Hari Krishna kushwaha

Hari Krishna kushwaha जय गुरुदेव सत्संग

Jay Gurudev Patrika
27/05/2026

Jay Gurudev Patrika

जय गुरुदेव पत्रिका
27/05/2026

जय गुरुदेव पत्रिका

Jay Gurudev Patrika
26/05/2026

Jay Gurudev Patrika

25/05/2026

*जय गुरु देव*
*प्रार्थना क्यों करनी चाहिए ?*

24/05/2026

*जय गुरु देव*
*अपनी आत्मा के कल्याण के लिए समय निकालो*

24/05/2026

*जय गुरु देव*
*साधना का अनुभव अगर बता दिया तो रोते रह जाओगे*

24/05/2026

*जय गुरु देव*
"केतिक करो उपाय, स्वभाव न छूटे, नीम न मीठा होय, चाहे गुड़ घी से सींचे"

22/05/2026

*जय गुरु देव*
*पुराने सत्संगी अपने को हमेशा नया नामदानी समझें*

21/05/2026

*जय गुरु देव*
*सुमिरन, ध्यान, भजन व नामध्वनि करो*

*जय गुरु देव*स्वामी जी ने कहा,,,,,,,भजन में तरक्की हो इसके लिए तुम्हें अच्छे लोगों का साथ करना होगा। तुम अपने साथी को पर...
21/05/2026

*जय गुरु देव*
स्वामी जी ने कहा,,,,,,,
भजन में तरक्की हो इसके लिए तुम्हें अच्छे लोगों का साथ करना होगा। तुम अपने साथी को परमार्थ के रास्ते पर मोड़ने में अधिक समय मत बर्बाद करो।वक्त आने पर वह भी मुड़ जाएगा।तुम्हें अपने को देखना चाहिए कि तुम कितना गुरु की आज्ञा का पालन करते हों।जो गुरु के वचनों का पालन नही करते,उनका उद्धार क़भी नही होगा।इस बात को बराबर याद रखो की जो मनुष्य अपनी मान बड़ाई के लिए नाना प्रकार के यत्नो से ऊपर उठना चाहता है और गुरु के वचनों की अवहेलना करता है और प्रेमी सत्संगी भाई बहनों पर हुकूमत करना चाहता है।वह व्यक्ति सबकी निहागो से गिर जाता है ऐसे लोगों का जम के फन्दों से छुटकारा नही हो सकता ।तुम अपना काम करो और अपने आत्म कल्याण की चिंता करो।दूसरे क्या करते है इसकी चिंता मत करो।हर रोज समय कम होता जा रहा है,इसकी चिंता करनी चाहिए।भजन और ध्यान अलग।नियम बना लो ओर उसका पालन करो तो भजन ध्यान बनने लगेगा।कमी तुम्हारे अंदर है गुरु तो दया करना चाहते ही है, किंतु तुम दया को ले नही पाते हो।
*जय गुरु देव*

*नशा चढ़े गुरु प्रेम का, विसरे मन का भान।** *सुख दुख की चिंता नहीं, हर पल गुरु का ध्यान।*जब सदगुरु की कृपा और उनके प्रेम...
20/05/2026

*नशा चढ़े गुरु प्रेम का, विसरे मन का भान।*
* *सुख दुख की चिंता नहीं, हर पल गुरु का ध्यान।*
जब सदगुरु की कृपा और उनके प्रेम का नशा भक्त के मन पर छा जाता है, तो उसे दुनियादारी की और अपने तन-मन की सुध नहीं रहती। इस प्रेम की मस्ती में इंसान इतना लीन हो जाता है कि उसे जीवन के सुख-दुःख की कोई चिंता नहीं सताती, और वह हर पल केवल अपने गुरु के ध्यान और उनकी महिमा में डूबा रहता है।

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