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लो भाई इनकी सुन लो... इनके अनुसार भारतीय खिलाढ़ियों क़े बैट में रबढ़ लगा है. 🤣🤣🤣🤣
11/02/2026

लो भाई इनकी सुन लो... इनके अनुसार भारतीय खिलाढ़ियों क़े बैट में रबढ़ लगा है. 🤣🤣🤣🤣

आत्महत्या कभी भी एक पल में लिया गया निर्णय नहीं होती, बल्कि यह लंबे समय से भीतर पलते दर्द, असफलताओं, अपमान और अकेलेपन की...
10/09/2025

आत्महत्या कभी भी एक पल में लिया गया निर्णय नहीं होती, बल्कि यह लंबे समय से भीतर पलते दर्द, असफलताओं, अपमान और अकेलेपन की गहराई में डूब जाने का परिणाम होती है। इंसान अपने मन के तूफ़ान को बार-बार दबाता है, वह मुस्कुराकर सबके बीच जीने की कोशिश करता है, लेकिन भीतर ही भीतर लगातार टूटता चला जाता है। हर बार वह अपने दुख को सह लेता है, खुद को समझा लेता है, लेकिन एक बिंदु ऐसा आता है जब उसका धैर्य जवाब दे देता है। यही वह क्षण होता है जिसे ट्रिगर पॉइंट कहा जा सकता है।

इस नाजुक पल में अगर किसी को ज़रा-सा सहारा मिल जाए, कोई संवेदनशीलता से उसका हाथ पकड़ ले, उसकी चुप्पी को सुन ले, या उसे यह एहसास दिला दे कि वह अकेला नहीं है—तो उसकी ज़िंदगी बच सकती है।

लेकिन अगर यह क्षण बिना सहारे के बीत जाए, तो वही पल जीवन और मृत्यु के बीच की अंतिम दीवार को ढहा देता है। यही वजह है कि हमें अपने आस-पास के लोगों की चुप्पी और उनके टूटते हौसले को समझना चाहिए। एक छोटी-सी संवेदना, एक सच्ची बातचीत, और थोड़ी-सी उम्मीद किसी को आत्महत्या के अंधेरे से खींचकर जीवन की ओर लौटा सकती है।

आख़िरकार, हर आत्महत्या के पीछे एक अधूरी पुकार होती है—अगर वह पुकार समय रहते सुन ली जाए, तो शायद एक जीवन बच सकता है। Vishal dixis ji ke wall se 🙏
🫂
RIP
BROTHER

लोग कहते है घड़ी चौक अंबिकापुर का ❤️ है.
08/09/2025

लोग कहते है घड़ी चौक अंबिकापुर का ❤️ है.

सस्ती सी एक क़मीज़ पहने एक लड़का यूपी रोडवेज़ के बस में चढ़ा कोई सीट ख़ाली नहीं थी। तो पीछे जाकर खड़ा हो गया। और फिर अचा...
24/08/2025

सस्ती सी एक क़मीज़ पहने एक लड़का यूपी रोडवेज़ के बस में चढ़ा कोई सीट ख़ाली नहीं थी।
तो पीछे जाकर खड़ा हो गया।
और फिर अचानक से फूट फूट कर रो पड़ा।
जितना ख़ुद को रोकने की कोशिश करता उतना ही रोना आता। कंडक्टर ने उसे पानी पिलाई और किराया लेनें से मना कर दिया। मगर लड़का देने पर अड़ा रहा।
और रोते रोते अगले स्टॉप पे उतर गया।
फ़ोन पे बहन की रिंग बज रही थी।
उसने उठाया और रो पड़ा कि -
"दीदी मेरा सेलेक्शन नहीं हुआ।
कोचिंग वालों ने कहा है कि मैं बड़ा टीचर नहीं बन सकता।

उधर से बहन ने डाँटा।
रोना बंद करो, एक दिन तुम्हें इससे भी बड़ा बनना है अलख पांडेय।
लड़का चुप हो गया।
बहन की प्रेमभरी डाँट ने दावानल को शांत कर दिया।

कट टू 2022

उत्तरप्रदेश का फ़िज़िक्सवाला बना यूनिकॉर्न -
की खबरें तैरने लगीं।
जगह जगह अलख पांडेय के इंटरव्यू होने लगे।

पर ये सबकुच्छ आसान नहीं था।
अलख के पिता बेहद निश्छल हृदय थे।
इसी निश्छलता में सबकुछ गँवा बैठे।
घर तक बिक गया।
बहन अठारह हज़ार की जॉब करती उसमे अपना, भाई का और घर का तीनों खर्च उठाती।

2016 में अलख ने यूट्यूब पर पढ़ाना शुरू किया। शुरू में सफलता नहीं मिली लेकिन एकबार मिली तो मिलती चली गई। जो कोचिंग अलख पांडेय को एक मास्टर की नौकरी पर रखने को तैयार नहीं थी।
वो उन्हें करोड़ों का पैकेज ऑफर कर रही थी।

पर अलख की ज़िद्द थी।
शिक्षा को गरीब बच्चों तक पहुँचाने की।
अलख ने अपने दोस्तों के साथ फ़िज़िक्स वाला बनाई।
और चार हज़ार में Neet और JEE का कंटेंट देना स्टार्ट कर दिया। allen, goal, Akash जैसे प्रतिष्ठित संस्थान हिल गए। सबको अपना फ़ीस कम करना पड़ गया।
एक बार अनअकेडमी ने फ़िज़िक्स वाला के टीचर पोच कर लिये। बच्चों ने हंगामा काट दिया।
अलख पांडेय को लाइव आकर उन्हें शांत करना पड़ा।

अलख ने ऑनलाइन फ़िज़िक्स के प्रयोगों को दिखाना शुरू किया और ये इतना पॉपुलर हुआ कि आज भतेरे टीचर ये कर रहे हैं।

कट टू 2024

नीट परीक्षा में धांधली हुई।
बच्चों को समझ नहीं आ रहा था क्या करें।
पर अकेले अलख पांडेय ने माहौल बना दिया।
कोटा से NV सर जैसे कई प्रतिष्ठित टीचर
NTA ऑफिस पहुँच गये।

अलख ने कई वीडियो पोस्ट और इंटरव्यू की माध्यम से जागरूकता फैलाई।
विपक्ष से लेकर मीडिया तक इस मुद्दे को उठाने लगा।
फिर देश के नामी वकील जे साईं दीपक को हायर किया और सुप्रीम कोर्ट गए।
जहां आज NTA ने ग्रेस वाली धांधली स्वीकार करके,
ग्रेस मार्क रद्द कर दिया है।

पेपर लीक के मुद्दे पर अभी भी उनका केस
सुप्रीम कोर्ट सुन रहा है।
ऐसे लोग हैं देश का भविष्य
और यहीं लोग किसी भी महान राष्ट्र का निर्माण करते हैं !..... ओमप्रकाश शर्मा जी के वाल से 🙏🙏🙏

26/07/2025

कुछ दिन पहले मैंने Google पर सर्च किया कि
“हेलीकॉप्टर की कीमत कितनी होती है ? "

तब से मेरी ज़िंदगी तबाह हो गई।
"चाहे कहीं भी जाऊँ,
YouTube, Facebook, Instagram
हर जगह से मुझ पर लग्जरी विज्ञापनों की
बौछार होना शुरू हो गई, जैसे कि -

बुर्ज खलीफा में अपनी छुट्टियाँ बिताएँ।
अपनी पत्नी को हीरे का हार उपहार में दें।
मिस्र के पिरामिड आपका इंतज़ार कर रहे हैं।
अभी iPhone 17 की प्री-बुकिंग करें।
कनाडा में अपने सपनों का घर खरीदें।
हमारे पास आपके लिए चाँद पर
5 एकड़ की बेहतरीन ज़मीन है।

फिर इस झंझट से बाहर निकलने के लिए
कल रात मैंने सर्च किया, -
फटे हुए जूते कैसे ठीक करें ?

बस, समस्या हल हो गई।
अब विज्ञापन बदल के आना शुरू हो गए।
आज सुबह से ही Facebook, YouTube और Instagram पर मुझे इस तरह के विज्ञापन दिखाए जा रहे हैं।
सिर्फ़ ₹370 में 2 जोड़ी सैंडल खरीदें
और ₹20 कैशबैक पाएँ।*
वाशिंग पाउडर फलाना सिर्फ ₹100 में
2 किलो के साथ में मग्गा फ्री।
आधा किलो सोन पापड़ी पर
पूरे 100 ग्राम नमकीन मुफ्त।
फटे जूते सस्ते दामों पर रिपेयर करायें😂😂😂😂😂😂

अबिभाजित भारत के शहर लाहौर मे आम बेचता एक किसान
17/07/2025

अबिभाजित भारत के शहर लाहौर मे आम बेचता एक किसान

01/07/2025

Ashish shukla ji ke post se..
रावण को सीता का हरण करना था उसने वेष बनाया ब्राह्मण का। हनुमानजी को राम का भेद लेना हुआ उन्होंने वेष बनाया ब्राह्मण का। कालनेमी को हनुमानजी को उनसे मार्ग से भटकाना हुआ उसने वेष बनाया ब्राह्मण का। कर्ण को परशुराम जी से धनुर्वेद का ज्ञान लेना हुआ वेश बनाया ब्राह्मण का। श्रीकृष्ण को कर्ण को छलना हुआ वेश बनाया ब्राह्मण का। श्रीकृष्ण सहित भीमादि पांडवों को छल से जरासंध का वध करना हुआ वेश बनाया ब्राह्मण का। वरुण को राजा हरिश्चंद्र की परीक्षा लेना हुआ वेश बनाया ब्राह्मण का। विश्वामित्र को राजा हरिश्चंद्र को छलना को हुआ वेश बनाया ब्राह्मण का। विष्णु को राजा बलि को छलना हुआ वेश बनाया ब्राह्मण का। अश्विनी कुमारों को च्यवन ऋषि की पत्नी सुकन्या की परीक्षा लेना हुआ वेश बनाया ब्राह्मण का। अपने अज्ञातवास के दौरान पांडव सहित कुंती तथा द्रौपदी ने कई बार ब्राह्मण का वेश धारण किया।

जब जब किसी को कोई समाजवर्धी , राष्ट्रविरोधी पाप और क्रूर कर्म करना हुआ तो उसने ब्राह्मण का वेश ही धारण किया।
क्यों? क्योंकि ब्राह्मण नाम है एक भरोसे का। ब्राह्मण नाम है एक विश्वास का। ब्राह्मण नाम है सत्य का। ब्राह्मण नाम है धर्म का। ब्राह्मण नाम है सबका कल्याण चाहने वाला,सबको सुखी देखने वाला,सबको साथ लेकर सन्मार्ग पर चलने वाला,राष्ट्रभक्ति , दूरदर्शिता,अध्ययन,लगन, ज्ञान, त्याग, तप, बलिदान ,शील,धैर्य,निष्पक्षता,
संतोष और संयम का।
इसलिए ब्राह्मण के नाम, ब्राह्मण की प्रतिष्ठा का लाभ उठाना बहुत आसान था। उसके वेश से, उसके नाम से लोगों को मूर्ख बनाना आसान था। उसके नाम से लोगों को ठगना आसान था। आज भी यही हो रहा है। हालांकि अब ब्राह्मण नाम ब्रांड नहीं एक धब्बे जैसा लगता है। ब्राह्मण होना पाप जैसा लगता है।

आखिर ब्राह्मण इतने कुकर्मी हैं जो ?
ब्राह्मणों ने सदियों तक मौर्यवंशी सम्राटों, चंवर वंशी क्षत्रिय राजाओं (अब चमार), अहीर-यदुवंशी राजाओं, महार-कहार-कुर्मी-पासी-राजभर,मल्लाह-निषाद जाति के राजाओं, नाई जाति के राजाओं, डोम राजाओं, नागवंशी राजाओं, हैहय वंशी राजाओं, जाट-गुर्जर-पाल,बघेल-परमार-
प्रतिहार राजाओं,मराठा,डोंगरा, चोल-चालुक्य-वेंगी-वर्मन वंशी राजाओं, सूर्यवंशी, चंद्रवंशी चक्रवर्ती सम्राटों ,महाराजाओं का शोषण किया? उन्हें दबाया कुचला, पीड़ित और प्रताड़ित किया। वे राजे ,महराज के परिवार के लोग 80-90% और ब्राह्मण केवल 3-5%। राजे , महाराजे की सेना, उनका राजपरिवार,उनकी प्रजा, उनके हथियार, उनके अस्त्र-शस्त्र,किले, उनका खजाना, उनकी ताकत, उनके साथ उनकी बिरादरी का बल व सहयोग और ब्राह्मण ठहरे कमजोर अल्पसंख्यक?
अल्पसंख्यक होते हुए भी ब्राह्मण एक धोती, शिखा, जनेऊ, तिलक, छोटी सी कुटिया में रहने वाले , कभी कभी भूखे पेट रहकर सोने वाले ने राजे , महाराजे और उनके परिवार को लूट लिया? बर्बाद कर दिया है? सदियों तक शोषण करके तबाह कर दिया? और इस कदर तबाह किया वे अपना सिर ही न उठा सके? अब झूठे और मनगढ़ंत शोषण की झूठी कहानियों पर आधारित इतिहास का बदला लिया जा रहा है?

अफसोस।
लेकिन, लेकिन रुको

या तो क्या गैर ब्राह्मण राजे , महाराजे इतने अनभिज्ञ,अदूरदर्शी , मूर्ख, निर्बुद्धि, कायर, निर्बल ,असहाय और अज्ञानी थे कि उन्हें ब्राह्मणों का अत्याचार, कमीनापन दिखा नहीं अथवा ब्राह्मण वाकई इतने योग्य, सामर्थ्यवान थे कि राजे , महाराजे लोग चकरघिन्नी की तरह सहस्राब्दियों तक नाचते रहे, नट-मरकट की तरह अथवा यह अब तक का सबसे बड़ा झूठ है, षड्यंत्र है, धोखा है।
प्रकृति की अनमोल धरोहर मानव हो ,मानवता दिखाई पड़नी चाहिए ,जातीयता नहीं
इन चंद जातिवादी हिंदू विरोधी,सनातन संस्कृति विरोधी चाटुकारों की राजनैतिक पराकाष्ठा के झांसे में ना आएं ।

गौर से देखो ये कौन है... जी हाँ लार्ड बमुआ..वो कद में छोटा है, चेहरा आम है, बाल नहीं हैं और न ही उसका कोई ट्रेंडी लुक है...
14/06/2025

गौर से देखो ये कौन है... जी हाँ लार्ड बमुआ..
वो कद में छोटा है, चेहरा आम है, बाल नहीं हैं और न ही उसका कोई ट्रेंडी लुक है। जी हाँ उसका नाम Temba Bavuma है।
और अगर तुमने सिर्फ़ उसकी शक्ल देखी है तो यक़ीन मानो, तुमने उसे कभी देखा ही नहीं।

ये वही Bavuma है जिसे South Africa की कप्तानी सौंपी गई जब दुनिया कह रही थी कि “वो तो गली क्रिकेट का भी भरोसेमंद प्लेयर नहीं है।”

वही Bavuma जिसने टेस्ट कप्तान के तौर पर एक भी मैच नहीं हारा। जिसने बुरे दौर में अपनी टीम को संभाला जब खुद उसकी आलोचना होती थी, और चेहरों के रंग पर बेहूदा मीम्स बनाए जाते थे।

आज जब वो ICC World Test Championship Final में मैदान पर उतरा तो फिर से वही घटिया मज़ाक दोहराया गया “ये भी कोई कप्तान है?”
“चेहरा देखो, कॉन्फिडेंस कैसे आएगा?”
“ Ye Naata , G***a toh run bhi nahi banaata!”

लेकिन शायद किसी ने नहीं देखा कि जिस मैदान पर Bavuma अकेला खड़ा था, वहां पूरी टीम उसके इर्द-गिर्द उम्मीद से चिपकी हुई थी। उसने आउट होने से पहले एक बात फिर से साबित कर दी लीडरशिप चमकदार फेस से नहीं, भीतर के चरित्र से होती है।

इस दुनिया में हमें खूबसूरती का पैमाना बदलना पड़ेगा।
वरना हर Temba Bavuma को हम रंग, बाल और चमकती चमड़ी के आधार पर खारिज कर देंगे , बग़ैर ये देखे कि वो एक पूरी टीम की रीढ़ की हड्डी है।

आज, Bavuma भले आउट हो गया लेकिन वो हारा नहीं।क्योंकि उसकी जीत किसी scoreboard से नहीं, बल्कि उस इंसानी गरिमा से होती है जिसे मैदान में कोई कैमरा नहीं पकड़ सकता।

दुआ है टेम्बा बवुमा ये ट्रॉफी उठायें और हर उस इंसान के लिये सबक़ बनें कि इंसान का चेहरा उसकी कद काठी और रंग नहीं उसकी मेहनत का सम्मान पूरे विश्व में किया जाये ।

सलाम है Temba Bavuma को जो हर उस बच्चे के लिए उम्मीद है, जिसे दुनिया “कमतर” समझती है, सिर्फ इसलिए कि वो “सांवला”, “गंजा” या “ग़ैर फ़िल्मी चेहरा” है।

14/06/2025

कोई लेट होकर अपनी जान बचा लेता है और सैकड़ों टाइम पर पहुंच मारे जाते हैं. लाख लीटर ईंधन के विस्फोट के बाद भी एक शख्स अपने पैरों पर खड़ा होकर मौत के चंगुल से निकल जाता है. और दोपहर का खाना खाने बैठे होनहारों पर मौत हज़ारों टन के बोझ को लेकर टूट पड़ती है.

मृत्यु से बड़ा कोई शोक नहीं होता. कोई होगा भी नहीं. हम सब शोक में हैं. हर इंसानी मृत्यु जिसके बारे में मैं सोचता हूँ वो मुझे अपनों के मौत की याद दिला देती है. उन्हीं यादों के दौरान मैंने ये सीखा है की मौत का मातम मनाते हुए भी समझाईश की बातें होनी चाहिए.

मैं आपको वो बात समझाने की कोशिश कर रहा हूँ जिसे अगर ख़ुद समझ पाऊँ तो कलेजे को ठंडक पड़ जाये. मेरी उम्मीद है की आपको समझाने के क्रम में शायद मैं भी उसे समझ जाऊँ.

बात ये है की आपका ज़िंदा रहना एक टाइमिंग है. आप हर पल सिर्फ़ इस बात को लेकर ख़ुश रह सकते हैं की आप ज़िंदा हैं. बेजा चिंता क्या करना, फ़िक्र में क्यों डूबे रहना? आप समझ रहे हैं न?

मैं समझ रहा हूँ न? हाँ थोड़ा थोड़ा!

14/05/2025
बात उस समय की है जब डॉ. अब्दुल कलाम, भारत के प्रिय राष्ट्रपति, कुन्नूर के दौरे पर थे। वहां उन्हें पता चला कि देश के नायक...
08/05/2025

बात उस समय की है जब डॉ. अब्दुल कलाम, भारत के प्रिय राष्ट्रपति, कुन्नूर के दौरे पर थे। वहां उन्हें पता चला कि देश के नायक, फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ, सैन्य अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं। बिना देर किए, कलाम जी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने सैम के स्वास्थ्य का हाल जाना और बड़े स्नेह से पूछा,"क्या आपको यहां कोई तकलीफ है? क्या मैं कुछ ऐसा कर सकता हूं जिससे आपको सहज महसूस हो? कोई शिकायत तो नहीं?"
सैम ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा,"हां, सर, मुझे एक शिकायत है।"
कलाम जी चिंतित हो उठे। उन्होंने तुरंत पूछा, "क्या शिकायत है, सैम?"
सैम की आंखों में देशप्रेम की चमक थी। उन्होंने कहा,"सर, मेरी शिकायत यह है कि मेरे प्यारे देश के सबसे सम्मानित राष्ट्रपति मेरे सामने खड़े हैं, और मैं उन्हें सलामी नहीं दे पा रहा।"
यह सुनते ही कमरे में सन्नाटा छा गया। कलाम जी ने सैम का हाथ थाम लिया। उस पल दोनों की आंखों में आंसू थे—एक देशभक्त का दूसरे देशभक्त के लिए सम्मान, प्रेम और गर्व।

जाते-जाते सैम ने एक बात बताई। उन्हें फील्ड मार्शल की बढ़ी हुई पेंशन का भुगतान नहीं मिला था। 2007 में सरकार ने निर्णय लिया था कि फील्ड मार्शल, जो कभी सेवानिवृत्त नहीं होते, उन्हें सेवा प्रमुखों के बराबर पूर्ण पेंशन मिलेगी। लेकिन यह राशि सैम तक नहीं पहुंची थी।
कलाम जी ने इसे दिल से लिया। दिल्ली लौटते ही उन्होंने तुरंत कार्रवाई की। मात्र एक सप्ताह में सैम की बकाया पेंशन, लगभग 1.30 करोड़ रुपये, का चेक तैयार करवाया गया। रक्षा सचिव विशेष विमान से यह चेक लेकर वेलिंग्टन, ऊटी पहुंचे।
निस्वार्थ देशप्रेम
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। सैम मानेकशॉ, जिन्हें "सैम बहादुर" के नाम से जाना जाता है, ने उस चेक को देखते ही एक ऐसा कदम उठाया जो उनके महान चरित्र को दर्शाता है। उन्होंने पूरी राशि—1.30 करोड़ रुपये—सेना राहत कोष में दान कर दी।
यह था सैम का देशप्रेम—निस्वार्थ, अटूट और प्रेरणादायक।
किसे सलाम करें? अगर आपको गर्व महशूष हुआ तो आप जय हिन्द अवश्य लिखें।

डॉ. कलाम, जिन्होंने एक सैनिक की तकलीफ को अपना दायित्व समझा, और सैम मानेकशॉ, जिन्होंने अपने लिए कुछ न रखकर देश की सेवा को चुना—दोनों ही हमारे सच्चे नायक हैं। एक ने दूसरे के सम्मान की रक्षा की, तो दूसरे ने अपने बलिदान से देश को गौरवान्वित किया।
आज जब हम इस कहानी को याद कर

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