Vatan Singh चंद्रवंशी

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28/05/2024

*_👉 बुरे समय में "दिलासा" देने वाला "अजनबी" ही क्यों ना हो, वह "दिल" में "उतर" जाता है,_*

*_और बुरे समय में "किनारा" करने वाला "अपना" ही क्यों ना हो, वह दिल से "उतर" जाता है,_*

*_अगर कभी अपनी "दौलत" देखनी हो तो "बैंक बैलेंस" या "तिजोरी" की तरफ "मत" देखो, अपनी "आंख" से एक "आंसू" गिरा कर देखो, कि कितने लोग इसे "पोंछने" के लिए आते हैं,_*

*_कोई तुम्हारे लिए "दरवाजा" बंद कर दे, तो उसे "एहसास" दिला दो की" कुंडी" दोनों तरफ होती है,🙏_*

05/12/2023

*सबको पसंद है गर्दन झुकाए हुए लोग,*
*मेरा गुनाह है कि मैं सर उठाकर चलता हूं।*
*शुभ रात्रि।*

03/12/2023

#ठंड आते ही #पंखों की हालत वैसी हो जाती है

जैसे #चुनाव के बाद #वोटरों की😅

#कोई नहीं पूछता...!
#शब्दसिंधु

BJP के स्टारप्रचारक  Rahul Gandhi की मेहनत का फल भाइयो खिल गया हैं देखो कमल ,,, 😍🏵️
03/12/2023

BJP के स्टारप्रचारक Rahul Gandhi की मेहनत का फल
भाइयो खिल गया हैं देखो कमल ,,, 😍🏵️

02/12/2023

शादियाँ शुरु हो गई हैँ ..

खुद के पैसे की आइसक्रीम खाते हैं तब ढक्कन भी चाट लेते हैं। बीस रुपये के पानी पताशे का एक बूंद पानी तक नहीं छोड़ते।
फिर किसी बेटी की शादी में इतनी प्लेट भरते क्यों हो ?
विचार अवश्य करें 🙏🏻

〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️सर्दियों के मौसम में एक बूढी औरत अपने घर के कोनेमें ठंड से तड़फ रही थी।।जवानी में उसके पति का देहांत ह...
02/12/2023

〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
सर्दियों के मौसम में एक बूढी औरत अपने घर के कोने
में ठंड से तड़फ रही थी।।
जवानी में उसके पति का देहांत हो गया था
घर में एक छोटा बेटा था, उस बेटे के उज्जवल भविष्य के
लिए
उस माँ ने घर-घर जाकर काम किया
काम करते-2 वो बहुत थक जाती थी,
लेकिन फिर भी आराम
नही करती थी वो सोचती थी जिस
दिन बेटा लायक हो जाएगा उस दिन आराम करूंगी।।.
देखते-2 समय बीत गया!
माँ बूढी हो गयी और बेटे
को अच्छी नौकरी मिल गयी।
कुछ समय बाद बेटे की शादी कर
दी और एक बच्चा हो गया।
अब बूढी माँ खुश थी कि बेटा लायक
हो गया......
लेकिन ये क्या......
बेटे व बहू के पास माँ से बात करने तक का वक़्त
नही होता था
बस ये फर्क पड़ा था माँ के जीवन में
पहले वह बाहर के लोगो के बर्तन व कपड़े
धोती थी। अब अपने घर में बहू-बेटे
के...
फिरभी खुश थी क्योंकि औलाद
उसकी थी
सर्दियों के मौसम में एक टूटी चारपाई पर, बिल्कुल
बाहर वाले कमरें में एक फटे से कम्बल में सिमटकर
माँ लेटी थी!
और सोच रही थी
आज बेटे को कहूँगी तेरी माँ को बहुत
ठंड लगती है एक नया कम्बल ला दे।।
शाम को बेटा घर आया तो माँ ने बोला...
बेटा मै बहूत बूढी हो गयी हूँ,
शरीर में जान नही है, ठंड सहन
नही होती मुझे नया कम्बल ला दे।।.
तो बेटा गुस्से में बोला, इस महीने घर के राशन में और
बच्चे के एडमिशन में बहुत खर्चा हो गया!
कुछ पैसे है पर तुम्हारी बहू के लिए शॉल लाना है
वो बाहर जाती है। तुम तो घर में
रहती हो सहन कर सकती हो।।
ये सर्दी निकाल लो, अगले साल ला दुंगा।।.
बेटे की बात सुनकर माँ चुपचाप सिमटकर कम्बल में
सो गयी
अगले सुबह देखा तो माँ इस दुनियाँ में
नही रही...
सब रिश्तेदार, पड़ोसी एकत्रित हुए, बेटे ने
माँ की अंतिम यात्रा में कोई
कमी नही छोड़ी थी।
माँ की बहुत
अच्छी अर्थी सजाई थी!
बहुत महंगा शॉल माँ को उढाया था।।
सारी दुनियां अंतिम संस्कार देखकर कह
रही थी।
हमको भी हर जन्म में भगवान
ऐसा ही बेटा मिले!..
मगर उन लोगो को क्या पता था कि मरने के बाद
भी एक
माँ तडफ रही थी।।।.
सिर्फ एक कम्बल के लिए
सिर्फ एक कम्बल के लिए.....
मेरा उद्देस्य इन्सानो के अंदर मर चुकी इंसानियत
को जिंदा करना है ।
अगर मेरी कहानी आपके दिल को छु गयी हो तो अपने
सभी दोस्तो को भेजो । हो सकता है ऐसे बहू
बेटा हमारे दोस्तो मे भी हो। जिनहे इस बात
का एहसास हो

1 लाख श्लोकों वाले महाभारत का सार मात्र 9 पंक्तियों में समझें... 🌺🌹🌸🌺🌹🌸🌹 चाहे आप हिंदू हों या कोई, चाहे आप पुरुष हों या ...
01/12/2023

1 लाख श्लोकों वाले महाभारत का सार मात्र 9 पंक्तियों में समझें...
🌺🌹🌸🌺🌹🌸🌹

चाहे आप हिंदू हों या कोई, चाहे आप पुरुष हों या महिला, चाहे आप गरीब हों या निर्धन, चाहे आप देश में हों या विदेश में, *संक्षेप में कहें तो अगर आप इंसान हैं* तो जो लिखा है उसे पढ़ें और समझें यहां नीचे, महाभारत में पाए गए 9 अनमोल मोतियों को पढ़ें और समझें

🙏1) यदि आप समय रहते अपने बच्चों की गलत जिद और मांगों पर नियंत्रण नहीं रखते हैं, तो जीवन के अंत में आप असहाय होंगे।
*-कौरव*

🙏2) आप कितने भी ताकतवर क्यों न हों, अगर अधर्म का साथ देंगे तो आपका बल, हथियार, बुद्धि, वरदान सब बेकार हो जायेंगे।
*-कर्ण*

🙏3) बच्चों को इतना महत्वाकांक्षी मत बनाओ कि कानून का दुरुपयोग करके सब कुछ नष्ट कर दो।
*- अश्वस्थामा*

🙏4) कभी भी किसी से ऐसा वादा न करें जो आपको अधर्मी के सामने समर्पण करने पर मजबूर कर दे।
*- भीष्मपिता*

5) धन, शक्ति, अधिकार, संख्या का दुरुपयोग और दुष्टों का आचरण, अंततः विनाश की ओर ले जाता है।
*- दुर्योधन*

🙏 6) सत्ता की पतवार किसी अंधे व्यक्ति के हाथ में नहीं देनी चाहिए...अर्थात्...स्वार्थान्ध, वितंघ, मदनान्ध, ज्ञानान्ध, मोहान्ध और कामान्ध व्यक्ति। नहीं तो सर्वनाश हो जायेगा.
*- धृतराष्ट्र*

🙏7) यदि कानून के साथ बुद्धि है तो आप अवश्य विजयी होंगे।
*-अर्जुन*

🙏 8) हर समय - हर चीज़ में छुपे रहने से आप हर जगह, हर चीज़ में, हर समय सफल नहीं हो जायेंगे।
*- शकुनि*

🙏9) यदि आप नीति-धर्म-कर्म सफलतापूर्वक करते हैं... तो दुनिया की कोई भी ताकत, यहां तक ​​कि आपका बाल भी बांका नहीं कर सकती।
*-युधिष्ठिर*

🙏🌹😊🙏🌹😊🙏🌹

👌💐👌💐👌💐👌

*यह लेख सभी के लिए उपयोगी है, इसलिए कृपया इस पोस्ट को बिना किसी बदलाव के साझा करें...*

*सर्वे भवन्तु सुखिनः - सर्वे सन्तु निरामयाः।* 🙏🕉

          जयपुर राजस्थान में वर पक्ष की मांगो से आश्चर्यचकित हुआ वधु परिवार,विवाह पूर्व एक लड़के की अनोखी मांगों से लड़क...
01/12/2023



जयपुर राजस्थान में वर पक्ष की मांगो से आश्चर्यचकित हुआ वधु परिवार,
विवाह पूर्व एक लड़के की अनोखी मांगों से लड़की वाले हैरान हैं
☆लड़के की मांगों की चर्चा पूरे शहर में हो रही है।
☆यह मांगें दहेज को लेकर नहीं बल्कि विवाह संपन्न कराने के तरीके और अनुचित परंपराओं को लेकर हैं !!

मांगें इस प्रकार से हैं::

01 कोई प्री वैडिंग शूट नहीं होगा.

02 🌹 दुल्हन शादी में लहंगे की बजाय साड़ी पहनेगी.

03 🌹 मैरिज लॉन में ऊलजुलूल अश्लील कानफोड़ू संगीत की बजाय, हल्का इंस्ट्रूमेंटल संगीत बजेगा.

04🌹 वरमाला के समय केवल दूल्हा दुल्हन ही स्टेज पर रहेंगे.

05🌹 वरमाला के समय दूल्हे या दुल्हन को.. उठाकर उचकाने वालों को विवाह से निष्कासित कर दिया जायेगा.

06🌹 पंडितजी द्वारा विवाह प्रक्रिया शुरू कर देने के बाद कोई ,उन्हें रोके टोकेगा नहीं.

07🌹 कैमरामैन फेरों आदि के चित्र दूर से लेगा न कि बार बार पंडितजी को टोक कर..!

ये देवताओं का आह्वान करके उनके साक्ष्य में किया जा रहा विवाह समारोह है.. ना की किसी फिल्म की शूटिंग.

08🌹 दूल्हा दुल्हन द्वारा कैमरामैन के कहने पर उल्टे सीधे पोज नहीं बनाये जायेंगे.

09🌹विवाह समारोह दिन में हो और शाम तक विदाई संपन्न हो। जिससे किसी भी मेहमान को रात 12 से 1 बजे खाना खाने से होने वाली समस्या जैसे अनिद्रा, एसिडिटी आदि से परेशान ना होना पड़े।
इसके अतिरिक्त मेहमानों को अपने घर पहुंचने में मध्य रात्रि तक का समय ना लगे और असुविधा ना हो।

10🌹नवविवाहित को सबके सामने.. आलिंगन के लिए कहने वाले को तुरंत विवाह से निष्कासित कर दिया जायेगा.

11. विवाह में किसी प्रकार का मांस मदिरा वर्जित होगा, विवाह में देवी देवताओं का आवाह्न किया जाता है, मांस मदिरा देखकर देवी देवता रूष्ट होकर , दुल्ले दुल्हन को बिना आशीर्वाद दिए चले जाते हैं।

🌹ज्ञात हुआ है लड़की वालों ने लड़के की सभी मांगे सहर्ष मान ली है..!!

समाज सुधार करने के लिए सुंदर सुझाव.! सभी के लिए अनुकरणीय..!!

🙏🏻शादी एक पवित्र बंधन है.. मर्यादाओं मे रहे ..🙏🏻अपनी पुरानी परंपरा ही ठीक है दिखावे से बचे।💐🌹💐

     #शब्दसिंधु *भीष्म कृष्ण संवाद**भीष्म ने कहा , "कुछ पूछूँ केशव .... ?**सम्भवतः धरा छोड़ने के पूर्व मेरे अनेक भ्रम समा...
01/12/2023

#शब्दसिंधु

*भीष्म कृष्ण संवाद*

*भीष्म ने कहा , "कुछ पूछूँ केशव .... ?*
*सम्भवतः धरा छोड़ने के पूर्व मेरे अनेक भ्रम समाप्त हो जाँय " .... !!*

*कृष्ण बोले - कहिये न पितामह ....!*

*एक बात बताओ प्रभु ! तुम तो ईश्वर हो न .... ?*

*कृष्ण ने बीच में ही टोका , "नहीं पितामह ! मैं ईश्वर नहीं ... मैं तो आपका पौत्र हूँ पितामह ... ईश्वर नहीं ...."*

*भीष्म उस घोर पीड़ा में भी ठठा के हँस पड़े .... ! बोले , " अपने जीवन का स्वयं कभी आकलन नहीं कर पाया कृष्ण , सो नहीं जानता कि अच्छा रहा या बुरा , पर अब तो इस धरा से जा रहा हूँ कन्हैया , अब तो ठगना छोड़ दे रे .... !! "*

*कृष्ण जाने क्यों भीष्म के पास सरक आये और उनका हाथ पकड़ कर बोले .... " कहिये पितामह .... !"*

*भीष्म बोले , "एक बात बताओ कन्हैया ! इस युद्ध में जो हुआ वो ठीक था क्या .... ?"*

*"किसकी ओर से पितामह .... ? पांडवों की ओर से .... ?"*

*" कौरवों के कृत्यों पर चर्चा का तो अब कोई अर्थ ही नहीं* *कन्हैया ! पर क्या पांडवों की ओर से जो हुआ वो सही था .... ?* *आचार्य द्रोण का वध , दुर्योधन की जंघा के नीचे प्रहार , दुःशासन की छाती का चीरा जाना , जयद्रथ और द्रोणाचार्य के साथ हुआ छल , निहत्थे कर्ण का वध , सब ठीक था क्या .... ?* *यह सब उचित था क्या .... ?"*

*इसका उत्तर मैं कैसे दे सकता हूँ पितामह .... !*
*इसका उत्तर तो उन्हें देना चाहिए जिन्होंने यह किया ..... !!*
*उत्तर दें दुर्योधन, दुःशाशन का वध करने वाले भीम , उत्तर दें कर्ण और जयद्रथ का वध करने वाले अर्जुन .... !!*

*मैं तो इस युद्ध में कहीं था ही नहीं पितामह .... !!*

*"अभी भी छलना नहीं छोड़ोगे कृष्ण .... ?*
*अरे विश्व भले कहता रहे कि महाभारत को अर्जुन और भीम ने जीता है , पर मैं जानता हूँ कन्हैया कि यह तुम्हारी और केवल तुम्हारी विजय है .... !*
*मैं तो उत्तर तुम्ही से पूछूंगा कृष्ण .... !"*

*"तो सुनिए पितामह .... !*
*कुछ बुरा नहीं हुआ , कुछ अनैतिक नहीं हुआ .... !*
*वही हुआ जो हो होना चाहिए .... !"*

*"यह तुम कह रहे हो केशव .... ?*
*मर्यादा पुरुषोत्तम राम का अवतार कृष्ण कह रहा है..? यह छल तो किसी युग में हमारे सनातन संस्कारों का अंग नहीं रहा,फिर यह उचित कैसे गया..? "*

*"इतिहास से शिक्षा ली जाती है पितामह,पर निर्णय वर्तमान की परिस्थितियों के आधार पर लेना पड़ता है..!*

*हर युग अपने तर्कों और अपनी आवश्यकता के आधार पर अपना नायक चुनता है..!!*
*राम त्रेता युग के नायक थे , मेरे भाग में द्वापर आया था..!*
*हम दोनों का निर्णय एक सा नहीं हो सकता पितामह..!!"*

*" नहीं समझ पाया कृष्ण ! तनिक समझाओ तो..!"*

*" राम और कृष्ण की परिस्थितियों में बहुत अंतर है पितामह..!*
*राम के युग में खलनायक भी 'रावण'जैसा शिवभक्त होता था..!!*
*तब रावण जैसी नकारात्मक शक्ति के परिवार में भी विभीषण,मंदोदरी,माल्यावान जैसे सन्त हुआ करते थे..!* *तब बाली जैसे खलनायक के परिवार में भी तारा जैसी विदुषी स्त्रियाँ और* *अंगद जैसे सज्जन पुत्र होते थे..!* *उस युग में खलनायक भी धर्म का ज्ञान रखता था..!!*
*इसलिए राम ने उनके साथ कहीं छल नहीं किया..!किंतु मेरे युग के भाग में में कंस,* *जरासन्ध,दुर्योधन,दुःशासन,शकुनी,जयद्रथ जैसे घोर पापी आये हैं..!! उनकी समाप्ति के लिए हर छल उचित है* *पितामह..! पाप का अंत* *आवश्यक है पितामह,वह चाहे जिस विधि से हो..!!"*

*"तो क्या तुम्हारे इन निर्णयों से गलत परम्पराएं नहीं प्रारम्भ होंगी केशव..?*
*क्या भविष्य तुम्हारे इन छलों का अनुशरण नहीं करेगा..?*
*और यदि करेगा तो क्या यह उचित होगा..??"*

*" भविष्य तो इससे भी अधिक नकारात्मक आ रहा है पितामह..!*

*कलियुग में तो इतने से भी काम नहीं चलेगा..!*

*वहाँ मनुष्य को कृष्ण से भी अधिक कठोर होना होगा..नहीं तो धर्म समाप्त हो जाएगा..!*

*जब क्रूर और अनैतिक शक्तियाँ सत्य एवं धर्म का समूल नाश करने के लिए आक्रमण कर रही हों,तो नैतिकता अर्थहीन हो जाती है पितामह..!*
*तब महत्वपूर्ण होती है धर्म की विजय,केवल धर्म की विजय..!*

*भविष्य को यह सीखना ही होगा पितामह..!!"*

*"क्या धर्म का भी नाश हो सकता है केशव..?*
*और यदि धर्म का नाश होना ही है,तो क्या मनुष्य इसे रोक सकता है..?"*

*"सबकुछ ईश्वर के भरोसे छोड़ कर बैठना मूर्खता होती है पितामह..!*

*ईश्वर स्वयं कुछ नहीं करता..!केवल मार्ग दर्शन करता है*
*सब मनुष्य को ही स्वयं करना पड़ता है..!*
*आप मुझे भी ईश्वर कहते हैं न..!*
*तो बताइए न पितामह,मैंने स्वयं इस युद्घ में कुछ किया क्या..?*
*सब पांडवों को ही करना पड़ा न..?*
*यही प्रकृति का संविधान है..!*
*युद्ध के प्रथम दिन यही तो कहा था मैंने अर्जुन से..!यही परम सत्य है..!!"*

*भीष्म अब सन्तुष्ट लग रहे थे..उनकी आँखें धीरे-धीरे बन्द होने लगीं थी..!*
*उन्होंने कहा - चलो कृष्ण ! यह इस धरा पर अंतिम रात्रि है..कल सम्भवतः चले जाना हो..अपने इस अभागे भक्त पर कृपा करना कृष्ण..!"*

*कृष्ण ने मन मे ही कुछ कहा और भीष्म को प्रणाम कर लौट चले,पर युद्धभूमि के उस डरावने अंधकार में भविष्य को जीवन का सबसे बड़ा सूत्र मिल चुका था..!*

*जब अनैतिक और क्रूर शक्तियाँ सत्य और धर्म का विनाश करने के लिए आक्रमण कर रही हों,तो नैतिकता का पाठ आत्मघाती होता है..!!*
*धर्मों रक्षति रक्षितः*🚩
*🙏🏼🙏🏽🙏🏾जय श्री कृष्ण 🙏🏿🙏🙏🏻*

था मैं नींद में और मुझे सजाया जा रहा था...बड़े प्यार से मुझे नहीं नहलाया जा रहा था,ना जाने था वो कौन सा अजब खेल मेरे घर ...
29/11/2023

था मैं नींद में और मुझे सजाया जा रहा था...
बड़े प्यार से मुझे नहीं नहलाया जा रहा था,

ना जाने था वो कौन सा अजब खेल मेरे घर में...
बच्चों की तरह मुझे कंधों पर उठाया जा रहा था,

था पास मेरा हर सपना उस वक्त...
फिर भी मैं हर किसी के मन से भुलाया जा रहा था,

जो कभी देखते भी ना थे मोहब्बत की निगाहों से...
उनके दिल से भी प्यार मुझ पर लुटाया जा रहा था,

मालूम नहीं क्यों हैरान था हर कोई मुझे सोते देखकर...
जोर-जोर से रो कर मुझे जगाया जा रहा था,

कांप उठी मेरी रूह वह मंजर देखकर...
जहां मुझे हमेशा के लिए सुलाया जा रहा था,

मोहब्बत की इंतहा थी जिन दिलों में मेरे लिए...
उन्हीं दिलों के हाथों आज मैं जलाया जा रहा था,
-------------------------
इस दुनिया में कोई किसी का हमदर्द नहीं होता...
लाश को शमशान में रखकर अपने लोग ही पूछते हैं,
"और कितना वक्त लगेगा"
😥😥😥😥🙏
#अंतिमयात्रा

    *_─⊱━━━━━⊱(🙏)⊰━━━━⊰─मधुररात्री*     *एक बार नारद जी द्वारिका गये तो उन्होंने श्रीकृष्ण से कहा कि महाराज! आप गोपियों ...
28/11/2023


*_─⊱━━━━━⊱(🙏)⊰━━━━⊰─मधुररात्री* *एक बार नारद जी द्वारिका गये तो उन्होंने श्रीकृष्ण से कहा कि महाराज! आप गोपियों की बड़ी तारीफ करते हैं तो ये आपकी आदत ठीक नहीं है। क्यों? क्या बात है भई, हमारी आदत को तुम अलेन्ज कर रहे हो। क्या बात है? आज कुछ बन्दर-वन्दर का मुह चाहिये क्या? हाँ-हाँ, मतलब कुछ ऐसी स्कीम बना कर आये हो तो वैसा ही हम खेल खेलें फिर। अरे! भगवान् में गलती निकालना, ये किसकी हिम्मत है? नहीं-नहीं महाराज! मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं, मैं होश में हूँ, बेहोश नहीं हूँ, मैं ये कह रहा हूँ कि आप जो बार-गोपियों की प्रशंसा करते हैं तो रुक्मिणी, सत्यभामा वगैरह को बुरा लगता है क्योंकि ये तो कोई मानने को तैयार नहीं हो सकता कि रुक्मिणी से अधिक सुन्दर और कोई गोपी होगी। महालक्ष्मी की अवतार हैं, सभी कलाओं में परिपूर्ण हैं, खाली चमड़े की बात नहीं है। एक गुण किसी में होता है संसार में, किसी में दो गुण होता है. और एक ही में सब गुण हों, ऐसा विश्व में कोई भी नहीं हो सकता, लेकिन रुक्मिणी हैं ऐसी। तो महाराज! आप ये सब अपने मन में कुछ रखिये वो सब अलग बात है, उसमें हम दखल नहीं देते, आपका प्राइवेट मामला है सब लेकिन रुक्मिणी वगैरह के सामने जब आप गोपियों की प्रशंसा करते हैं तो उनको फीलिंग होती है। तो क्यों प्रशंसा करते हैं आप उनकी, क्या बात है? आज बताइये आप। क्यों माता जी! रुक्मिणी से कहते हैं नारद जी, मैं ठीक कह रहा हूँ न? हाँ-हाँ, बिल्कुल। नारद जी! आज इसका फैसला होना चाहिये। लिफ्ट मिल गई। अब क्या है? नारद जी एक बीच में और नारद जी ऐसे हैं कि श्रीकृष्ण के भक्त भी हैं और श्रद्धेय भी हैं। वो ब्रह्मा के पुत्र हैं, ब्राह्मण हैं, महर्षि हैं, देवर्षि हैं, श्रीकृष्ण उनके चरणों में सिर रखते हैं तो ऐसे का अवलम्ब मिल गया तो स्त्रियों ने कहा, बिल्कुल-बिल्कुल, आज इसका उत्तर दें, श्रीकृष्ण।*

*श्रीकृष्ण ने कहा- देखो नारद जी ! ये सब फालतू बकवास न करो, मेरे सिर में बहुत दर्द हो रहा है, फटा जा रहा है सिर। पहले मेरा इलाज करो, सोचो उसके लिये कुछ। ये फालतू बातें- उसका प्रेम, उसका प्रेम, ये सब प्रेम-व्रेम तब सुहाता है जब शरीर ठीक रहे और सिर में इतना दर्द हो रहा है और तुम प्रेम की बात ले के बैठ गये। हां, कोई आदमी चार दिन का भूखा हो और फिर अचानक उसकी माँ, बाप, बहिन, कोई आ जाय, हमसे प्यार करो। अरे भाग। प्यार वाली, बड़ी आई है, हमारे तो पेट में चूहे दौड़ रहे हैं- इसको प्यार करो। तो घबड़ा गईं स्त्रियाँ सब और कराहने लगे, पूरी एक्टिंग। अरे! वो तो एक्टरों के डायरेक्टर हैं, उनको क्या मेहनत है? एक्टिंग करने में। ऐसी एक्टिंग किया कि सब घबड़ा गईं रानियाँ, जैसे प्राण जा रहे हैं उनके। नारद जी ने कहा- भई! कुछ मामला है प्राइवेट। अब अपन सँभल जायें। एक बार बन्दर बन चुके हैं न! तो उन्होंने कहा- महाराज! ये आपके सिर में बहुत दर्द है, इसकी दवा भी आप ही बता दीजिये। आप ही दवा बता दीजिये, क्या दवा है? कहाँ मिलेगी? कैसे मिलेगी? उन्होंने कहा- दवा तो नारद जी बड़ी सरल है। ऐसा है कि मेरा कोई भक्त हो, मुझसे प्यार करने वाला हो कोई। ऐसा भक्त अगर अपनी चरणधूलि दे दे और मैं सिर में लगा लूं तो मैं ठीक हो सकता हूँ। अब वो क्वेश्चन तो धरा रह गया, गोपियों के प्यार का । अब ये नया प्रश्न आ गया, इलाज वाला। नारद जी ने सुन तो लिया, लेकिन सोचना प्रारम्भ किया, ऐसा भक्त तो मैं भी हूँ। अरे! किसी भक्त की चरणधूलि माँग रहे हैं लेकिन मैं झगड़े में नहीं पड़ता इनके। हाँ, ये माताएँ जो हैं सोलह हजार एक सौ आठ रानियाँ, ये सब महापुरुषों की दादी ही तो हैं- और कौन बनेगा इनकी स्त्री ? तो इनसे कह देते हैं अभी और इनके तो खास पति हैं। अरे पति के लिये तो स्त्री आत्मा तक का बलिदान कर देती है।*

*तो तुरन्त रुक्मिणी वगैरह के सामने गये और कहा कि माताओं ! ऐसा है कि वो कह रहे हैं कि चरणधूलि कोई भक्त दे दे, तो आप लोग दे दीजिये, बस अभी ठीक हो जायें। तो रुक्मिणी ने कहा कि तुम नॉर्मल तो हो। एक स्त्री अपने पति को चरणधूलि दे, अरे नरक-वरक तो बाद में मिलेगा, लेकिन हिस्ट्री में बदनाम हो जाय सो अलग। अगर कोई छोटा-मोटा आदमी कोई गलत काम करे तो बात मोहल्ले में रह जाती है और बड़ा आदमी वही गलत काम करे तो फिर मोटे मोटे अक्षरों में अखबारों में निकलता है यानी जब महालक्ष्मी और भगवान् का मामला है तो ये तो अनन्त काल को इतिहास में अमर हो जायेगा कि श्रीकृष्ण की ऐसी स्त्रियाँ थीं कि अपनी चरणधूलि दिया। नारद जी ने सोचा और सोच कर कहा हाँ, बात तो ये ठीक कहती हैं। अच्छा, इनको छोड़ो और जो महात्मा हैं, उनके पास जाते हैं। जहाँ-जहाँ वो समझे महात्मा, सब जगह गये। सबने मना कर दिया- तुम्हारा दिमाग़ खराब है? अरे! श्यामसुन्दर के चरण की धूलि हम लोग चाहते हैं कि हम अपनी चरणधूलि उनको देंगे और वह भी होश में! तो फिर लौट आये नारद जी। उन्होंने कहा कि महाराज! आप यह भी बता दीजिये- वो कौनसा भक्त कहाँ रहता है जिसके चरण की धूलि से आप अच्छे होंगे? तो श्रीकृष्ण ने कहा वो, उधर एक है न, यू. पी. में एक मथुरा, वृन्दावन वगैरह, ब्रज है? हाँ-हाँ, मालूम है, त्रैलोक्य में कौनसी जगह है जो मुझे नहीं मालूम, तो तो वहाँ गोपियाँ रहती हैं। नारद जी ने कहा- फिर गोपियों का नाम लिया। देखो, यहीं से तो बात चली थी कि गोपियों की प्रशंसा न करो, इससे रानियों को कष्ट होता है। ये फिर गोपियों को ले आये बीच में। खैर, अपन को क्या पड़ा है, चलते हैं। गये गोपियों के पास और उनसे कहा- माताओं! श्यामसुन्दर ने भेजा है मुझे । उनको बड़ा शारीरिक कष्ट है, इस समय। क्या है? सारी गोपियों की हालत सीरियस एक वाक्य सुन के। नहीं-नहीं घबराओ मत, घबराओ मत, ऐसा है कि उनके सिर में बहुत दर्द है। वो कहते हैं कोई भक्त चरणधूलि हमको दे दे तो मैं ठीक हो जाऊं। सबने पैर फैला दिये, ले जाओ। अरे। थोड़ी नहीं क्विंटल के क्विंटल ले जाओ। यहां तो करोड़ों गोपियां हैं। हाँ, नारद जी ने कहा- ये तुम लोग जो कुछ करने जा रही हो, सोचा है इसका क्या फल होगा? देखिये नारद जी! ये फल-बल बाद में बताना, पहले ले जाओ। जल्दी करो। श्यामसुन्दर को कष्ट है और तुम फल- बल की बात करने आये हो? इसका फल क्या होगा, क्या होगा, जो होगा, होता रहेगा। अरे! नरक मिलेगा यही फल होगा न। तो कौन नई बात है। अनन्त जन्म, अनन्त बार नरक भोग चुके हैं, एक बार और सही। हमारे प्रियतम को सुख तो मिल जाये। कौन नया है हमारे लिये नरक? कौनसा जीव ऐसा है जो अनन्त बार नरक नहीं गया, अनन्त बार स्वर्ग नहीं गया? तो क्या है, वो तो अभ्यास पड़ जाता है वैसे ही। जो गन्दगी का कीड़ा होता है उसको गन्दगी की बदबू में खुश्बू आती है, उसी के अनुकूल हो जाता है। दूसरे को विचित्र बात लगती है, अरे! ये कैसे जिन्दा है, इतनी गन्दी हवा में, गन्दी बदबू में। वो कहता है- बदबू तुम्हारी खोपड़ी में है, हमको तो खुशबू आ रही है। किसी पाखाने के कीड़े से पूछ लो, वो बता देगा।*

*यही प्रश्न परीक्षित ने एक बार शुकदेव से किया था तो शुकदेव जंगल में गये, लैट्रीन के लिये, उनके पीछे-पीछे परीक्षित भी थे। शुकदेव परमहंस तीन-चार फूल ले गये थे, खुशबूदार। एक जगह सूखा लैट्रीन पड़ा हुआ था, उसमें कीड़े उस लैट्रीन को इकट्ठा करके, गोला बना-बना के उसी के चारों ओर घूम रहे थे तो शुकदेव परमहंस ने कहा- परीक्षित ! वो देख रहे हो, कीड़े क्या कर रहे हैं? उन्होंने कहा- हाँ, देख रहे हैं महाराज ! पन्द्रह-बीस फुट पर फूल रख दिये और परीक्षित से कहा- देखो ! वो लकड़ी से वो पाखाने का जो गोला बना हुआ है न सूखा-सूखा, जिसमें कीड़ा लिपटा हुआ है, उसको पकड़ के इस फूल में डाल दो, खाली कीड़े को। उन्होंने कीड़े को बड़ी मुश्किल से पकड़ा- अपनी लकड़ी से और पकड़ के उसको फूल में डाल दिया। अब परीक्षित कह रहे हैं, ये क्यों करवा रहे हैं हमसे ऐसा, गुरु जी ! ये अजीब काम, इतना गन्दा काम, बिना वज़ह। तो कुछ देर खड़े रहे शुकदेव परमहंस, मुस्कराते हुये। वो कीड़ा जो है, फूल के अन्दर जब डाला तो तुरन्त एबाउट टर्न, क्विक मार्च, सीधे वहीं पहुँच गया। शुकदेव परमहंस ने कहा- परीक्षित! देखा! तुम कहते हो- दुनिया वाले सन्तों के बताने पर भी, भगवान् के अवतार लेने पर भी, ये ईश्वर से प्रेम नहीं करते, संसार में ही मर रहे हैं। क्यों ऐसा कर रहे हैं, इतना दु:ख भोग रहे हैं? तो देखो! ये कारण है। इनकी प्रियता इसी में है।*

*तो गोपियाँ कहती हैं- ये सब नरक-फरक की बातें हमको न सुनाओ। जल्दी से ले जाओ तुम, हमारे प्राणवल्लभ को ठीक करो। नारद जी ने कहा पहले मैं ही लगा लूँ अपने, बाद में उनको ठीक करूँगा। ऐसे अद्भुत भक्त हैं जिनका प्रियतम के सुख का ही लक्ष्य है। न लोक की परवाह, न वेद की, न नरक की। इसलिए कहा है- इन गोपियों के लिये कि श्रुतिभिर्विमृग्याम्- वेद की ऋचायें जहाँ नहीं पहुँच सकीं, वहाँ ये खड़ी हैं गोपियाँ। जो आर्य धर्म है यानी संसार की माँ, बाप, बेटा, बहू, सास, ससुर, सब समाज, देश, इसकी परवाह भी न करें-*

*या दुस्त्यजं स्वजनमार्यपथं च हित्वा।*
*भेजुर्मुकुन्दपदवीं श्रुतिभिर्विमृग्याम्॥*
(भाग. १-४७-६१)

*तो श्यामसुन्दर के सुख के लिये ही जिनका लक्ष्य है, ऐसी गोपियाँ- ये निष्काम हैं लेकिन क्या इनको माहात्म्य ज्ञान है? है, इनको माहात्म्य ज्ञान है और जो सकाम भाव से गई थीं, उनको माहात्म्य ज्ञान नहीं है।*

*तद्विहीनं जाराणामिव।*

*जो कहा, जिसके लिये सूत्र बनाया, यानी कुछ गोपियाँ सकाम हैं, कुछ निष्काम हैं तो जो गोपियाँ निष्काम हैं वो तो भगवान् को जानती हैं और जो सकाम हैं वो श्रीकृष्ण को भगवान् नहीं जानतीं। जब नहीं जानतीं तो उनका प्रेम स्थिर कैसे रहा? ये प्रश्न है- क्योंकि माहात्म्य ज्ञान के बिना वाला प्रेम स्थिर नहीं रह सकता उसका आधार गलत है। उलटा व्यवहार कर दिया प्रियतम ने, प्रेम खत्म हो गया। आज डॉट दिया, प्रेम खत्म हो गया। हम जिस चीज़ से प्यार किये उसके, उस चीज़ में जरा भी कमी आई, गड़बड़ी हुई या वो चीज़ मिट गई, हमारा प्यार भी मिट जायेगा क्योंकि हमारा आधार ही गलत है। इसका समाधान कल होगा।*

*॥बोलिये वृन्दावन बिहारी लाल की जय॥*
*जय श्री कृष्ण*🌷🙏
*_─⊱━━━━⊱(शुभ)⊰━━━━━⊰─_मधुररात्री*

28/11/2023

मेरे जीवन में दो ही शौक है...
चाय गर्म होनी चाहिए, और कांग्रेस खत्म होनी चाहिए,,
😂😂😂

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