15/09/2024
ख़ुशी, ग़म, दर्द जैसे शब्द हमारी ज़िंदगी में इस तरह रचे-बसे हुए हैं कि गाहे-बगाहे इनसे भेंट होती रहती है। शायर जब अपने दर्द को इकट्ठा करता है और उसे अपने अल्फ़ाज़ों से सजाता है, फिर जो शेर बनते हैं वो दर्द का इलाज भले ही ना कर पाएं लेकिन कुछ देर