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10/07/2026

अविवेक ही भ्रम का मूल हैकेवल धन मिलने से ही सुख मिलेगा — यह भ्रम है। केवल अधिकार मिलने से ही शांति मिलेगी — यह भ्रम है। ...
07/07/2026

अविवेक ही भ्रम का मूल है

केवल धन मिलने से ही सुख मिलेगा — यह भ्रम है। केवल अधिकार मिलने से ही शांति मिलेगी — यह भ्रम है। दूसरे बदल जाएँगे, तभी मेरा जीवन सुधरेगा — यह भ्रम है। बाहरी परिस्थितियाँ बदलेंगी, तभी खुशी मिलेगी — यह भ्रम है।

इन सभी भ्रमों का कारण बाहर की दुनिया नहीं, अविवेक है।

जीवन का संदेश:

अविवेक → भ्रम → आसक्ति → दुःख

विवेक → सत्य का बोध → वैराग्य → शांति

जीवन का वास्तविक परिवर्तन बाहर से नहीं, बल्कि विवेक के जागरण से भीतर से प्रारम्भ होता है।

"व्यक्ति का निर्माण जन्म से नहीं, बल्कि संस्कारों से प्रारम्भ होकर शिक्षा, श्रेष्ठ विचार, सत्संग, आत्मानुशासन और सत्कर्म...
06/07/2026

"व्यक्ति का निर्माण जन्म से नहीं, बल्कि संस्कारों से प्रारम्भ होकर शिक्षा, श्रेष्ठ विचार, सत्संग, आत्मानुशासन और सत्कर्मों से पूर्ण होता है।"
🕉️ "विचार चरित्र बनाते हैं, चरित्र व्यक्तित्व बनाता है, और व्यक्तित्व ही जीवन की दिशा तथा सफलता निर्धारित करता है।" 🕉️
#ಸುಭಾಷಿತ

05/07/2026

#ಗರುಡಪುರಾಣ

🕉️ मानव जीवन और जीवन-क्रम — संक्षिप्त सार 🕉️मनुष्य केवल शरीर नहीं है; वह विवेक, संबंध, मूल्य और जागरूकता का प्रतीक है। उ...
05/07/2026

🕉️ मानव जीवन और जीवन-क्रम — संक्षिप्त सार 🕉️

मनुष्य केवल शरीर नहीं है; वह विवेक, संबंध, मूल्य और जागरूकता का प्रतीक है। उसका उद्देश्य केवल जीना नहीं, बल्कि सही ढंग से जीना है।

मनुष्य के पास इच्छा, बुद्धि और शक्ति है, लेकिन यदि इन्हें विवेक, नैतिकता और न्याय का मार्गदर्शन न मिले, तो जीवन दिशाहीन हो जाता है। जिस प्रकार नदी को प्रवाह के लिए तट चाहिए, उसी प्रकार मनुष्य के जीवन को संस्कार, मानवीय मूल्य और जीवन-क्रम की आवश्यकता होती है।

जीवन की वास्तविक सफलता धन, पद या उपलब्धियों में नहीं, बल्कि शांति, विश्वास, अच्छे संबंध और सह-अस्तित्व में है। विज्ञान और विवेक का संतुलित समन्वय ही मनुष्य को पूर्ण बनाता है।

"मानव जाति एक है, कर्म अनेक हैं।" भाषा, धर्म, संस्कृति और व्यवसाय अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता, प्रेम, न्याय और परस्पर सम्मान सभी के लिए समान होने चाहिए।

मानव जीवन-क्रम व्यक्ति से प्रारंभ होकर परिवार, समाज, राष्ट्र और अंततः समस्त विश्व तक पहुँचता है। जब व्यक्ति श्रेष्ठ बनता है, तो परिवार सुदृढ़ होता है; परिवार सुदृढ़ हो तो समाज और राष्ट्र भी समृद्ध बनते हैं।

जीवन का सार:
"मैं कैसे जीऊँ?" से आगे बढ़कर "हम सब कैसे सुख, शांति और सम्मान के साथ जीएँ?"— इसी चेतना का नाम मानव जीवन-क्रम है।

🕉️ "ग्रह परिस्थितियों का संकेत दे सकते हैं; किन्तु मनुष्य के व्यक्तित्व का निर्माण उसके संस्कार और सत्कर्म ही करते हैं।"...
05/07/2026

🕉️ "ग्रह परिस्थितियों का संकेत दे सकते हैं; किन्तु मनुष्य के व्यक्तित्व का निर्माण उसके संस्कार और सत्कर्म ही करते हैं।" 🕉️

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Mangalore
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