16/07/2026
#अकेला_न्याय_की_मशाल_लेकर_खड़ा_था,,,,,
एक ऐसा नाम, जिसने धौलपुर के दुर्गम इलाकों और नेटवर्क से दूर क्षेत्रों से भी अपनी आवाज़ बुलंद कर अनेक युवाओं को न्याय की मांग के लिए जागरूक करने का प्रयास किया— #प्रहलाद_खटाना_कैमरी,,!!
जब कई लोग मौन थे, तब भाई प्रहलाद खटाना ने पीड़ित परिवार के दर्द को अपना दर्द समझकर न्याय की आवाज़ उठाई। अजमेर जेल के बाहर से शुरू हुआ उनका संघर्ष धीरे-धीरे एक बड़े जनसमर्थन अभियान का रूप लेता गया।
यह रास्ता आसान नहीं था। कई बार भूखे-प्यासे रहकर, सीमित संसाधनों के बीच और बिना मोबाइल नेटवर्क वाले इलाकों में भी उन्होंने अपने प्रयास जारी रखे। उनका एक ही संकल्प था—पीड़ित परिवार को न्याय की लड़ाई में अकेला महसूस न होने देना।
जब बहुत से लोग केवल सोशल मीडिया तक सीमित थे, तब प्रहलाद खटाना ज़मीन पर लोगों से मिल रहे थे, समर्थन जुटा रहे थे और न्याय की मांग को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे थे। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और गाँव-गाँव, शहर-शहर तक लोगों को जोड़ने का प्रयास जारी रखा।
इतिहास उन लोगों को याद रखता है जो कठिन समय में अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हैं। संघर्ष, त्याग और समर्पण ही किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान बनते हैं।
यदि भविष्य में इस संघर्ष का उल्लेख होगा, तो यह भी याद किया जाएगा कि जब परिस्थितियाँ कठिन थीं, तब एक व्यक्ति न्याय की मशाल थामे खड़ा रहा और उसे बुझने नहीं दिया।
भाई प्रहलाद खटाना (कैमरी) के निस्वार्थ प्रयास, समर्पण और न्याय के लिए किए गए संघर्ष को हार्दिक नमन एवं सम्मान।