दूरदर्शी भाषा

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08/08/2026

-गोपेश्वर-चमोली-उत्तराखंड-
-मुकेश शर्मा-

-रात गुजारो या 10 हजार दो" : गोपेश्वर कोतवाली प्रभारी पर महिला पत्रकार का संगीन आरोप-
-वीडियो, चालान और बयान सबूत के तौर पर सुरक्षित, विभाग पर उठे सवाल-

उत्तराखण्ड पुलिस की वर्दी पर एक बार फिर गंभीर सवाल। कोतवाली गोपेश्वर के अंतर्गत पुलिस चौकी पठियालधार के प्रभारी अनुरुद्ध व्यास पर महिला काँवड़िया और पत्रकार ने उत्पीड़न और वसूली का आरोप लगाया है।
पीड़िता का कहना है कि उसका दो पहिया वाहन कोई और चला रहा था। इसके बावजूद पुलिस ने वाहन जब्त कर चालान उसके नाम पर काट दिया।
आरोप है कि कोतवाली प्रभारी ने कहा "या तो मेरे साथ रात गुजारो या 10,000 रुपये की व्यवस्था करो"। मांग न मानने पर 30,000 रुपये का चालान थमा दिया और रातभर खुले में सड़क पर रुकने को मजबूर किया।
पीड़िता के पास घटना का वीडियो, चालान की प्रति और उसका रिकॉर्डेड बयान सबूत के तौर पर सुरक्षित हैं।
इस घटना के बाद काँवड़ यात्रा में आई महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। पीड़िता ने SSP चमोली और महिला आयोग से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

इस संबंध में SSP चमोली सुरजीत सिंह पवार ने कहा, "हमारे थानों में ऐसा नहीं होता। हमारी पुलिस साफ सुथरा काम करती है। आप जिनकी बात कर रहे हैं उनको मेरे पास भेजिए, मैं 2000 रुपये किराया दे दूंगा।"

-लहार-भिंड-म.प्र.-मुकेश शर्मा--BMO लहार की जांच रिपोर्ट महीनों से संचालनालय में दबी, कार्रवाई ठंडे बस्ते में- लोक स्वास्...
07/08/2026

-लहार-भिंड-म.प्र.
-मुकेश शर्मा-

-BMO लहार की जांच रिपोर्ट महीनों से संचालनालय में दबी, कार्रवाई ठंडे बस्ते में-

लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग में लहार ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. विजय शर्मा के खिलाफ चल रही विभागीय जांच का प्रतिवेदन महीनों पहले भोपाल पहुंच चुका है, लेकिन संचालनालय स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

मामला एक शिकायत पर शुरू हुआ था। संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, म.प्र. भोपाल ने 4 मार्च 2025 के पत्र से डॉ. विजय शर्मा के विरुद्ध विभागीय जांच के आदेश दिए थे। जांच की जिम्मेदारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, भिंड को सौंपी गई थी और जिला स्वास्थ्य अधिकारी, भिंड को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाया गया था।
सीएमएचओ भिंड ने जांच पूरी कर 3 जुलाई 2026 को 21 पन्नों का प्रतिवेदन अभिमत सहित उपसंचालक, संचालनालय भोपाल को भेज दिया। इसके बाद संचालनालय ने 9 जुलाई 2026 के पत्र से प्रतिवेदन की प्रति डॉ. विजय शर्मा को तामील कराकर 10 दिन में अभ्यावेदन मांगा।
विभाग ने साफ किया कि यदि 10 दिन में जवाब नहीं मिला तो यह मान लिया जाएगा कि डॉ. शर्मा को अपने पक्ष में कुछ नहीं कहना है और एकपक्षीय कार्रवाई कर प्रकरण का निराकरण कर दिया जाएगा।
जांच रिपोर्ट और संचालनालय का पत्र डॉ. विजय शर्मा को भेजा जा चुका है। इसकी प्रति उपसंचालक, संचालनालय भोपाल और क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, ग्वालियर को भी सूचनार्थ भेजी गई है।
डॉ विजय शर्मा ने कहा कि में अपना जबाब विभाग को देचुका अब विभाग जाने.
इस पूरे मामले पर सीएमएचओ भिंड डॉ जे एस यादव का कहना है कि "जांच तो कब की चली गई, अब कार्रवाई संचालनालय को करनी है।"
अब सवाल ये है कि आगे क्या कार्रवाई होती है,या सत्ता और धनवल के दबाव में.......?

-रौन-भिंड-म.प्र--मुकेश शर्मा--कोर्ट ने कहा बहाल करो, जनपद पंचायत ने कहा नहीं देंगे वेतन: अवधेश प्रताप सिंह प्रकरण में अव...
06/08/2026

-रौन-भिंड-म.प्र-
-मुकेश शर्मा-

-कोर्ट ने कहा बहाल करो, जनपद पंचायत ने कहा नहीं देंगे वेतन: अवधेश प्रताप सिंह प्रकरण में अवमानना के हालात-
-हाईकोर्ट के आदेश के 2 साल बाद भी GRS को ज्वाइनिंग और बकाया वेतन से वंचित रख रही जनपद पंचायत रौन-

भिंड जिले की जनपद पंचायत रौन में उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर के आदेश की खुली अवहेलना का मामला सामने आया है। कोर्ट द्वारा सेवा में बहाल किए गए ग्राम रोजगार सहायक अवधेश प्रताप सिंह को जनपद पंचायत रौन न तो ड्यूटी पर ले रही है और न ही अप्रैल 2025 से बकाया वेतन दे रही है।
अवधेश प्रताप सिंह, GRSग्राम पंचायत चंदावली की सेवा 11.04.2022 को समाप्त कर दी गई थी। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में रिट पिटीशन 10895/2022 दायर की।

माननीय न्यायालय ने सेवा समाप्ति आदेश निरस्त करते हुए श्री सिंह को बहाल करने के निर्देश दिए। आदेश में स्पष्ट लिखा है - "यदि याचिकाकर्ता द्वारा अप्रैल 2025 से कार्य किया गया है तो अप्रैल 2025 से वेतन जारी किया जाए"। साथ ही कहा कि भविष्य में राज्य कानून अनुसार कार्रवाई के लिए स्वतंत्र है।

कोर्ट आदेश के पालन के बजाय C.E.O. जनपद पंचायत रौन ने 28.07.2026 को पत्र क्रमांक/जप/2026/1800 से C.E.O. जिला पंचायत भिण्ड को पत्र लिखकर "मार्गदर्शन" मांग लिया।

पत्र में कहा गया है कि श्री सिंह पर मनरेगा राशि गबन और पेंशन फर्जीवाड़े के आरोप हैं। उनके खिलाफ एफआईआर के लिए 15.04.2025 को थाना रौन में आवेदन दिया गया। 2025-26 की संविदा नहीं बढ़ाई गई और मई 2025 से वह अनुपस्थित हैं इसलिए वेतन नहीं बनता।

सेवानिवृत्त अधिकारी के अनुसार "कोर्ट ने बहाली और वेतन दोनों का आदेश दिया है। आरोपों की जांच अलग विषय है। पहले कर्मचारी को ज्वाइन कराकर ड्यूटी देना अनिवार्य है। उसके बाद विभागीय जांच कर कार्रवाई की जा सकती है। आदेश को टालना सीधे अवमानना है"।

जी आर एस अवधेश सिंह ने कहा "कोर्ट ने 2 साल पहले बहाल कर दिया। मैं ज्वाइन करने गया तो मना कर दिया। अब 16 महीने का वेतन भी रोक दिया गया है। गरीब परिवार कैसे चलेगा"।

अब देखना होगा कि C.E.O. जिला पंचायत भिण्ड इस पत्र पर क्या निर्णय लेते हैं। या फिर श्री सिंह को अवमानना याचिका दायर करनी पड़ेगी।

प्रशासन से सवाल? जब कोर्ट ने "भविष्य में कार्रवाई" की छूट दी है, तो बहाली रोककर जनपद पंचायत किस आदेश के तहत काम कर रही है?

-गोहद-भिंड-म.प्र--जितेंद्र यादव--RTI मांगो तो जवाब: मुझे पता नहीं, SDM से पूछो"-  -गोहद SDM कार्यालय में सूचना का अधिकार...
04/08/2026

-गोहद-भिंड-म.प्र-
-जितेंद्र यादव-

-RTI मांगो तो जवाब: मुझे पता नहीं, SDM से पूछो"-
-गोहद SDM कार्यालय में सूचना का अधिकार बना मजाक, कलेक्टर के आदेश भी रद्दी की टोकरी में-

जिले के गोहद SDM कार्यालय में सूचना का अधिकार अधिनियम को पूरी तरह मजाक बना दिया गया है। यहां न कानून की इज्जत है, न कलेक्टर के आदेश की। नतीजा ये है कि RTI लगाने वाले आम आदमी को दर-दर भटकना पड़ रहा है और जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेही से मुंह मोड़ रहे हैं।

ग्वालियर के मुकेश शर्मा ने सूचना के अधिकार के तहत तत्कालीन SDM गोहद पराग जैन द्वारा उपयोग किए गए शासकीय वाहन की पूरी जानकारी मांगी थी। इसमें वाहन की लॉगबुक, टूर डायरी और ईंधन के बिलों की प्रमाणित छायाप्रति शामिल थी। कलेक्टर कार्यालय भिण्ड ने इस आवेदन को गंभीरता से लेते हुए पत्र क्रमांक 13790 दिनांक 07/11/2025 जारी किया और SDM गोहद को निर्देश दिए कि उपरोक्त दस्तावेज आज ही उपलब्ध कराए जाएं ताकि आवेदक को समय सीमा में जानकारी दी जा सके।

लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली। जब मुकेश शर्मा जानकारी लेने गोहद SDM कार्यालय पहुंचे तो वहां मौजूद स्टेनो सचिन यादव ने साफ कह दिया कि "मुझे किसी आवेदन की जानकारी नहीं है। आप SDM साहब से बात करें"। यानी कलेक्टर का पत्र आया, RTI आवेदन रजिस्टर में दर्ज हुआ, लेकिन कार्यालय में किसी को इसकी भनक तक नहीं है।

RTI कानून 2005 के तहत 30 दिन के अंदर जानकारी देना अनिवार्य है और जानकारी न देने पर 25000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन गोहद कार्यालय में इस कानून की कोई परवाह नहीं है। यहां फाइलें गायब हैं, जवाब टालमटोल वाले हैं और आम आदमी को "ऊपर वाले से बात करो" कहकर लौटा दिया जाता है।

स्थानीय लोगों और RTI कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब कलेक्टर जैसे बड़े अधिकारी का आदेश भी यहां नहीं माना जा रहा तो फिर आम नागरिक किससे न्याय की उम्मीद करे। उन्होंने मांग की है कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और मांगी गई जानकारी को सार्वजनिक किया जाए।

अब देखना ये है कि कलेक्टर वाला आदेश गोहद SDM कार्यालय में कब अमल में आता है या ये भी फाइलों में दबकर रह जाता है?

-मौ-भिंड-म.प्र--"जहर बेच रहे हैं मौ के तेल माफिया! सरसों में महुआ की गुली मिलाकर कर रहे जनता की सेहत से खिलवाड़, टैक्स क...
02/08/2026

-मौ-भिंड-म.प्र-
-"जहर बेच रहे हैं मौ के तेल माफिया! सरसों में महुआ की गुली मिलाकर कर रहे जनता की सेहत से खिलवाड़, टैक्स की भी कर रहे चोरी-
-फोन नहीं उठाते फूड इंस्पेक्टर राम तौमर-

भिंड जिले के मौ कस्बा में सरसों के तेल के नाम पर खुलेआम "जहर" परोसा जा रहा है। यहां की ऑयल मिलों में सरसों के साथ सस्ती महुआ की गुली मिक्स करके तेल निकाला जा रहा है। इतना ही नहीं ये मिल संचालक सरकारी नियम-कानून को ठेंगा दिखाकर टैक्स चोरी में भी लिप्त हैं।

स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार मौ कस्बे की एक दर्जन से ज्यादा ऑयल मिलों में पिछले कई सालों से यही गोरखधंधा चल रहा है। मुनाफे के लिए ये लोग खाने के तेल में महुआ की गुली की मिलावट कर रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है। इससे लिवर, किडनी और पेट की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। इस सब में फूड इंस्पेक्टर राम तौमर की भूमिका संदेह के घेरे में है.

-नियम कागज में, मिलावट जमीन पर
आरोप है कि ये सभी मिलें FSSAI लाइसेंस, खाद्य सुरक्षा मानक, श्रम कानून और वजन-माप किसी भी नियम का पालन नहीं करतीं। न मशीनों की जांच होती है न तेल का सैंपल। प्रशासन की नाक के नीचे ये अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।

सरकार को लग रहा करोड़ों का चूना-

सबसे बड़ा घोटाला टैक्स चोरी का है। नियम के अनुसार सरसों मंडी के माध्यम से खरीदी जानी चाहिए ताकि सरकार को मंडी शुल्क और GST मिले। लेकिन ये मिल माफिया किसानों से सीधे मिल पर सरसों खरीद रहे हैं। इस तरह ये लोग सरकार को हर साल लाखों-करोड़ों का टैक्स चूना लगा रहे हैं।

-नामजद तेल माफिया - मौ
कस्बा-
कल्लू जैन, अप्पू जैन, लला शिवहरे, सत्यप्रकाश मिश्रा, चिंटू जैन बरौली वाले , जनक यादव तारौली रोड, आकाश अग्रवाल तारोली रोड, कल्लू जैन वरौली वारे, भोले शिवहरे, नवीन जैन, गद्‌दू खॉन, कसेरुआ वाले

ग्रामीणों में आक्रोश है कि त्योहारों और शादियों में भी यही मिलावटी तेल इस्तेमाल हो रहा है और जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं।
"सस्ते तेल के चक्कर में हम अपने बच्चों को जहर खिला रहे हैं। प्रशासन कब जागेगा?" - स्थानीय नागरिक
समाजसेवियों और आम जनता ने कलेक्टर भिंड, पुलिस अधीक्षक और खाद्य सुरक्षा विभाग से मांग की है कि तुरंत टीम बनाकर सभी मिलों पर छापा मारा जाए, तेल के सैंपल जांचे जाएं और दोषियों पर FSSAI एक्ट, खाद्य अपमिश्रण अधिनियम और आयकर-वाणिज्य कर चोरी के तहत कठोरतम कार्रवाई की जाए।
अब देखना ये है कि प्रशासन इस "तेल माफिया" पर कब लगाम लगाता है या फिर जनता को ऐसे ही जहर खाना पड़ेगा।
अगली खबर में विजली चोरी और टैक्स चोरी विस्तार से.....

-गोहद-भिंड--योगेश प्रसाद-राधे-राधे के नाम पर जहर! बस स्टैंड पर बिना परमिशन चल रही सिंगल यूज प्लास्टिक फैक्ट्री, नेता-अफस...
29/07/2026

-गोहद-भिंड-
-योगेश प्रसाद-

राधे-राधे के नाम पर जहर! बस स्टैंड पर बिना परमिशन चल रही सिंगल यूज प्लास्टिक फैक्ट्री, नेता-अफसर दे रहे संरक्षण-
"सरकार के बैन के बावजूद सालों से जनता को पिला रहे हैं बीमारी, प्रशासन मौन"-
-कंपनी मालिक राजीव जैन बोले हमारे पास कोई लाइसेंस नहीं-

एक तरफ सरकार सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन का ढिंढोरा पीट रही है, दूसरी तरफ गोहद बस स्टैंड पर "राधे-राधे इंडस्ट्री" नाम की फैक्ट्री खुलेआम जहर परोस रही है।

सूत्रों के मुताबिक यह इंडस्ट्री बिना किसी लाइसेंस और परमिशन के सिंगल यूज प्लास्टिक के ग्लास और पॉलीथिन बना रही है। गर्म चाय, समोसे और खाने-पीने का सामान इन्हीं जहरीले ग्लास-पन्नी में बेचा जा रहा है।

सबसे बड़ा खुलासा - इस अवैध धंधे को स्थानीय नेताओं और अधिकारियों का सीधा संरक्षण है। इसी "ऊपरी सेटिंग" की वजह से सालों से यह फैक्ट्री बंद नहीं हो पाई। शिकायत करो तो फाइल दब जाती है।

डॉक्टरों का कहना है कि सिंगल यूज प्लास्टिक में गर्म चीजें डालने से कैंसर, हॉर्मोन और पेट की गंभीर बीमारियां होती हैं। यानी "राधे-राधे" के नाम पर आम जनता को बीमारी परोसी जा रही है।

जबकि सरकार का साफ आदेश है - सिंगल यूज प्लास्टिक का उत्पादन, बिक्री और उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। लेकिन बस स्टैंड जैसी भीड़ वाली जगह पर यह खेल बेखौफ चल रहा है।

स्थानीय लोगों में आक्रोश है। नागरिकों ने कलेक्टर और प्रदूषण विभाग से मांग की है कि इस फैक्ट्री को तुरंत सील कर संचालकों और संरक्षण देने वाले नेताओं-अधिकारियों पर FIR दर्ज की जाए।

सवाल सीधा है - क्या प्रशासन कानून लागू करेगा या "राधे-राधे" की आड़ में जनता की सेहत से खिलवाड़ चलता रहेगा?इस मामले कंपनी संचालक राजीव जैन से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि हमारे पास कोई लाइसेंस नहीं है वहीं मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने कहा कि में नया आया हूं आप दो दिन का समय दीजिये कागज़ देखकर बताता हूं.

https://www.facebook.com/share/p/18HAPgkDej/
16/07/2026

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-ग्वालियर-म.प्र-
-योगेश प्रसाद-
डी.के.शर्मा नहीं बचापाए अपने शागिर्द नटवरलाल" आलोक वर्मा को-
-धान भुगतान रोककर किसानों को महीनों भटकाया, करोड़ों के धान कांड से भी जुड़ा नाम-
-अब किसानों को डी के शर्मा के खास मगरमच्छ डबरा मंडी सचिव रावत के विरुद्ध कार्रवाई का इंतजार-
-अब संयुक्त संचालक डी के शर्मा पर लटक रही है तलबार-

म. प्र. राज्य कृषि विपणन बोर्ड भोपाल ने आखिरकार "हंटर" चला दिया। कृषि उपज मंडी समिति ग्वालियर के सचिव आलोक वर्मा को कर्तव्यहीनता के आरोप में एम डी कुमार पुरुषोत्तम ने निलंबित कर सागर मंडी बोर्ड में अटैच कर दियाहै।

प्राप्त जानकारी के अनुसार वरिष्ठालय के आदेश के बावजूद "नटवरलाल" के नाम से फेमस लश्कर मंडी सचिव आलोक वर्मा ने किसानों को धान का भुगतान नहीं किया। किसान कई महीनों से मंडी के चक्कर काट रहे थे। भुगतान न होने से नाराज और प्रताड़ित किसान मंडी बोर्ड को कोसने लगे थे, जिससे विभाग की छवि लगातार खराब हो रही थी।

-निलंबन का आदी-
संयुक्त संचालक डी के शर्मा का संरक्षण प्राप्त आलोक वर्मा का यह पहला निलंबन नहीं है। वह पहले भी निलंबित हो चुका है। वर्मा पर अवैध परिवहन में लापरवाही का भी आरोप है।

-करोड़ों के धान कांड से कनेक्शन-
यह वही आलोक वर्मा हैं जिनका नाम करोड़ों रुपए के धान कांड से जुड़ा है। यह कांड पूरे प्रदेश में छाया था और प्रकरण अभी भी माननीय न्यायालय में लंबित है। जांच के दौरान मंडी प्रतिनिधित्व में वर्मा ने अहम भूमिका निभाई थी। सूत्रों का कहना है कि यदि ठीक से जांच हो तो इनकी संलिप्तता भी सामने आ सकती है।

मंडी सूत्रों का मानना है कि यदि दीनारपुर उपमंडी के गेटपास और कैमरे की रिकॉर्डिंग की जांच हो जाए तो इनकी करतूतें भी उजागर हो सकती हैं।

-डी. के. शर्मा के करीबी-
चर्चा है कि वर्मा, वर्तमान संयुक्त संचालक डी. के. शर्मा के काफी करीबी हैं। इसी "विशेष कृपा" के चलते ये अब तक बचते रहे। फिलहाल विभाग ने देर से ही सही लेकिन कार्रवाई कर दी है।
अब इंतजार है कि डी के शर्मा के एक और ख़ास मगरमच्छ डबरा मंडी सचिव रावत के विरुद्ध विभाग क्या कार्रवाई करता है? क्योंकि रावत की भी अनगिनत शिकायतें हैं.

https://www.facebook.com/share/p/1JppmEUXL2/
13/07/2026

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-गोहद-भिण्ड-म.प्र-
-मुकेश शर्मा-
SDM की बेनामी फैक्ट्री": गोहद में मित्रों-रिश्तेदारों के नाम करोड़ों की जमीन-
-त्कालीन SDM.. राजन नाड़िया पर घोटाले का आरोप, EOW में शिकायत तैयार-


कुर्सी का रौब ऐसा कि कानून भी झुक जाए। गोहद के तत्कालीन SDM राजन नाड़िया पर आरोप है कि सरकारी ताकत का इस्तेमाल कर उन्होंने "बेनामी जमीन का धंधा" चला लिया।

करोड़ों की जमीन सीधे नाम पर नहीं खरीदी। खरीदी मित्रों, रिश्तेदारों और परिजनों के नाम। अब मामला EOW और GAD तक पहुंचने वाला है।

-खेल क्या था?
आरोप है कि गोहद में पदस्थ रहने के दौरान नाड़िया ने मालनपुर आसपास के गांवों में सस्ती कृषि जमीन चिन्हित की। फिर अपने प्रभाव से दाम बढ़वाकर उसे बेचने-खरीदने का खेल शुरू किया।

लेकिन रजिस्ट्री अपने नाम नहीं। सारी प्रॉपर्टी दोस्तों, भाई-बंधुओं और रिश्तेदारों के नाम करवा दी। ताकि "आय से अधिक संपत्ति" का सवाल ही न उठे।

-स्थानीय लोगों का सीधा सवाल-9 नौकरी में लाख की तनख्वाह... तो करोड़ों की जमीन कहां से?"

-3 कानून एक साथ टूटे-

-बेनामी लेनदेन अधिनियम 2016- अपनी काली कमाई को सफेद करने के लिए दूसरों के नाम संपत्ति। सजा 7 साल + संपत्ति जब्त।
-MP सिविल सेवा आचरण नियम- हर साल संपत्ति का ब्योरा देना अनिवार्य। छुपाना - कदाचरण निलंबन।
-भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-पद का दुरुपयोग कर अवैध लाभ।

-अब क्या होगा?
शिकायतकर्ता ने सभी रजिस्ट्री, नामांतरण और बैंक लेनदेन की फाइल तैयार कर ली है। अगले हफ्ते भिंड कलेक्टर, EOW और GAD में शिकायत दी जाएगी।

मांग साफ है: सभी संदिग्ध जमीनों की जांच, आय से अधिक संपत्ति की कुर्की और तत्काल निलंबन।

फिलहाल नाड़िया का पक्ष सामने नहीं आया है।

-सीधा सवाल-अगर एक SDM ही बेनामी का सरगना बन जाए, तो गरीब की जमीन कौन बचाएगा?

_नोट:ये आरोप शिकायतकर्ता के हैं। जांच के बाद ही सच सामने आएगा। संबंधित पक्ष का जवाब मिलने पर प्रकाशित किया जाएगा।_

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