28/05/2026
Manoj officel
यदि हमारे प्रियजन को चोट लगती है, तो हमें अत्यंत पीड़ा होती है। इसी प्रकार, जब कोई कसाई किसी निर्दोष जीव का गला काटता है, तो उस जीव के भीतर की रूह चीख उठती है। दूसरों का गला काटकर सुख और मोक्ष की कामना करना व्यर्थ है।