र तक इतना समझदार बन जाइए कि —
→ दूसरों की सफलता पर खुश हों
→ ईर्ष्या से बचें
→ खुले दिमाग रखें
→ अनुमान लगाने से पहले समझें
→ इरादे से काम करें
→ कृतज्ञ रहें
→ सच बोलें
→ रोज़ व्यायाम करें
→ गपशप से दूर रहें
→ साफ़ भोजन करें
→ माफ़ करें
→ सुनें
→ सीखें
→ और दिल से प्यार करें

ज़िंदगी आसान नहीं है, मगर साफ़ है। जो जाग गया, वही आगे निकल गया

 #पोर्न_एक_खामोश_नशा; जो पुरुषों को अंदर से खोखला कर रहा है!आज के डिजिटल युग में, एक ऐसा खामोश और खतरनाक नशा है जो पुरुष...
28/05/2026

#पोर्न_एक_खामोश_नशा; जो पुरुषों को अंदर से खोखला कर रहा है!

आज के डिजिटल युग में, एक ऐसा खामोश और खतरनाक नशा है जो पुरुषों को बिना एहसास कराए अंदर से नष्ट कर रहा है, वह है पोर्न। यह केवल एक बुरी आदत नहीं है, बल्कि एक ऐसा धीमा जहर है जो चुपचाप आपकी वास्तविकता को निगल रहा है। यह एक ऐसा नशा है जो न केवल आपके शरीर को, बल्कि आपके मन और आपकी पूरी शख्सियत को खोखला कर देता है। इस नशे की लत से भी आगे इसके दुष्प्रभाव इतने गहरे हैं कि इंसान को अपनी बर्बादी का तब तक पता नहीं चलता, जब तक कि वह पूरी तरह से इसके जाल में न फंस जाए।

▪️यह लत सबसे पहला प्रहार एक पुरुष के #पौरुष (Masculinity) पर करती है। पौरुष का अर्थ केवल शारीरिक बल नहीं है, बल्कि यह एक पुरुष का वह वास्तविक सार है जो उसे जिम्मेदारी, अनुशासन और अपने आदर्शों पर अडिग रहने का साहस देता है। इसमें आत्म-नियंत्रण, आत्म-सम्मान और आत्मनिर्भरता जैसे गुण शामिल होते हैं। जिस व्यक्ति में आत्म-अनुशासन नहीं होता, उसका अपने जीवन पर कोई नियंत्रण नहीं रह जाता। जो खुद का सम्मान नहीं कर सकता, दुनिया उसका सम्मान कभी नहीं करती, और न ही कोई ऐसे व्यक्ति पर भरोसा करता है जो खुद पर निर्भर नहीं रह सकता। अक्सर पुरुष इस लत को यह कहकर सही ठहराने की कोशिश करते हैं कि मैं जब चाहूं इसे छोड़ सकता हूं, मैं हमेशा नहीं देखता, या मैं सिंगल हूं तो इसमें क्या बुराई है।
लेकिन असलियत में, ये ठीक वही बहाने हैं जो एक नशे का आदी व्यक्ति अपनी लत को छिपाने के लिए बनाता है।

▪️इसके अलावा, यह लत इंसान को एक झूठी उपलब्धि का एहसास कराती है। इस प्रक्रिया में आपको लगता है कि आपने कोई सुख या मुकाम पा लिया है, जबकि हकीकत में आपने कुछ भी हासिल नहीं किया होता। इसमें कोई वास्तविक इनाम या सफलता नहीं है, लेकिन इसके बदले में आपकी बहुत सारी बहुमूल्य ऊर्जा खर्च हो जाती है। आपके शरीर और दिमाग की वह ऊर्जा जो जीवन में कुछ बड़ा, रचनात्मक और सार्थक हासिल करने में लगनी चाहिए थी, वह बिना किसी उद्देश्य के पूरी तरह व्यर्थ हो जाती है।
रिश्तों और वास्तविकता के प्रति विकृत नजरिया
इसका एक और गंभीर दुष्प्रभाव आपके मस्तिष्क की कार्यप्रणाली (Brain rewiring) पर पड़ता है। यह सेक्स, महिलाओं और रिश्तों के प्रति आपके पूरे नजरिए को विकृत कर देता है। आप अनजाने में ही लोगों से जुड़ने की स्वाभाविक क्षमता खोने लगते हैं और आपका दिमाग एकदम गलत दिशा में सोचने लगता है। सबसे दुखद बात यह है कि इसके कारण एक समय बाद आपको किसी से सच्चा प्यार करने या सही कारणों से किसी रिश्ते में रहने में भारी संघर्ष करना पड़ सकता है। आपकी स्वाभाविक यौन ऊर्जा कमजोर पड़ने लगती है, जो कोई मामूली बात नहीं बल्कि पौरुष के लिए एक बहुत बड़ा झटका है।

▪️यह आपके मानसिक स्वास्थ्य को पूरी तरह बर्बाद कर देता है। इस आदत के साथ शर्मिंदगी और अपराधबोध का आना तय है। आप इसे अकेले में करते हैं, जिससे आप खुद को सबसे अलग-थलग कर लेते हैं। आपके मन में हमेशा यह डर और घबराहट बनी रहती है कि कहीं कोई आपको पकड़ न ले या आपका सच जान न ले। यह डर आपको हमेशा एक बचाव और पलायन की स्थिति में रखता है, जिससे आपका आत्मविश्वास और मानसिक शांति पूरी तरह छिन जाती है।

▪️पोर्न एक ऐसा साइलेंट किलर है जो आपकी ऊर्जा, आपके रिश्तों, आपके पौरुष और आपके मानसिक स्वास्थ्य को दीमक की तरह चाट रहा है। इसे सामान्य समझकर इसके बचाव में तर्क देना खुद को धोखा देने के समान है। यह समझना बेहद जरूरी है कि सच्ची स्वतंत्रता इस लत को सही ठहराने में नहीं, बल्कि इससे बाहर निकलकर अपने जीवन और अपनी ऊर्जा का नियंत्रण वापस अपने हाथों में लेने में है। इस सच्चाई को स्वीकार करना ही इस अंधेरे से बाहर निकलने और एक बेहतर, अनुशासित जीवन की ओर बढ़ने का पहला कदम है

निवेदन है की दो मिनट का टाइम निकाल कर जरूर पढ़े...ये बकवास नहीं है सच्चाई है समाज की...एक कटु सत्य..!रिश्ते तो पहले होते ...
28/05/2026

निवेदन है की दो मिनट का टाइम निकाल कर जरूर पढ़े...
ये बकवास नहीं है सच्चाई है समाज की...
एक कटु सत्य..!

रिश्ते तो पहले होते थे। अब रिश्ते नही सौदे होते हैं। बस यहीं से सब कुछ गङबङ हो रहा है।

किसी भी माँ बाप मे अब इतनी हिम्मत शेष नही बची कि बच्चों का रिश्ता अपनी मर्जी से कर सकें।

पहले खानदान देखते थे। सामाजिक पकङ और सँस्कार देखते थे और अब ....

मन की नही तन की सुन्दरता , नोकरी , दौलत , कार , बँगला।

साइकिल , स्कूटर वाला राजकुमार किसी को नही चाहिये । सब की पसंद कारवाला ही है। भले ही इनकी संख्या 10% ही हो ।

लङके वालो को लङकी बङे घर की चाहिए ताकि भरपूर दहेज मिल सके और लङकी वालोँ को पैसे वाला लङका ताकि बेटी को काम करना न पङे।

नोकर चाकर हो। परिवार छोटा ही हो ताकि काम न करना पङे और इस छोटे के चक्कर मे परिवार कुछ ज्यादा ही छोटा हो गया है।

पहले रिश्तो मे लोग कहते थे कि मेरी बेटी घर के सारे काम जानती है और अब....

हमने बेटी से कभी घर का काम नही कराया यह कहने में शान समझते हैं।

इन्हें रिश्ता नही बेहतर की तलाश है। रिश्तों का बाजार सजा है गाङियों की तरह। शायद और कोई नयी गाङी लांच हो जाये। इसी चक्कर मे उम्र बढ रही है। अंत मे सौ कोङे और सौ प्याज खाने जैसा है

अजीब सा तमाशा हो रहा है। अच्छे की तलाश मे सब अधेङ हो रहे हैं।

अब इनको कौन समझाये कि एक उम्र मे जो चेहरे मे चमक होती है वो अधेङ होने पर कायम नही रहती , भले ही लाख रंगरोगन करवा लो ब्युटिपार्लर मे जाकर।

एक चीज और संक्रमण की तरह फैल रही है। नोकरी वाले लङके को नोकरी वाली ही लङकी चाहिये।

अब जब वो खुद ही कमायेगी तो क्यों आपके या आपके माँ बाप की इज्जत करेगी.?

खाना होटल से मँगाओ या खुद बनाओ

बस यही सब कारण है आजकल अधिकाँश तनाव के

एक दूसरे पर अधिकार तो बिल्कुल ही नही रहा। उपर से सहनशीलता तो बिल्कुल भी नहीं। इसका अंत आत्महत्या और तलाक

घर परिवार झुकने से चलता है , अकङने से नहीं.।

जीवन मे जीने के लिये दो रोटी और छोटे से घर की जरूरत है बस और सबसे जरुरी आपसी तालमेल और प्रेम प्यार की लेकिन.....

आजकल बङा घर व बङी गाङी ही चाहिए चाहे मालकिन की जगह दासी बनकर ही रहे।

आजकल हर घरों मे सारी सुविधाएं मौजूद हैं....
कपङा धोने की वाशिँग मशीन
मसाला पीसने की मिक्सी
पानी भरने के लिए मोटर
मनोरंजन के लिये टीवी
बात करने मोबाइल
फिर भी असँतुष्ट...

पहले ये सब कोई सुविधा नहीं थी। पूरा मनोरंजन का साधन परिवार और घर का काम था , इसलिए फालतू की बातें दिमाग मे नहीं आती थी।
न तलाक न फाँसी

आजकल दिन मे तीन बार आधा आधा घँटे मोबाइल मे बात करके , घँटो सीरियल देखकर , ब्युटिपार्लर मे समय बिताकर।

मैं जब ये जुमला सुनता हूँ कि घर के काम से फुर्सत नही मिलती तो हंसी आती है। बेटियों के लिये केवल इतना ही कहूँगा की पहली बार ससुराल हो या कालेज लगभग बराबर होता है। थोङी बहुत अगर रैगिँग भी होती है तो सहन कर लो।

कालेज मे आज जूनियर हो तो कल सीनियर बनोगे। ससुराल मे आज बहू हो तो कल सास बनोगी।

समय से शादी करो। स्वभाव मे सहनशीलता लाओ। परिवार में सभी छोटे बङो का सम्मान करो। ब्याज सहित वापिस मिलेगा।

आत्मघाती मत बनो। जीवन मे उतार चढाव आता है। सोचो समझो फिर फैसला लो। बङो से बराबर राय लो। उनके उपर और ऊपर वाले पर विश्वास रखो
विचार करे की हम कहा से कहा आ गये...

क्या आप सब लोग मेरी बात से सहमत हो,,,अगर सहमत हो तो कामेंट बाक्स में जाकर Agree लिख दीजिए

जोश और जवानी नापने का असली थर्मामीटर…जवानी उम्र से नहीं जाती, आदतों से जाती है। बाल सफेद होने से पहले दिमाग अगर सेफ मोड ...
28/05/2026

जोश और जवानी नापने का असली थर्मामीटर…

जवानी उम्र से नहीं जाती, आदतों से जाती है। बाल सफेद होने से पहले दिमाग अगर सेफ मोड में चला जाए, तो समझ लीजिए सिस्टम पुराना पड़ चुका है।

1. दोस्त बुलाएँ और आप कहें “भाई, आज थोड़ा आराम कर लेता हूँ” — समझो बैटरी नहीं, जज़्बा डाउन हो गया।

2. नए जूते देखकर दाम पहले दिखें, डिज़ाइन बाद में — समझ लो रोमांच की जगह बजट ने कब्ज़ा कर लिया है।

3. रात 11 बजे नींद खुद बुलाने लगे और आप खुशी-खुशी रजाई ओढ़ लें — समझो पार्टी से ज्यादा तकिया प्यारा हो गया।

4. बारिश हो और कीचड़ से बचने के लिए पैंट मोड़ो, कूदने का मन न करे — समझो बचपन ऑफलाइन हो गया।

5. हर नई चीज़ पर “हमारे ज़माने में…” शुरू हो जाए — समझो अपडेट बंद हो गए।

6. तेज़ म्यूज़िक सुनकर सिर दर्द होने लगे — समझो दिल की धड़कन भी लो-वॉल्यूम चाहती है।

7. महफ़िल में बैठकर ठहाके लगाने की जगह “सलाह” देने लगो — समझो मौज की जगह अनुभव बेच रहे हो।

8. प्यार भरा गाना सुनकर रोमांस नहीं, बिजली का बिल याद आए — समझो दिल से पहले जिम्मेदारियाँ जाग चुकी हैं।

9. छुट्टी के दिन बाहर घूमने के बजाय स्टोररूम साफ़ करने का मन करे — समझो एडवेंचर की जगह धूल झाड़ना पसंद आ गया।

10. हर जोखिम को “नुकसान” की नजर से देखो, “मौका” की नजर से नहीं — समझो डर ने हिम्मत को रिटायर कर दिया।

11. इंस्टाग्राम पर स्क्रॉल करते हुए दूसरों को जज करो, खुद कुछ नया करने का मन न हो — समझो उँगली चल रही है, जिंदगी नहीं।

12. नए लोगों से मिलने से बचो क्योंकि “क्या जरूरत है” — समझो दायरा सिकुड़ चुका है।

13. हर चीज़ में शिकायत ढूँढने लगो — खाना फीका, मौसम खराब, लोग बदतमीज़ — समझो समस्या बाहर नहीं, अंदर है।

14. सुबह उठते ही शरीर नहीं, सोच भारी लगे — समझो ऊर्जा नहीं, उत्साह घटा है।

15. किसी की सफलता देखकर प्रेरणा नहीं, चिढ़ पैदा हो — समझो अंदर की आग ठंडी पड़ रही है।

16. जब सपनों की लिस्ट छोटी और बहानों की लिस्ट लंबी हो जाए — समझो उम्र नहीं, मानसिकता बूढ़ी हो गई।

17. “अब क्या ही नया करेंगे” जैसे वाक्य जुबान पर आने लगें — समझो जिंदगी को खुद सीमित कर रहे हो।

18. जोखिम लेने वाले लोगों को पागल समझने लगो — समझो खुद की हिम्मत कम हो चुकी है।

19. दिल की जगह कैलकुलेटर से फैसले होने लगें — समझो जुनून छुट्टी पर है।

20. और अगर यह सब पढ़कर आप मुस्कु

सहकर्मियों संग अवैध संबंध अब आम बात हो गई है..???सरकारी या प्राइवेट नौकरियों में जहां पुरुष जी-तोड़ मेहनत करके सफलता नही...
27/05/2026

सहकर्मियों संग अवैध संबंध अब आम बात हो गई है..???
सरकारी या प्राइवेट नौकरियों में जहां पुरुष जी-तोड़ मेहनत करके सफलता नहीं पा पाता है, वहीं कुछ महिलाएं शार्ट-कट रास्ता ऐसे ही अपनाती हैं..???
अनावश्यक जगहों पर महिला कर्मचारी जैसे रिसेप्शनिस्ट या टेली कालर सिर्फ इसीलिए रखी जाती है ताकि रोज़ आमने-सामने रहेंगे, हंसी मज़ाक होगा, साथ में लंच होगा फिर घर तक छोड़ने जाना और घूमना-फिरना शुरू हो जाएगा..??

लड़की शीशे में उतरी तो ठीक, अन्यथा इसको हटाकर किसी दूसरी को रख लेंगे... कुछ ऐसी ही होती है सोच..

वहीं दूसरी तरफ कार्यक्षेत्र में अयोग्य साबित होने वाली लड़कियां, नौकरी में बने रहने के लिए और तोहफों या अतिरिक्त धन के लालच में आफिस में अपने सीनियर संग ब्लैक काॅफी पी लेती हैं..???
ब्लैक काॅफी अर्थात अवैध संबंध...

10-15 हजार रुपए की प्राइवेट नौकरी करने वाली कुछ लड़कियां iphone कपड़ों की तरह बदलती हैं..??
शाम के समय काम से घर लौटती ऐसी लड़कियों का फोन कान पर लगा ही रहता है...??
क्योंकि उनका "बाबू " जीपीएस की तरह काम करता है..???

यदि आपके घर की महिलाएं घर से बाहर जाकर कार्य कर रही है तो उनकी कार गुजारियों पर नजर जरूर रखें...??
सचेत करें और कुछ ग़लत महसूस हो तो सामने बैठाकर बात करें ।🙏
आपकी क्या प्रतिक्रिया है..??
अपने अनमोल विचार कमेंट्स में जरूर दीजियेगा।

बिस्तर पर पुरुष चाहिए...बच्चा जन्म देने के लिए पुरुष चाहिएआजीवन सुरक्षा के लिए पिता भाई पति बेटा चाहिएशादी के लिए पैसे व...
27/05/2026

बिस्तर पर पुरुष चाहिए...
बच्चा जन्म देने के लिए पुरुष चाहिए
आजीवन सुरक्षा के लिए पिता भाई पति बेटा चाहिए
शादी के लिए पैसे वाला लड़का, कमाऊ लड़का चाहिए
लेकिन पुरुषों का हर वक्त विरोध करना
जिसकी खाना उसके ही खिलाफ हर वक्त जहर उगलना
ऐसी है कुछ महिला जात....

सास बहू की लड़ाई
ननद भौजाई की लड़ाई
देवरानी जेठानी को लड़ाई
महिला ही महिला की दुश्मन पर विक्टिम बनकर पुरुष को टार्गेट करना हमेशा
ऐसी है कुछ महिला जात...

जो बेटा, भाई कल तक परिवार बिना रह नहीं सकता था,
शादी करके आते ही पति का घर तोड़ो
पति को उसके ही घर वालों से लड़ा कर अलग करो
ऐसी है कुछ महिला जात....

स्वतंत्रता के नाम पर अंग प्रदर्शन करना
डांस के नाम पर स्तन और नितम्ब हिलाना
अपनी हवस मिटाने के लिए bf संग होटल में जाना
पर जब कुछ भी आउट ऑफ कंट्रोल हो तो पुरुष पर झूठे आरोप लगा पुरुष पर दोष मढ देना
ऐसी है कुछ महिला जात...

बाकी सभी संस्कारी महिलाओं को सादर अभिनन्दन नमन।🙏

हमारी पोस्ट से किसी को भी ठेस पहुंची हो तो क्षमा चाहती हूं

सेक्स की चाहत में नवजवान लड़के अपनी ज़िंदगी खराब कर लेते हैं,,, कैसे,,, चलिए मैं आपको बताती हूं....सुंदर पत्नी के चक्कर ...
27/05/2026

सेक्स की चाहत में नवजवान लड़के अपनी ज़िंदगी खराब कर लेते हैं,,, कैसे,,, चलिए मैं आपको बताती हूं....

सुंदर पत्नी के चक्कर में आज के युवा अपनी आधी उम्र तो निकाल देते हैं इसी की तलाश में, बिना ये जाने कि लड़की वास्तव में कैसी है जो उसे और उसके पूरे परिवार को लेकर आगे चल सके। आज की कहानी भी इसी पर है। आपको पसंद आएगी, आप भी अपने विचार लिख सकते हैं।

राघव लेडीज़ शोरूम पर काम किया करता था। वहाँ सुंदर से सुंदर लड़कियाँ और महिलाएँ कपड़े खरीदने आया करती थीं।

राघव जब खूबसूरत महिलाओं को देखता तो उसे भी लगता—मैं भी एक खूबसूरत लड़की से शादी करूंगा। जब मैं उसके साथ बाज़ार, शादी या पार्टी में निकलूंगा तो लोग देखते ही रह जाएंगे और सब लोग यही कहेंगे—वाह, राघव ने क्या अच्छी किस्मत पाई है।

रोज़ की तरह राघव आज भी शाम को घर लौटा। माँ ने एक लड़की का फोटो दिखाते हुए कहा—राघव, तेरे लिए लड़की देखी है, पसंद कर ले।

राघव ने फोटो में देखा—सिंपल सी, एक पतली-दुबली लड़की, सांवले रंग की।

राघव ने फोटो टेबल पर गुस्से से पटकते हुए माँ से कहा—यह तो ज़रा सी भी सुंदर नहीं है। हमारे शोरूम में तो एक से एक सुंदर लड़कियाँ आती हैं।
मैं नहीं करूंगा इस लड़की से शादी।

इतना कहकर राघव अपने कमरे में चला गया। राघव ने ठान लिया—मैं शादी नहीं करूंगा उस सांवली लड़की से, चाहे मुझे घर से भाग जाना क्यों न पड़े।

माँ पीछे-पीछे राघव के कमरे तक आई और खूब समझाया। घर के सभी सदस्यों ने समझाते हुए कहा—अच्छी लड़की है, पढ़ी-लिखी है, घर के कामकाज भी खूब कर लेती है।

राघव गुस्से से कमरे से निकलकर छत पर आ पहुँचा। बिना कुछ खाए-पिए ही रात भर छत पर पड़े एक टूटे पलंग पर लेटा रहा। जैसे-तैसे सुबह हुई। राघव दुकान पर जाने के लिए तैयार हो चुका था। आज उसका नाश्ते में कुछ भी खाने का मन नहीं कर रहा था।

राघव अपने शोरूम पर जाने के लिए हमेशा पैदल पथ का ही सहारा लेता था। वह रास्ते में आने-जाने वाली लड़कियों को देखता हुआ आगे बढ़ रहा था। उसे राह में जो भी खूबसूरत लड़की दिखती, उसे लगता—इससे मेरी शादी होनी चाहिए।

अचानक उसका पैर पैदल पथ पर पड़े केले के छिलके से फिसल गया और वह पास पड़े कचरे के डिब्बे के ऊपर गिरा—धड़ाम।

वहीं एक ब्यूटी पार्लर की शॉप थी। उसमें से एक औरत बाहर निकली, तुरंत राघव को उठाया और अपने ब्यूटी पार्लर के भीतर ले जाते हुए कहा—ज्यादा चोट तो नहीं लगी भैया?

अंदर एक गद्देदार ऊँची कुर्सी पर बैठा दिया।

इतने में जींस और टी-शर्ट पहने हुए एक महिला ब्यूटी पार्लर के भीतर आई और सामने पड़ी दूसरी खाली कुर्सी पर बैठ गई।

राघव उस सांवली सी महिला को देखने लगा। एक धागे की मदद से उसकी आइब्रो बना दी गई। उसकी आँखें खूबसूरत लगने लगीं। बालों पर प्रेस करके बालों की चमक और बढ़ गई। चेहरे पर ब्लीच, फेशियल और न जाने क्या-क्या क्रीम लगाने के बाद—

उस महिला की खूबसूरती में चार चाँद लग गए।

राघव इस कलाकारी को देखकर दंग रह गया। राघव समझ चुका था—दुनिया की सभी दिखने वाली सुंदर लड़कियाँ और महिलाएँ सिर्फ एक दिखावा हैं।

सब ईश्वर की संतान हैं। हमें काले-गोरे का भेद नहीं रखना चाहिए। जिसका मन सुंदर है, वहाँ जिस्म का कोई मोल नहीं रहता।

देश को और समाज को अच्छे गुणों वाली पत्नियों की तलाश है—जो अपने पति का घर स्वर्ग बना दें।

माँ ने मुझे कल जिस लड़की का फोटो दिखाया था—
वह लड़की ब्यूटी पार्लर जाकर खुद को सज-सँवर कर भी फोटो खिंचवा सकती थी, पर उसने ऐसा नहीं किया।

वह जैसी है, खुद को वैसा ही रखना चाहती है। यही उसकी खूबसूरती का खजाना है।

राघव ने तुरंत अपनी जेब से मोबाइल निकाला और अपनी माँ को फोन पर बताया—
मुझे वही लड़की पसंद है, जिसे मैं कल कह रहा था—ना, ना, ना…

स्त्री कभी संतुष्ट नहीं होती !स्त्री से प्रेम में अगर आप ये उम्मीद करते हैंकि वो आपसे पूरी तरह खुश है तोआप नादानी में है...
27/05/2026

स्त्री कभी संतुष्ट नहीं होती !

स्त्री से प्रेम में अगर आप ये उम्मीद करते हैं
कि वो आपसे पूरी तरह खुश है तो
आप नादानी में हैं...???

ये स्त्री के मूल में ही नहीं है...
अगर आप बहुत ज्यादा केयर करते है तो
उससे भी ऊब जाएगी,
अगर आप बहुत उग्र हैं तो वो
उससे भी बिदक जाएगी,
अगर आप बहुत ज्यादा विनम्र हैं तो वो
उससे भी चिढ जाएगी,
अगर आप उससे बहुत ज्यादा बात करते हैं तो वो आपको टेक इट फौर ग्रांटड लेने लगेगी,
अगर आप उससे बहुत कम बात करते हैं तो वो
मान लेगी कि आपका चक्कर कहीं और चल रहा है...

यानी आप कुछ भी कर लीजिए वो
संतुष्ट नहीं हो सकती...
ये उसका स्वभाव है वो
एक ऐसा डेडली काॅम्बीनेशन खोजती है जो
बना ही न हो बन ही न सकता हो....

ठीक वैसे ही जैसे कपड़ा खरीदने जाती है तो
कहती कि इसी कलर में कोई दूसरा डिजाइन दिखाओ, इसी डिजाइन में कोई दूसरा कलर दिखाओ
कपड़े का गट्ठर लगा देती है...
बहुत परिश्रम के बाद एक पसंद आ भी गया,
तो भी संतुष्ट नहीं हो सकती...
आखिरी तक सोचती है कि इसमे ये
डिजाइन ऐसे होता तो परफैक्ट होता...

इन सबके बावजूद एक बहुत बड़ी खूबी भी है
स्त्री के अंदर ...
एक बार उसे कुछ पसंद आ गया तो उसे
आखिरी दम तक सजो के रखती है वो
चाहे रिश्ते हो या चूड़ी...

रंग उतर जाएगा चमक खत्म हो जाएगी
पर खुद से जुदा नहीं करेगी...
बस यही खूबी स्त्री को विशिष्ट बनाती है...

स्त्री से प्रेम में अगर आप ये उम्मीद करते हैं कि
वो आपसे पूरी तरह खुश है तो
आप नादानी में हैं...
ये स्त्री के मूल में ही नहीं है !

क्या आपने कभी बुर्के वाली मतलब मुस्लिम महिला का डिलेवरी के वक्त जरूरत पड़ने पर किया जाने वाला सिजेरियन ऑपरेशन होते सुना ...
27/05/2026

क्या आपने कभी बुर्के वाली मतलब मुस्लिम महिला का डिलेवरी के वक्त जरूरत पड़ने पर किया जाने वाला सिजेरियन ऑपरेशन होते सुना है?

क्या कोई बता सकता है, की लगभग लगभग 95% हिंदु महिलाओं का सिजेरियन ऑपरेशन ही क्यों होता है,,,,,?
और ठीक इसके बिपरीत 99% बुर्के वाली मतलब मुस्लिम महिलाओं की नार्मल डिलेवरी ही क्यों होती है,,,,,?

ऐसा इसलिए है ताकि हिंदु महिलाओं के दिलोदिमाग में बच्चे पैदा करने के प्रति एक डर कायम हो जाए,,,,,, और अगर हिन्दू महिलाओं के दिल मे बच्चा पैदा करने के प्रति डर कायम हो जाता है, तो एक बात तो पक्की है की वो बच्चा पैदा करने से डरेंगी,,,,, और जब हिन्दू धर्म की महिलाएं बच्चा पैदा करने से डरेंगी तो हिन्दू की आबादी घटने के सिवा बढ़ने का कोई चांस नही रहेगा,,,,,

एक बात और हिंदु महिलाओं मे प्रग्नेंसी से लेकर डिलेवरी तक पहले महीने से लेकर आखिरी समय तक इलाज चालू रहता है,,,,
जिससे उनके सामने आर्थिक समस्याएं भी आती है,,,,

वहीं दूसरी तरफ बुर्के वाली महिलाएं हर साल एक बच्चा पैदा करेंगी,,, और सबसे खास बात इनकी जिस दिन डिलीवरी होनी रहती है, उस दिन सुबह अस्पताल जाती है और शाम को बच्चा लेकर वापस घर आ जाती है,,,,,,

खर्च के नाम पर एक फूटी कौड़ी भी नही लगती,,,

और इधर हिंदुओं में पहले महीने से लेकर आखिरी महीने तक पैसों का खर्च और अंत में डिलीवरी के वक्त भी ऑपरेशन का खर्च,,,

और डिलेवरी के वक्त होने वाले ऑपरेशन के कारण हिंदु महिलाएं अपने शरीर से काफी कमजोर हो जाती है,,,,, जिसे recover होने मे भी पैसों का खर्च और कई महीनों का टाइम लग जाता है,,,

इसी कारण हिंदु महिलाएं अपने पूरे जीवन काल मे एक या फिर दो ही बच्चे को जन्म दे पाती हैं,,, और वहीं मुस्लिम महिला 10-12 बच्चों को जन्म देने के बावजूद मजबूत बनी रहती हैं,,,,

आखिर ऐसा कौन सा कारण है कि लगभग लगभग हर हिंदु महिला की डिलीवरी सिजेरियन ऑपरेशन से और ज्यादा खर्चे मे हो रही है, जबकी दूसरी तरफ बुर्के वाली महिलाओं की डिलीवरी नॉर्मल और कम खर्चों मे रही है,,,,,,

हिंदु महिलाएं आर्थिक और शारीरिक रूप से डिलीवरी में कमजोर क्यों हो रही हैं,,,,

इस विषय पर जरूर विचार होना चाहिए,,,,

आखिर क्यों धर्म के आधार पे हिन्दू महिलाओं का पेट काटा जाता

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