17/04/2023
कबीर दास जी का एक पंक्ति (दोहा) है
बकरी पाति खात है ताकि खाड़ी खाल
जो नर बकरी खात है तिनका का हवाल
अर्थात् - बकरी ने तो बस पत्ते ही खायया था जिसका खाल खींच लिया गया, और जो लोग बकरी खा रहे है उनका क्या हाल होने वाला है ये सिर्फ ईश्वर जानते है।
शायद नर्क में ले जाया जायेगा जहां खौलते हुए तेल का बहुत बड़ा कड़ाही होगे फिर उन्हें गर्म तेल मे फराई किया जायेगा।
आप कितने भी चीखो और चिल्लाओगे कोई सुनने वाला नहीं होगा। बिल्कुल उसी तरह जिस तरह उन बकरियों की चीखे आपको सुनाई नहीं दिया ।
उन बकरियो को थोड़ा महसूस कर के देखीये जब उसे ये पता चलता है कि अब ये लोग हमे काटने वाले है वो अपने आप को बचाने का बहुत प्रयत्न करते है
भागने का,
चिल्लाने का,
छटपटाने का,
जब हर प्रयत्न निष्फल हो जाती है
फिर उनके आखों में आसूं बहने लगती है
जो उसकी अंतरात्मा ये चीख-चीख कर कहती है
कि हे मानव हमें छोड़ दो, हमे भी औरों की भांति जीने दो,
हमने तेरा बिगाडा़ ही क्या है
जो मुझे मृत्यु डंड दे रहे हो ।
और हमारे पास उसका कोई जबाब नहीं होता,
मनुष्य सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए क्या कुछ नहीं करते है।