25/07/2024
कलेजा सम्हाल कर पढ़ना इस पोस्ट को, हो सकता है कि यह सब के मन की पोस्ट न हो, हो सकता है जो मांसाहारी है वो इस पोस्ट का तगड़े से विरोध दर्ज करें, हो सकता है स्त्रियां भी विरोध करे, क्योंकि मांसाहारी वो भी तो है |
दिल पर हाथ रखके बताना कि हमारे बच्चों को अगर कोई भोजन की तरह खाए तो हमें कैसा लगेगा ?
सोचने के बाद ही आगे ये पोस्ट पढ़ने की हिम्मत करना और हिम्मत आ जाये तो पढ़ने के बाद एक शेयर भी कर देना,
अपनी मृत्यु और अपनों की मृत्यु डरावनी लगती है, और बाकी की मौत में इंसान enjoy करता है | सच कहूँ तो मौत के स्वाद का चटखारे ले रहा आज का इंसान,..
बकरे का, गाय का,भेंस का, ऊँट का, सुअर, हिरण का, तीतर का, मुर्गे का, हलाल का, बिना हलाल का, ताजा बकरे का, भुना हुआ, छोटी मछली, बड़ी मछली,
हल्की आंच पर सिका हुआ,
न जाने कितने बल्कि अनगिनत स्वाद हैं मौत के |
स्वाद से कारोबार बन गई मौत,
मुर्गी पालन, मछली पालन, बकरी पालन, पोल्ट्री फार्म्स
नाम "पालन" और मक़सद "हत्या"❗
गली गली में खुले नान वेज रेस्टॉरेंट, मौत का कारोबार नहीं तो और क्या हैं ? मौत से प्यार और उसका कारोबार इसलिए क्योंकि मौत हमारी नही है,
जो हमारी तरह बोल नही सकते,
अभिव्यक्त नही कर सकते,
अपनी सुरक्षा स्वयं करने में समर्थ नहीं हैं,
उनकी असहायता को हमने अपना बल कैसे मान लिया ?
कैसे मान लिया कि उनमें भावनाएं नहीं होतीं ?
या उनकी आहें नहीं निकलतीं ?
डाइनिंग टेबल पर हड्डियां नोचते बाप बच्चों को सीख देते है, बेटा कभी किसी का दिल नही दुखाना !
किसी की आहें मत लेना !
किसी की आंख में तुम्हारी वजह से आंसू नहीं आना चाहिए !
बच्चों में झुठे संस्कार डालते बाप को, अपने हाथ मे वो हडडी दिखाई नही देती, जो इससे पहले एक शरीर थी, जिसके अंदर इससे पहले एक आत्मा थी,
उसकी भी एक मां थी ...??
जिसे काटा गया होगा ?
जो कराहा होगा ?
जो तड़पा होगा ?
जिसकी आहें निकली होंगी ?
जिसने बद्दुआ भी दी होगी ?
कैसे मान लिया कि जब जब धरती पर अत्याचार बढ़ेंगे तो भगवान सिर्फ तुम इंसानों की रक्षा के लिए अवतार लेंगे ..❓
क्या मूक_जानवर उस परमपिता परमेश्वर की संतान नहीं हैं .❓
क्या उस ईश्वर को उनकी रक्षा की चिंता नहीं है ..❓
धर्म की आड़ में उस परमपिता के नाम पर अपने स्वाद के लिए कभी बकरे काटते हो, कभी बकरे की बली चढ़ाते हो,
कहीं तुम अपने स्वाद के लिए मछली का भोग लगाते हो।,
कभी सोचा ...??
क्या ईश्वर का स्वाद होता है ?
क्या है उनका भोजन ?
किसे ठग रहे हो ?
भगवान को ?
वाहेगुरु को ?
मंगलवार को नानवेज नही खाता ...!
आज शनिवार है इसलिए नहीं ...!
नवरात्रि में तो सवाल ही नही उठता ....!
झूठ पर झूठ...
झूठ पर झूठ
झूठ पर झूठ ..
ज़रा सोचना, हमारे बच्चों को अगर कोई ऐसे खाए तो हमें कैसा लगेगा ??
कर्म का फल मिलता जरूर है, ये याद रखना,
ईश्वर ने बुद्धि सिर्फ तुम्हे दी !
ताकि तमाम योनियों में भटकने के बाद मानव योनि में तुम जन्म मृत्यु के चक्र से निकलने का रास्ता ढूँढ सको !
लेकिन तुमने इस मानव योनि को पाते ही स्वयं को भगवान समझ लिया !
बस यही कहूँगा कि, प्रकृति के साथ रहिये और प्रकृति के होकर रहिये | जब कभी जीव जंतुओं को भोजन के रूप में खाने का विचार आये तो उसी समय अपने बच्चे को याद करियेगा | शायद आपकी आत्मा कराह दे और आप इंसान बन जाएं | हम इंसान का जन्म हुआ था सबकी रक्षा करने के लिए, लेकिन हम उन्हें ही भोजन बना गए |
वाह रे इंसान,
लौट आ प्रकृति के साथ,
लौट आ !
🙏🙏🙏 सबसे बड़ा धर्म इंसानियत है 🙏🙏🙏