वैदिक ज्योतिष विद्या

वैदिक ज्योतिष विद्या Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from वैदिक ज्योतिष विद्या, Uttar Pradesh Gorakhpur, Gorakhpur.

🔱 वैदिक ज्योतिष परामर्श
📿 कुंडली • विवाह • करियर • ग्रह दोष
✨ भगवान की कृपा से सही मार्गदर्शन कुंडली मैचिंग हस्तरेखा वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा सेहत कैसी रहेगी सब आपके डेट ऑफ बर्थ से पता चलता है आपकी हस्तरेखा से पता चलता है

Radhe radhe 🙏
01/08/2026

Radhe radhe 🙏

🔱 मांगलिक दोष से घबराएँ नहीं, सही उपाय और सच्ची श्रद्धा हर बाधा को दूर करने की शक्ति रखते हैं।🙏 भगवान हनुमान की कृपा, मं...
04/07/2026

🔱 मांगलिक दोष से घबराएँ नहीं, सही उपाय और सच्ची श्रद्धा हर बाधा को दूर करने की शक्ति रखते हैं।
🙏 भगवान हनुमान की कृपा, मंगल देव का आशीर्वाद और सकारात्मक कर्म जीवन में सुख, शांति एवं सफलता का मार्ग प्रशस्त करें।

🚩 जय श्री हनुमान 🚩
#मांगलिकदोष #हनुमानजी #मंगलदेव #सनातनज्ञान #हिंदूधर्म #भक्ति #आस्था #जयश्रीराम

30/06/2026

Radhe radhe

क्षीरसागर का दिव्य रहस्य: जहाँ अनंत शांति का निवास है। भगवान श्रीहरि (विष्णु) की अद्भुत रचना का वर्णन:-👇================...
30/06/2026

क्षीरसागर का दिव्य रहस्य: जहाँ अनंत शांति का निवास है। भगवान श्रीहरि (विष्णु) की अद्भुत रचना का वर्णन:-👇

===================

जय श्री राम
28/06/2026

जय श्री राम

21/06/2026

अनजाने में भी आप इस सच को जानते हो

राजयोग (Raj Yoga) से लाभ कैसे बनता है?वैदिक ज्योतिष में राजयोग का अर्थ केवल राजा बनना नहीं है, बल्कि ऐसा योग जो व्यक्ति ...
21/06/2026

राजयोग (Raj Yoga) से लाभ कैसे बनता है?

वैदिक ज्योतिष में राजयोग का अर्थ केवल राजा बनना नहीं है, बल्कि ऐसा योग जो व्यक्ति को उच्च पद, सम्मान, धन, प्रतिष्ठा, नेतृत्व और सफलता दिलाए।

राजयोग बनने के प्रमुख कारण:

1. त्रिकोण (1, 5, 9) और केंद्र (1, 4, 7, 10) भावों के स्वामियों का संबंध (युति, दृष्टि या राशि परिवर्तन)।

2. योगकारक ग्रह का मजबूत होना।

3. लग्न और लग्नेश का बलवान होना।

4. दशम भाव (कर्म), नवम भाव (भाग्य) और पंचम भाव (पूर्व पुण्य) का शुभ होना।

5. शुभ ग्रहों का उच्च राशि, स्वराशि या मित्र राशि में होना।

राजयोग से मिलने वाले लाभ

सरकारी या निजी क्षेत्र में ऊँचा पद

व्यवसाय में सफलता

धन और संपत्ति में वृद्धि

समाज में मान-सम्मान

नेतृत्व क्षमता

प्रभावशाली व्यक्तियों का सहयोग

प्रसिद्धि और प्रतिष्ठा

क्या केवल राजयोग होना ही पर्याप्त है?

नहीं। राजयोग का पूरा फल तब मिलता है जब:

उस योग के ग्रहों की महादशा या अंतरदशा चल रही हो।

ग्रह अशुभ प्रभावों से अत्यधिक पीड़ित न हों।

व्यक्ति कर्म और प्रयास भी करे।

यदि आपकी जन्म कुंडली देखकर बताना हो कि उसमें राजयोग है या नहीं, तो अपनी ये जानकारी भेजें:

जन्म तिथि

जन्म समय

जन्म स्थान

मैं आपकी कुंडली के आधार पर बता सकता हूँ कि कौन-सा राजयोग बना है, कब उसका फल मिलेगा, और उससे क्या लाभ मिलने की संभावना है।

Shani Dev की महिमाशनि देव को न्याय का देवता और कर्मफलदाता माना जाता है। वे प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल ...
20/06/2026

Shani Dev की महिमा

शनि देव को न्याय का देवता और कर्मफलदाता माना जाता है। वे प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। इसलिए उन्हें भय का नहीं, बल्कि न्याय और सत्य का प्रतीक माना जाता है।

शनि देव की महिमा

कर्मों का न्याय: शनि देव अच्छे कर्म करने वालों को उन्नति, सम्मान और सफलता देते हैं।

अहंकार का नाश: वे मनुष्य के अहंकार को दूर कर उसे विनम्र बनाते हैं।

धैर्य और संयम: शनि की कृपा से व्यक्ति में धैर्य, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति आती है।

सच्ची भक्ति का फल: जो श्रद्धापूर्वक शनि देव की आराधना करता है, उसके जीवन की अनेक बाधाएँ दूर होती हैं।

शनि देव की पूजा कैसे करें?

शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।

काले तिल, उड़द की दाल और तेल का दान करें।

हनुमान जी की उपासना भी करें, क्योंकि उनसे शनि देव प्रसन्न होते हैं।

"ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का 108 बार जप करें।

प्रेरणादायक पंक्तियाँ (Facebook के लिए)

"शनि देव दंड नहीं, न्याय देते हैं। कर्म अच्छे रखिए, कृपा स्वयं प्राप्त होगी। जय श्री शनिदेव! 🙏🖤"

केतुकेतू – पापी ग्रह , बहूरंग( चित्रविचित्र ) , आयु – 100 वर्ष , 44 वर्ष में अपना विशेष फल देने वाला / निवास – घर का कोन...
30/05/2026

केतु

केतू – पापी ग्रह , बहूरंग( चित्रविचित्र ) , आयु – 100 वर्ष , 44 वर्ष में अपना विशेष फल देने वाला / निवास – घर का कोना स्थान /

🔹 केतु अश्विनी , मघा एवं मूल नक्षत्र के स्वामी हैं । राहु की तरह केतु को किसी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है । लेकिन धनु राशि में यह उच्च होता है और मिथुन राशि में यह नीच भाव में होता है । केतु एक छाया ग्रह है , हमेसा वक्री रहते हैं एवं अस्त नहीं होते हैं । एक राशि पर 1 वर्ष 6 माह रहते हैं । इसका विशेष अधिकार पैरों के तलवों पर रहता है ।

♦️विशेष – ज्योतिष मे जितने भी ग्रह हैं वे सभी किसी ना किसी देवता का प्रतिनिधित्व करते है । ग्रहों के स्वभाव गुण पूर्व जन्म मे किए गए कार्यों के अनुसार फल प्रदान करने के लिए निर्धारित किए गए हैं । यदि किसी ग्रह के विषय में सिर्फ नकारात्मक बाते लिखी जाती है तो हमे इसे भी स्वीकार करना पड़ेगा । क्योकि संसार में शुभ कार्य होते है या अच्छे लोग होते हैं तो साथ मे बुरे कार्य भी होते हैं और बुरे लोग भी होते है । इसलिए किसी ग्रह को बुरा या गाली नहीं देना चाहिए । क्योकि इन ग्रहो का प्रभाव हमारे ही कर्मो का फल है । बहुत से लोग ज्योतिष मे एक अलग से प्रभाव दिखाने के लिए परेशानी करने वाले ग्रहों की भी बड़ाई करते हैं । परंतु जिसने दुख दर्द परेशानी झेला है वही जनता है । ग्रहों के नाकारात्मक प्रभाव बताने पर कुछ लोग कहते है की ज्योतिषाचार्य डराते हैं । यदि ज्योतिष को मानते है तो शुभ एवं अशुभ दोनों को स्वीकार करना पड़ेगा । यदि कुछ ग्रह परेशानी ये योग नहीं बनाते हैं तो जीवन एवं विश्व में परेशानी क्यों होती है ? ग्रहों के विषय में जो लिख रहा हूँ यह मैं अपने मन से नहीं लिख रहा हूँ बल्कि अनेकों ग्रंथों एवं विद्वानो के विचारों को संग्रह कर के लिख रहा हूँ ।

♦️कारक – नाना , मोक्ष , ध्वज , मंत्र – तंत्र , साधना , तपस्या , ब्रह्मज्ञान , आत्मज्ञान , वेदान्त , मौन व्रत , गुप्त विद्या , आयुर्वेद औषधि या वनस्पति , विरक्ति , ऊंचाई से गिरना , शरीर पर दाग , अटकाव , फोड़े फुंसी , सींगों वाले पशु , कांटा , नुकीली सामाग्री ,

👉राहू को साँप का मुख एवं केतु को साँप की पूंछ माना गया है । साँप के मुख मे जहर एवं पूंछ में शक्ति होती है । केतु के गुण दोष प्रायः मंगल के समान होते हैं मंगल के मुकाबलेऔर भी कड़ा । केतु भी मंगल की भांति अपने युति तथा दृष्टि के प्रभाव में आने वाले पदार्थों को चोट अथवा क्षति पहुंचाता है । राहु के सामान केतु भी अचानक फल देता है । मंगल की भांति यह भी बुद्धि एवं प्रभाव में तीव्र होता है । केतु शब्द का अर्थ वेद आदि ग्रंथों में झंडे के अर्थ में आया है । अर्थात ऊंचाई का , उच्चता का , महानता के प्राचुर्य का , उत्कृष्टता का प्रतीक है । अतः केतु भी अपने भीतर उत्कृष्टता आदि गुण रखता है । केतु में एक विशेष गुण यह है कि किसी स्वक्षेत्री ग्रह के साथ जब विराजमान होता है तो उसके फल में विशेष वृद्धि करता है । राहु से सर्वदा उल्टा होने से केतु में शुभता के कारण मोक्ष का कारक माना गया है । केतु को भले ही शुभ ग्रह माना जाए परंतु इसपर राहु की दृष्टि भी होती है जिसके कारण राहु का प्रभाव भी समाहित हो जाता है । केतु की दृष्टि जहां भी पड़ती है वहाँ चोट लगने की या आग लगने की संभावना भी रहती है ( यदि इसके साथ सूर्य एवं मंगल की भी युति हो तो )।

👉यदि शत्रु राशि में या सूर्य , चन्द्र , मंगल या शनि के साथ दृष्टि युति हो तो उस भाव के सुखों मे कमी या दूरी करता है । उस अंग में कटने , चोट लागने या ऑपरेशन की संभावना रहती है । चतुर्थ भाव मे प्रभाव हो तो मातृ भूमि का वियोग सहना पड़ता है । बार बार स्थान परिवर्तन भी करना पड़ता है । द्वादश भाव में मोक्ष देने वाला माना जाता है परंतु ऐसे हीं मोक्ष प्राप्त नहीं होता है , उसके लिए कठिन साधना , तपस्या एवं अच्छे कर्म करने पड़ते हैं ।

👉केतु सबसे ज्यादा पीड़ित सूर्य , चन्द्र , मंगल , शनि को पीड़ित करता है । यदि केतु पर मंगल या शनि की दृष्टि हो तब भी परेशानी के योग बन जाते हैं ।

👉केतु के द्वारा व्यक्ति को हमेशा ही बुरे फल प्राप्त नहीं होता है । केतु ग्रह के द्वारा व्यक्ति को शुभ फल भी प्राप्त होते हैं । यह आध्यात्म , वैराग्य , मोक्ष , तांत्रिक , आदि का कारक होता है ।

👉केतु के प्रभाव वाले व्यक्तियों में मंगल से संबंधित गुण होते हैं । ऐसी व्यक्ति में धैर्य की कमी होते हैं । मन एकाग्र नहीं रहता है । स्वभाव उग्र होता है । यदि अपने कार्य के या योजना के बारे में किसी को पहले बता देते हैं तब वह कार्य बिगड़ जाता है और सफलता प्राप्त नहीं होती है । ऐसे व्यक्तियों के शरीर या चेहरे पर चोट के या किसी प्रकार के निशान होते हैं ।

👉केतु अन्य ग्रहों के साथ योग बनाकर बीमारी एवं परेशानी देते है – चर्म रोग , फोड़े फुंशी , मस्से , गांठ , कुष्ट रोग , त्वचा रोग , मसल्स – नाड़ी रोग , न्यूरो रोग , आग से दुर्घटना , ऊंचाई से गिरना , शरीर पर चोट के निशान या दाग , संक्रामण रोग , वधिरता , वाणी रोग , मशीन से दुर्घटना , शस्त्राघात , विषाणु से उत्पन्न ज्वर , कृमि या विषैले जीवाणु के कारण रोग , विषैले जानवर से परेशानी साँप , बिच्छू , कुत्ता काटना इत्यादि , विस्फोट , अग्नि कांड , काट – पीट हत्या , मानसिक रोग , ऊपरी बाधा , ।

वैदिक ज्योतिष-डीबी डेस्क

७५८७५३६०२४

🌟 कुंडली के अनुसार आज का दिन 🌟आज का दिन धैर्य, समझदारी और सकारात्मक सोच का संकेत दे रहा है।काम में मेहनत का फल मिलने के ...
30/05/2026

🌟 कुंडली के अनुसार आज का दिन 🌟

आज का दिन धैर्य, समझदारी और सकारात्मक सोच का संकेत दे रहा है।
काम में मेहनत का फल मिलने के योग हैं। परिवार का सहयोग मिलेगा, लेकिन वाणी पर संयम रखें।
आर्थिक मामलों में सोच-समझकर निर्णय लें।
भगवान पर विश्वास रखें, भाग्य आपका साथ देगा।

🔮 आज का उपाय:
शनिदेव का स्मरण करें और
“ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का 11 बार जाप करें।

🙏 जय शनिदेव महाराज 🙏

अगर चाहो तो मैं इसे और ज्यादा दमदार, रहस्यमयी या प्रोफेशनल ज्योतिष स्टाइल में भी लिख दूँ।

Address

Uttar Pradesh Gorakhpur
Gorakhpur
273211

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when वैदिक ज्योतिष विद्या posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share