07/03/2026
से पुरन रस्ता अब दिल के डराव लागल,
तोहर चुप्पी के मंजर मन में जागे लागल।
आँख भीतर रोकल छे तू समुंदर जइसन पीर,
माझी के झोंका आके मन के पागल करे लागल।
जिनगी के धूपे छइयाँ कहीं मिलल नइ,
बंद दरीचा काहे फड़फड़ाए लागल।
तोहर संग जे बात के अँस बचल अब तलक,
ओही सहारे दिल अपन मनावए लागल।
दिल चाहत रहल भूले ओ बितल काल,
फेर पुरन घाव सब दुखावए लागल।
तू नइखेस त शहरो सुनसान बुझाए,
घर के दीवारो अब डरावए लागल।
मंजिल दूर हउक, तोहर एहसास संग हे,
पाँव थाक गिरे त सपन आवए लागल।
दिल हार मानल अब अइसन हाल हो गेल,
अपन के खोके तोके अपन भीतर पावए लागल।
डॉ निरीश कुमार महतो (बानुआर)
प्रदेश महासचिव आदिवासी कुड़मि समाज