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2025 में सेब बागवानों के लिए कठिन साल – 2026 में समय पर बिक्री होगी अहमसाल 2025 सेब उत्पादकों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रह...
16/08/2025

2025 में सेब बागवानों के लिए कठिन साल – 2026 में समय पर बिक्री होगी अहम
साल 2025 सेब उत्पादकों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। मौसम और बीमारियों, खासकर पत्तियों को झाड़ने वाली Necrotic Leaf समस्या, ने पैदावार व क्वालिटी दोनों को नुकसान पहुँचाया। बाज़ार में अजीब हालात रहे — जल्दी तोड़ा गया कच्चा सेब 3000 रु. प्रति पेटी तक बिका, वहीं बेहतरीन ग्रेड का सेब 1500–2000 रु. में ही सिमट गया। इससे साफ है कि अब असल खेल “समय” का है, सिर्फ क्वालिटी का नहीं।
2026 के लिए विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं:
1. फसल का चरणवार उतार – जल्दी पकने वाली किस्में जुलाई-अगस्त में, प्रीमियम ग्रेड अगस्त-सितंबर में, और स्टोरेज वाली किस्में सितंबर के आख़िर में।
2. मार्केट चैनल विविधीकरण – स्थानीय बाज़ार, डायरेक्ट बिक्री और कोल्ड स्टोरेज का संतुलित उपयोग।
3. सामूहिक बिक्री व पहले से समझौते – समूह बनाकर बड़े खरीदारों से प्री-सीज़न रेट फ़ाइनल करना।
बागवानों को सलाह है कि क्वालिटी के साथ-साथ सही समय और सही बाज़ार पर नज़र रखें, ताकि घाटे को मुनाफ़े में बदला जा सके।

अगर आप मेरी बातों से सहमत हैं तो तुम मुझे सुझाब दे और इस पोस्ट को लाइक और शेयर करें और बताएं कि कैसे इन चीजों का समाधान हो सकता है कैसे हम बाजार में अच्छी पकड़ बना सकते हैं।



• #बाग़बानOfHimachal






बायर ने धान में शीथ ब्लाइट को नियंत्रित करने के लिए नया कवकनाशी लॉन्च कियाबीएल बेंगलुरु ब्यूरो अपडेट - 11 जुलाई, 2025 शा...
16/07/2025

बायर ने धान में शीथ ब्लाइट को नियंत्रित करने के लिए नया कवकनाशी लॉन्च किया
बीएल बेंगलुरु ब्यूरो अपडेट - 11 जुलाई, 2025 शाम 04:45 बजे।
फेलुजीत, पेनफ्लूफेन और टेबुकोनाजोल के मिश्रण से बने अपने अनूठे फॉर्मूलेशन के साथ, किसानों को शीथ ब्लाइट नामक लगातार फैलने वाली बीमारी से निपटने में मदद करेगा, जिसकी उत्पत्ति मिट्टी में होती है।
बायर ने फेलुजीत नामक एक अभिनव कवकनाशी के लॉन्च की घोषणा की है, जो धान की खेती में शीथ ब्लाइट से पौधों के सभी भागों की सुरक्षा के लिए डिज़ाइन किया गया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि यह उत्पाद जुलाई से देश के प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों में उपलब्ध होगा।

पेनफ्लूफेन और टेबुकोनाज़ोल के मिश्रण से युक्त अपने अनूठे फॉर्मूलेशन के साथ, फेलुजिट किसानों को मिट्टी में उत्पन्न होने वाली शीथ ब्लाइट नामक लगातार बीमारी से निपटने में मदद करेगा। बायर ने बताया कि यह दवा अपनी दोहरी क्रियाशीलता के कारण पूरे पौधे में शीथ ब्लाइट की वृद्धि को प्रभावी ढंग से रोकती है और किसानों को एक विश्वसनीय समाधान प्रदान करती है जो फसल की पैदावार और गुणवत्ता को बढ़ाता है।

फेलुजीत का एक ही छिड़काव बेहतरीन प्रभाव प्रदान करता है जो मौजूदा बाज़ार मानकों से दोगुने से भी ज़्यादा समय तक चलता है। कंपनी ने कहा कि इसका मतलब है कि किसान कई बार छिड़काव के बोझ के बिना प्रभावी रोग नियंत्रण प्राप्त कर सकते हैं, जिससे समय और श्रम लागत दोनों की बचत होती है।
"फेलुजीत किसानों के लिए एक बेहद प्रभावी समाधान है, जो शीथ ब्लाइट पर उत्कृष्ट नियंत्रण प्रदान करता है और साथ ही उनकी कृषि पद्धतियों को सुव्यवस्थित करता है। वैश्विक खाद्य सुरक्षा में धान की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए, हमारा नवाचार किसानों को कम उपयोग में प्रभावी ढंग से रोग प्रबंधन करने, अपने संसाधनों का अनुकूलन करने और बढ़ती कृषि चुनौतियों के बीच अपनी लाभप्रदता बढ़ाने में सक्षम बनाता है।"

भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका में बायर के फसल विज्ञान प्रभाग के क्लस्टर वाणिज्यिक प्रमुख मोहन बाबू ने कहा।

फेलुजीत की अद्वितीय बिक्री विशेषता इसकी दोहरी क्रिया वाली संरचना में निहित है, जो राइजोक्टोनिया, जो शीथ ब्लाइट का मुख्य कारण है, से निपटने के लिए दो सक्रिय अवयवों की शक्तियों को जोड़ती है।

बायर ने कहा कि 320 मिली और 1 लीटर के सुविधाजनक आकार में उपलब्ध, फेलुजीत शीथ ब्लाइट के खिलाफ लड़ाई में एक आवश्यक उपकरण बनने के लिए तैयार है।

सेब उत्पादकों के लिए सलाह: 🍎 सेब बागीचों में अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट/ब्लॉच रोग का प्रबंधन⚠️ वर्तमान स्थितिमौसमीय परिस्थिति...
09/07/2025

सेब उत्पादकों के लिए सलाह:
🍎 सेब बागीचों में अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट/ब्लॉच रोग का प्रबंधन
⚠️ वर्तमान स्थिति
मौसमीय परिस्थितियों के कारण सेब बागीचों में अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट/ब्लॉच रोग का प्रकोप बढ़ रहा है। यह रोग विशेष रूप से उन बागीचों में गंभीर है जहाँ:

पत्तियाँ माइट के कारण कमजोर हैं
कैंकर या जड़ रोग की समस्या है
असंतुलित उर्वरक का उपयोग हो रहा है

🎯 मुख्य सिफारिशें

अपने बागीचे की समस्या के अनुसार ही स्प्रे की योजना बनाएं
एक ही स्प्रे में पोषक तत्व, कीटनाशक और फफूंदनाशी को मिलाने से बचें
विश्वविद्यालय एवं विभाग द्वारा निर्धारित स्प्रे शेड्यूल का पालन करें

फफूंदनाशी का चुनाव
🌧️ अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए :

जिनेब + हेक्साकोनाज़ोल
मेटीरैम + पाइराक्लोस्त्रोबिन
कैप्टान + टेबुकोनाज़ोल
डोडिन

☀️ कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए कांटेक्ट फफूंदनाशी का स्प्रे:

मैनकोजे़ब
प्रोपिनेब
जिनेब
मेटीरैम

🎯 रोग की तीव्रता कम से मध्यम स्तर के लिए:

कार्बेन्डाजिम + फ्लुसिलाज़ोल
फ्लूपायरम + टेबुकोनाज़ोल
फ्लक्सापायरोक्सैड + पाइराक्लोस्त्रोबिन

🐛 माइट प्रबंधन
निम्न दवाओं का विश्वविद्यालय एवं बागवानी विभाग की सिफारिशों के अनुसार उपयोग करें:

फेनेज़ाक्विन
फेनपाय्रोक्सीमेट
प्रोपार्जाइट
हेक्सिथायाज़ॉक्स
स्पायरोमेसीफेन
सायनोपाय्राफेन

🌱 एकीकृत प्रबंधन (रासायनिक उपचार के साथ-साथ)
तत्काल करने योग्य कार्य:
✅ संक्रमित पत्तियों और रोगग्रस्त टहनियों को तुरंत हटाकर नष्ट करें
✅ बागीचे में पर्याप्त हवा का प्रवाह बनाए रखें
✅ उचित जल निकासी व्यवस्था बनाए रखें (पानी का ठहराव न हो)
बचने योग्य कार्य:
❌ अधिक नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग न करें (कोमल व रोगग्रस्त वृद्धि को बढ़ावा देता है)
❌ एक ही फफूंदनाशी का बार-बार उपयोग न करें
📊 नियमित निगरानी

बागीचे का नियमित निरीक्षण करें
माइट व रोग के शुरुआती लक्षणों की पहचान करें
समय पर त्वरित प्रबंधन करें

रसट माइट (Rust Mite), यूरोपियन रेड माइट (European Red Mite), और टी स्पॉटेड माइट (Two-Spotted Mite) — ये तीनों माइट्स होत...
18/06/2025

रसट माइट (Rust Mite), यूरोपियन रेड माइट (European Red Mite), और टी स्पॉटेड माइट (Two-Spotted Mite) — ये तीनों माइट्स होते हैं जो फलदार वृक्षों (जैसे सेब, नाशपाती आदि) की पत्तियों और फलों को नुकसान पहुँचाते हैं। ये बहुत छोटे कीट होते हैं जो अक्सर आँखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन इनका प्रभाव पौधों पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है

1. रसट माइट (Rust Mite):
• वैज्ञानिक नाम: Aculus schlechtendali
• यह माइट बहुत छोटा और पीला-भूरा रंग का होता है।
• पत्तियों और फलों की ऊपरी परत को खुरचकर रस चूसता है।
• इसके हमले से फल की त्वचा खुरदुरी और भूरी (Rusty) हो जाती है, जिससे ग्रेडिंग और मार्केट वैल्यू प्रभावित होती है।
• ज़्यादातर सेब की फसल में देखने को मिलता है।

2. यूरोपियन रेड माइट (European Red Mite):
• वैज्ञानिक नाम: Panonychus ulmi
• यह माइट लाल रंग का होता है और विशेष रूप से पत्तियों पर पाया जाता है।
• यह पत्तियों की निचली सतह से रस चूसता है, जिससे पत्तियाँ पीली, भूरे रंग की और सूखी हो जाती हैं।
• भारी संक्रमण होने पर पौधे की वृद्धि रुक जाती है, फल छोटे और कमज़ोर हो जाते हैं।

3. टी स्पॉटेड माइट / टू स्पॉटेड माइट (Two-Spotted Mite):
• वैज्ञानिक नाम: Tetranychus urticae
• यह माइट हल्का हरा या पीला होता है और इसकी पीठ पर दो काले धब्बे (दो स्पॉट) होते हैं।
• यह भी पत्तियों से रस चूसता है, जिससे पत्तियाँ धब्बेदार, पीली और अंततः झड़ जाती हैं।
• गर्म और सूखे मौसम में यह बहुत तेज़ी से बढ़ता है।

नियंत्रण के उपाय:

रासायनिक तरीके (जरूरत पड़ने पर):
• Propargite, Fenazaquin, या Abamectin जैसे माइटिसाइड्स का प्रयोग (सिफारिश अनुसार मात्रा में)।

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