16/03/2026
आगे सफ़र था पीछे हमसफ़र था... रुकती तो सफ़र छूट जाता और चलती तो हमसफ़र छूट जाता 13.5K मंज़िल की भी हसरत थी और उनसे भी मोहब्बत थी, ए दिल तू ही बता, उस वक़्त में कहाँ जाती मुद्दत का सफ़र भी था, और बरसो का हमसफ़र भी था रुकते तो बिछड़ जाते और चलते तो बिखर जाते, यूँ समझ लो प्यास लगी थी ग़ज़ब की मगर पानी में ज़हर था, पीते तो मर जाते और न पीते तो भी मर जाते, बस यही दो मसले जिंदगी भर न हल हुए..!!! ना नींद पूरी हुई, न ख्वाब मुकम्मल हुए..!! वक़्त ने कहा काश थोड़ा और सब्र होता..!! सब्र ने कहा काश थोड़ा और वक्त होता..!! भाई आप लोग फॉलो नहीं करते है
#वीडियो_पसन्द_आये_तो_फॉलो_जरूर_कर_दियो_भाई