15/02/2016
राजीव भाई की प्रेरणा से गाँव से शहर और शहर से गाँव को समृद्ध बनाने का एक अभियान का शुभारम्भ
दिल्ली के 100 परिवार इस अभियान के लिए चाहिए
राजीव भाई की प्रेरणा और आशीर्वाद से आयुर्वेदाचार्य भाई सुनील यादव के सहयोग से हमने "ऋषिवन आरोग्य न्यास (ट्रस्ट)" की स्थापना की है
ट्रस्ट द्वारा ग्राम पंचायत के सहयोग से कल 14 फ़रवरी 2016 को गाँव में आयोजित इस कार्यक्रम की जानकारी आज केअखबार में भी है
जिसका उद्देश्य है
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गाय हमारी माँ है और माँ का स्थान वृद्धाश्रम (गोशाला) में नहीं, घर में है
उसे हमारा दान नहीं, ध्यान चाहिए
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और बड़ी बड़ी बाते और योजनायें निर्धारित करने के स्थान पर हमने गाँव में जाकर इस पर ज़मीनी स्तर पर कार्य प्रारंभ कर दिया है
हमें कुछ सहयोगियों की आवश्यकता होगी जो अपनी छुट्टी के दिन हमारे साथ गाँव में जाकर सप्ताह में एक दिन देकर सभी विषम परिस्थितियों में कार्य करने के इच्छुक हो
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इस विचार की जानकारी इस प्रशनावली से समझाने का प्रयत्न कर रहे है:
प्रश्न: इस विचार का जन्म क्यों हुआ?
उत्तर:
राजीव दीक्षित जी से प्रेरित होकर इस योजना का निर्धारण किया गया है
"गाँव है तो शहर है" इस कथन को सार्थक करने का एक प्रयत्न गन्नौर, सोनीपत के नयाबांस गाँव की सरपंच अनीताजी और पूर्व सरपंच दिलबाग सिंह जी के सहयोग सेे करने का निश्चय किया है परन्तु यह तभी संभव है जब कोई भी गाँव स्वस्थ और समृद्ध है
इसके अंतर्गत देशी गोवंश से बीमारी और गरीबी दोनों दूर करने का कार्य प्रारंभ किया है जिसकी एक सरल रूपरेखा बनायीं है
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प्रश्न: बीमारी और गरीबी दूर कैसे होगी?
उत्तर:
विश्व की कोई समस्या ऐसी नहीं जिसका हल गोवंश से नहीं हो सकता
इसी विचार के अंतर्गत कुछ चरणों में यह कार्य होगा
1) प्रथम चरण:
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पंचगव्य एवं आयुर्वेद गाँव को निरोगी और व्यसन मुक्त बनाना
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यदि गाँव के लोग ही बीमारियों और व्यसनों में उलझे रहेंगे तो यह कार्य संभव नहीं
छोटे छोटे स्वास्थय जाग्रति अभियान के साथ प्रयत्न होगा की इस अभियान के अंतर्गत हर घर में एक देसी गाय बाँधी जाए और जिस घर में गोमाता है वहां बीमारी का क्या काम?
> यह गोवंश की उपस्थिति ही कई रोगों को उस घर से दूर करेगी और
गोमय, गोमूत्र, घी, मक्खन, छाछ, दूध आदि के सेवन से बचे हुए रोग भी समाप्त होंगे
> फिर राजीव दीक्षित जी के द्वारा बताये गए वाग्भट्ट जी के नियमो से चिकित्सा होगी
2) दूसरा चरण:
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पंचगव्य उत्पादों के निर्माण का प्रशिक्षण
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पूर्णतया रसायन मुक्त साबुन, गोमूत्र अर्क, शैम्पू, मच्छर नाशक, उबटन, औषधि, आदि एवं गोबर गोमूत्र की खाद से प्राकृतिक विषमुक्त सब्जियां उगाने का प्रक्षिक्षण दिया जायेगा
गाँव में हो रही खेती को विषमुक्त करने का प्रयास होगा और खेती की उपज को सीधे मंडी में बेचने के स्थान पर
सरसों से तेल, विभिन्न अनाजो से आटा, गन्ने से गुड, खांड, बूरा आदि, बनवा कर शुद्ध स्वरुप में इन निर्धारित परिवारों
इन गोवंश के उत्पादों की मदद से हर घर के लिए सम्मानजनक जीविका की व्यवस्था हो जाएगी
इन प्राकृतिक उत्पादों के लिए दिल्ली के 100 परिवार अपना पंजीकरण करवाएंगे (पंजीकरण हेतु फॉर्म जल्दी ही उपलब्ध करवाया जायेगा)
और यह गाँव गोमाता की मदद से शहर के 100 परिवारों को बीमारी से मुक्त करेगा
और वह 100 परिवार उस गाँव को गरीबी से मुक्त करेंगे
उत्पादों की गुणवत्ता हमारे न्यास द्वारा नियुक्त गोभक्त निर्धारित करेंगे
फिर इसी प्रकल्प को एक नए गाँव में लागू किया जायेगा और अन्य 100 परिवार उस गाँव के लिए निर्धारित होंगे
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प्रश्न: 10 वर्ष बाद इस प्रयास का प्रभाव क्या होगा?
इस प्रयास का प्रभाव दूरगामी होगा
क्योंकि गाँव का पढ़ा लिखा शहर के लिए और शहर का पढ़ा लिखा विदेश के लिए तैयार होगा तो गाँव तो बर्बाद हो जायेंगे
गाँव का और देश का विकास केवल धन से नहीं अपितु गोधन से होगा
आज गाँव में केवल WIFI, TV, अंग्रेजी स्कूल आदि सुविधाओ से उसकी उन्नति का निर्धारण हो रहा है जो सही नहीं है
इनके सुविधाओ के साथ साथ स्वस्थ रहकर पढ़ लिखकर गाँव के बच्चे गाँव में कार्य करें, खेती की और बढे, वैज्ञानिक शोध करें और संस्कारो को सुरक्षित करें तो गाँव का विकास नहीं नहीं तो विनाश है
हम गाँव के बच्चो को आज की वैज्ञानिक भाषा में अपनी देश की प्राचीन धरोहर से अवगत करवा कर उनमे गाँव के प्रति सम्मान की दृष्टि उत्पन्न करेंगे
जब बच्चे गाँव को गोवंश और स्वदेशी कृषि से स्वस्थ और उन्नत होते देखेंगे तो वे शहर की और पलायन नहीं करेंगे और गाँव की बुद्धि गाँव में रहे तो उस गाँव को उन्नत होने में देर नहीं लगेगी
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प्रश्न: हर कार्य में गोवंश भूमिका ही महत्वपूर्ण क्यों?
उत्तर:
क्योंकि आने वाले 2 दशको में पेट्रोलियम के बाद विश्व अर्थव्यवस्था में भारतीय गोवंश बहुत बड़ी और निर्णायक भूमिका निभाएगा
और जिसने इसकी शक्ति को आज पहचान लिया वही विश्वगुरु होगा
यही कारण है की अमेरिका गोमूत्र का पेटेंट करवा कर बैठा है
ब्राज़ील भारतीय गोवंश को बढाने में लगा है
और दुनिया के सभी देश किसी न किसी स्तर पर भारतीय गोवंश के महत्त्व को समझने में लगे है
तो हम भारतीय कब समझेंगे की
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गाय हमारी माँ है और माँ का स्थान वृद्धाश्रम (गोशाला) में नहीं, घर में है
उसे हमारा दान नहीं ध्यान चाहिए
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यह बात किसी धर्म से सम्बंधित नहीं है बल्कि विश्व की भलाई से सम्बंधित है
इसलिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से गाय को अपने घर में लाना है
उसी प्रयास का यह आरम्भ है की प्रत्यक्ष रूप से गाँव के हर घर में गाय लाकर शहर के उन100 परिवारों में परोक्ष रूप से गाय लाने की तै्यारी है
जिसका लक्ष्य भारत को फिर से विश्वगुरु बनाना है जो बिना गोवंश के संभव नहीं
जो इस अभियान न्यास से अभी एक कार्यकर्ता के रूप में जुड़ने चाहे वह अपना विवरण इस नंबर पर whatsapp, Hike या सन्देश के द्वारा भेज दें 9599075203
न्यास का गठन एक ओपचारिकता मात्र है हमारे लिए सदैव
न्यास हित से सर्वोपरि राष्ट्रहित होगा
निवेदक:
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- वीरेंद्र सिंह एवं आयुर्वेदाचार्य सुनील यादव
सचिव एवं अध्यक्ष
ऋषिवन आरोग्य न्यास (ट्रस्ट)
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(न्यास की सदस्यता देने का कार्य जल्द ही आरम्भ होगा और जानकारी प्रेषित की जाएगी)