20/12/2025
बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह सिर्फ़ एक देश या एक समुदाय की कहानी नहीं है, यह पूरी मानवता पर लगा एक गहरा धब्बा है। वहाँ हिंदुओं को निशाना बनाकर मारा जा रहा है, घरों में आग लगाई जा रही है, लोगों को ज़िंदा जलाया जा रहा है, मंदिर तोड़े जा रहे हैं और परिवारों को पलायन के लिए मजबूर किया जा रहा है। बच्चों की चीखें, महिलाओं का डर और बुज़ुर्गों की बेबसी — यह सब किसी खबर की सुर्ख़ी बनकर कुछ देर में गायब हो जाता है, लेकिन जिन पर बीतती है उनके ज़ख़्म ज़िंदगी भर नहीं भरते।
सबसे ज़्यादा दर्द तब होता है जब हम देखते हैं कि जो लोग कल तक ग़ाज़ा के नाम पर भारत में मोमबत्तियाँ जलाते थे, सोशल मीडिया पर आँसू बहाते थे और इंसानियत का पाठ पढ़ाते थे, वही लोग आज बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर खामोश हैं। क्या इंसानियत का कोई मज़हब होता है? क्या न्याय सिर्फ़ चुनिंदा लोगों के लिए होता है? अगर एक मासूम की मौत पर शोर मचाया जाता है और दूसरी मौत पर चुप्पी साध ली जाती है, तो यह दोहरा चरित्र नहीं तो और क्या है?
आज सवाल सिर्फ़ बांग्लादेश के हिंदुओं का नहीं है, सवाल उस सोच का है जो हिंसा को तब तक अनदेखा करती है जब तक पीड़ित उसकी पसंद का न हो। अगर आज हम नहीं बोले, अगर आज हमने सच के साथ खड़े होने की हिम्मत नहीं दिखाई, तो आने वाला कल और ज़्यादा डरावना होगा। इतिहास गवाह है — चुप्पी ने हमेशा ज़ालिमों को मज़बूत किया है और बेगुनाहों को कमज़ोर।
अब समय आ गया है कि हम धर्म से ऊपर उठकर अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ, लेकिन साथ ही यह भी साफ़ कहें कि हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को नज़रअंदाज़ करना बंद हो। यह राजनीति का मुद्दा नहीं, यह इंसानियत का सवाल है। क्योंकि जब किसी को उसके धर्म के कारण ज़िंदा जलाया जाए और दुनिया चुप रहे, तो वह चुप्पी भी अपराध बन जाती है।
Save Hindu — आज आवाज़ उठाओ, क्योंकि कल बहुत देर हो सकती है।