28/01/2026
शुप्रभात
अभिवादन स्वीकार किजिए ।।
"कैसा लगता है सवर्ण (ब्राह्मण) होना"
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नोट- यह कोई जातिवाद का विषय नही यह मेरा व्यक्तीगत अनुभव है।क्योकी मै जो महसूस करता हूँ वही तहरीर करता हूँ।अगर आप सब भी इस बात को समझ गये यकीन मानिये ऐसा लगेगा की सब की पीड़ा यही है।
भारत में ब्राह्मण होना अब वंशागत बिमारी हो चुका है।हमारे पुरखो ने हमे ऐसी विरासत दी है जिससे ना हम अब गर्व कर सकते है ना ही इसे छोड़ सकते हैं।शरीर जल जायेगी लेकिन हमारी जाती अमर रहेगी।ना हमने वो 96 एकड़ वाली बलथर सीधेगौर वाली जमींदारी का रूआब देखा है ना ही किसी के कान में सीसे पिघलाया ना ही हमने किसी के साथ भेदभाव किया है फिर भी हम शोषक वर्ग है।।
मैं जब से देख रहा हूँ इस समाज को यहा अगर कही भेदभाव है तो वो है अमीरी गरीबी के बीच में मुझे पुरी तरह याद हम एक गृहस्त सामान्य किसान परिवार मे पले बढे तब से आजतक हमारे साथ भेदभाव हुआ है वो किस लिए की हम गरीब थे दुसरी तरफ एक अमीर परिवार का बच्चा जो किसी जाति समुदाय का हो उसे हर जगह तरजीह दी जाती है।।
और ये भेदभाव समाज तो छोड़िये अपने परिवार रिस्तेदारी में भी आजमा के देख लिजिएगा किसी इवेन्ट में आप गये हे वहा रिस्तेदार अलग अलग आर्थिक हैसियत आयेगे लेकिन जो कार से उतरेगा जिसकी पत्नी सोने के गहनो से लदी होगी महफील वही लूट कर जायेगा गरीब बेचारा रिस्ते की मर्यादा मे दात चियार कर देखता रह जायेगा ये होता है भेदभाव।।और ये भेदभाव हर जाति मैं लेकिन वहा अम्बेडकर की आत्मा मर जाती है।
और अमीर और गरीब की जाति नही होती वो हर जगह होता है।
डार्विन का एक सैद्धान्तिक विचार है.."Survival of the fittest"
अब धारणा चेंज हो चुकी हैं अब Survival of richest का जमाना है।।आप किस जाति मजहब पंत से है कोई मायने नही रखता आप के पास पैसा हैं दुनिया आप के सामने सजदा करेगी।ट्रम्प की क्या जाती क्या एलन मस्क की क्या जाती है पता है किसी को?ये जाति वाली धारणा मन से निकाल कर अगर राम राज्य जैसी समाजवादी आदर्श समाज बनाना चाहते है तो जंग पूँजीवादी विचारधारा से करो। जो हमारा और आप का हक खा रहे है।।अब ना ठाकुर का कुँआ है ना ब्राह्मण का फरमान अब असली ठाकुर पूँजीपती है वही सबका हक खा रहे।।क्यो बेवजह बाभन ठाकुर के नाम पर लड़ रहे हो ये सियासी तवा़फ का डुपट्टा है साहब ये किसी के आशुओ से नम होगा।।ये सारे तवायफ उन्ही चंद पुजपतियो के इसारे पर ठुमके लगाते है।
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