04/02/2024
(जुमुआ़ के दिन घर से मस्जिद का सफ़र व तरीक़ा)
✍️अल्हम्दुलिल्लाह! मुहम्मद तौह़िद या’नी मैं क़ुतुबे दीन में ग़ोता-ज़न होने के बाद और आवाम होने के नाते उ़लमा के इ़ल्म से और आवाम की कोताही से अच्छी तरह वाकिफ हैं।
उ़लमाए दीन हर जी आवाम के इस्लाह़ की कोशिश करते रहते हैं, मगर आवाम जुमुआ़ को बस दो रक्अ़त नमाज़ पढ़ कर सोचता है मैंने अपना हक़ अदा कर दिया इन्हीं सब चीजों को देखते हुए ये पोस्ट मैं लिख रहा हूं! और इमाम हज़रात से गुजारिश है कि आप भी इस पोस्ट को याद कर के आवाम की इस्लाह़ करें क्योंकि हुज़ूर ﷺ ने इरशाद फ़रमाया: बेशक नेकी की तरफ़ राहनुमाई करने वाला नेकी करने वाले की तरह है।
*📕سنن الترمذی، الحدیث: ٢٦٧٩، ص٣٠٥)*
और हज़रते सय्यिदुना इमाम मालिक रहमतुल्लाहि अ़लैहि' फ़रमाते हैं कि किसी शख़्स को नमाज़ के मसाइल बताना रूए ज़मीन की तमाम दौलत स-दका करने से बेहतर है,
और किसी की दीनी उलझन दूर कर देना सौ100 ह़ज करने से अफ़ज़ल है,
और किसी शख़्स को दीनी मशवरा देना सौ100 ग़ज़वात में जिहाद करने से बेहतर है।
*📕بُستانُ المُحَدثِین، ص٣٩)*
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✍️बहरहाल! अब यहां से तरीक़ा और सफ़र शूरू करते हैं: हुज़ूर नबिय्ये करीम ﷺ का फ़रमाने आ़लीशान है: जुमुआ़ का दिन तमाम दिनों का सरदार है और अल्लाह के नज़्दीक सब से बड़ा है और वोह अल्लाह के नज़्दीक ई़दुल अज़्हा और ईदुल फ़ित्र से बड़ा है।
*📕سنن ابنِ ماجه ج٢، ص٨، حدیث ١٠٨٤)*
✍️प्यारे इस्लामी भाइयों! हम कितने खुश नसीब हैं कि अल्लाह तबा-र-क व तआ़ला ने अपने प्यारे ह़बीब ﷺ के स-दक़े हमें जुमुअ़तुल मुबारक की ने'मत से सरफ़राज़ फ़रमाया।
अफ्सोस! हम ना क़दरे जुमुआ़ शरीफ़ को भी आम दिनों की तरह़ ग़फ़्लत में गुज़ार देते हैं हालांकि जुमुआ़ यौमे ई़द है, जुमुआ़ सब दिनों का सरदार है, जुमुआ़ के रोज़ जहन्नम की आग नहीं सुलगाई जाती, जुमुआ़ की रात दोज़ख़ के दरवाज़े नहीं खुलते, जुमुआ़ को बरोज़े क़ियामत दुल्हन की तरह़ उठाया जाएगा, जुमुआ़ के रोज़ मरने वाला ख़ुश नसीब मुसल्मान शहीद का रुत्बा पाता और अ़ज़ाबे क़ब्र से महफ़ूज़ हो जाता है।
✍️मुफ़स्सिरे शहीर ह़कीमुल उम्मत हज़रते मुफ़्ती अह़मद यार ख़ान रह०) के फ़रमान के मुताबिक़, जुमुआ को हज़ हो तो इस का सवाब सत्तर70 ह़ज के बराबर है, जुमुआ की एक नेकी का सवाब सत्तर गुना है। (चूंकि जुमुआ का शरफ़ बहुत ज़ियादा है लिहाज़ा) जुमुआ के रोज़ गुनाह का अज़ाब भी सत्तर70 गुना है।
📘मुलख्ख़स अज़ मिरआत' जिल्द-2, सफ़ा 323, 325, 336)
✍️बहरहाल! हम यहां मुसलमान भाइयों के लिए जुमुअ़तुल मुबारक के दिन घर से मस्जिद का सफ़र व तरीक़ा बड़ी तफ़्सील से लिखते हैं:-👇
सरवरे आ़लम ﷺ ने फ़रमाया: जो शख़्स जुम्अ़े के दिन गुस्ल करता है तो उस के तमाम गुनाह झड़ जाते हैं और जब मस्जिद की तरफ़ चलता है तो हर क़दम के बदले बीस साल की इबादत का सवाब लिखा जाता है।
और जब नमाज़ पढ़ लेता है तो दो सौ बरस के आमाल की नेकियाँ मिलती हैं।
📕तोहफ़तुल वाइज़ीन)
📗क