08/03/2026
1.
“अक्सर इंसान दुनिया से नहीं हारता,
वो अपने ही घर की परिस्थितियों से टूट जाता है।”
2.
“लोग समझते हैं कि आदमी बाहर की लड़ाई हार गया,
सच तो यह है कि वह घर की मजबूरियों से हार जाता है।”
3.
“किस्मत से नहीं हारता इंसान,
अक्सर घर की जिम्मेदारियाँ उसे झुका देती हैं।”
4.
“दुनिया की ठोकरें उतना नहीं गिराती,
जितना घर की परेशानियाँ इंसान को अंदर से तोड़ देती हैं।”
दोस्तों समझदारी से काम लिजिए कि घर में कोई टकराव न हो मेरे मित्र