07/10/2023
*हलाल रोज़ी कमाने का बयान* #03
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ
*हदीष :-* हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया कि हलाल कमाई की तलाश भी फ़राइज़ के बाद एक फ़रीजा है।
*हदीष :-* हुज़ूर ﷺ का इरशाद है कि लोगों पर एक ऐसा ज़माना आएगा कि आदमी परवाह नहीं करेगा कि इस माल को कहा से हासिल किया है हलाल से या हराम से ?
*हदीष :-* हुज़ूरे अक्दस ﷺ ने फ़रमाया कि जो बन्दा हराम माल हासिल करता है और उस को सदका करे तो मक़बूल नहीं और खर्च करे तो उस के लिये इस में बरकत नहीं और अपने बाद छोड़ कर मरे तो जहन्नम में जाने का सामान है (या'नी माल की तीन हालतें हैं और हराम माल की तीनों हालतें ख़राब ही हैं)
*हदीष :-* चोरी,डाका,गुसब,खियानत,रिश्व,शराब,सीनेमा,जूआ,सट्टा,नाच,गाना,झूट,फरेब,धोकाबाज़ी,कम नाप तोल,बिगैर काम किये मज़दूरी और तनख़्वाह लेना,सूद वगैरा येह सारी कमाइयां हुराम व नाजाइज़ हैं।
*हदीष :-* जिस शख़्स ने हराम तरीकों से माल जम्अ किया और मर गया तो उस के वारिषों पर येह लाज़िम है कि अगर उन्हें मालूम हो कि येह फुलां फुलां के अम्वाल हैं तो उन को वापस कर दें और न मा'लूम हो तो कुल मालों को सदक़ा कर दें कि जान बुझ कर हराम माल को लेना जाइज़ नहीं।
👉🏻खुलासए कलाम येह है कि मुसलमान को लाज़िम है कि हमेशा माले हराम से बचता रहे। हदीष शरीफ़ में है कि माले हराम जब हलाल माल में मिल जाता है तो माले हराम हलाल को भी बरबाद कर देता है इस ज़माने में लोग हलाल व हराम की परवाह नहीं करते येह क़ियामत की निशानियों में से एक निशानी है
👉🏻लेकिन बहर हाल एक मुसलमान के लिये हलाल व हराम में फर्क करना फ़र्ज़ है।
ऊपर तुम येह हदीष पढ़ चुके हो कि खुदा के फ़राइज़ के बाद रिज़्के हलाल तलाश करना भी मुसलमान के लिये एक फ़रीजा है।
*✍🏻बाकी अगली पोस्ट में..ان شاء الله*
*📓जन्नती जेवर 461*
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मिट जाऐ गुनाहो का तसव्वुर ही दुन्या से, गर होजाए यक़ीन के.....
*अल्लाह सबसे बड़ा है, अल्लाह देख रहा है...*
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