Arjak Sangh अर्जक संघ

Arjak Sangh अर्जक संघ सामाजिक,आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तन हेतु अर्जक संघ की स्थापना 1 जून 1968 को हुई थी । जय अर्जक।

10/02/2026

यूजीसी पर प्रो लक्ष्मण यादव की बात

25/12/2025

ब्राह्मण विधायक??

गया जिला के केनार चट्टी स्थित अर्जक निवास में आज पेरियार रामासामी की स्मृति में विवेक दिवस मनाया गया।आयोजक –उपेन्द्र पथि...
25/12/2025

गया जिला के केनार चट्टी स्थित अर्जक निवास में आज पेरियार रामासामी की स्मृति में विवेक दिवस मनाया गया।
आयोजक –उपेन्द्र पथिक

16/03/2025

गडकरी जी! केवल मुस्लिम ही क्यों, हिन्दू भी यदि वैज्ञानिक सोच अपना ले तो देश जल्दी तरक्की करेगा।

27/09/2024

आप सभी प्रांतीय समिति के पदाधिकारियों ,सदस्यों,तथा समस्त जनपदों के जिलाअध्यक्ष मंत्री,कोषाध्यक्ष, संयोजकों सह संंयोजको को सूचित किया जाता है कि अर्जक संघ प्रांतीय कार्य समिति की दसवीं बैठक दिनांक 12 ,13अक्टूबर 2024 दिन शनिवार, रविवार स्थान- किसान सेवा केंद्र एवं गेस्ट हाउस पुखरायां कानपुर देहात ( मालिक भूपेंद्र सिंह सचान पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष कानपुर देहात)

प्रथम दिन की बैठक शाम 5: 00 बजे से प्रारंभ होकर रात 9:00 बजे तक होगी।
दूसरे दिन सुबह 8:00 बजे से शुरू होकर एजेंडे की समाप्ति तक।
भोजनावकाश 1 बजे।
बैठक में सभी जनपदों से अध्यक्ष,मंत्री,कोषाध्यक्ष,संयोजक,सह संयोजक अनिवार्य रूप से प्रतिभाग करेंगे।
बैठक का एजेंडा।
1- पिछली कार्यवाही की पुष्टि।
2 -जनपदवार समीक्षा जिसमें सदस्यता ,विवाह ,शोक सभा ,साहित्य और त्योहार की प्रगति रिपोर्ट।
3 -प्रांतीय समिति के सदस्यों की समीक्षा जिसमें उनके द्वारा चलाए गए सदस्यता अभियान ,विवाह , शोक,साहित्य और त्योहार की प्रगति आख्या।
4 -जनपद के प्रभारियों की समीक्षा।
5 -आगामी माह के मानववादी अर्जक त्यौहार जिसमें एकता दिवस,विज्ञान दिवस ,जागृति दिवस और शक्ति दिवस के मनाए जाने पर चर्चा।
6- अर्जक चेतना के प्रकाशन और कार्यक्रम में हुए खर्च पर अयोध्या और प्रांतीय समिति द्वारा संयुक्त हिसाब।
7 -2024 की सदस्यता रसीद का वितरण और सदस्यता अभियान चलाए जाने पर चर्चा।
8 -जनपदों के विस्तार हेतु प्रभारी/ संयोजक नियुक्त करना ।
9- 2024 की सदस्यता अनिवार्य रूप से जमा करे।
10 -वार्षिक कोटा मनी।
11 -अर्जक मासिक पत्रिका के प्रकाशन पर प्रांतीय समिति द्वारा सहयोग पर परिचर्चा।
12 -संघटन को सुदृढ़ करने हेतु क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाने पर विचार।
13-प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने पर चर्चा।
14 -जनपदों के सम्मेलन कराए जाने पर चर्चा।
15-अन्य अध्यक्ष की अनुमति से।
राम निवास वर्मा
प्रांतीय अध्यक्ष
जीपी कनौजिया
प्रांतीय महामंत्री
विजय कुमार पाल
प्रांतीय कोषाध्यक्ष
संपर्क सूत्र एवं पहुंच मार्ग
ट्रेन द्वारा आप पुखरायां स्टेशन पर उतरने के बाद ई रिक्सा से सेवा केंद्र पहुंच सकते है ।
बस से आप कानपुर से पोखराया उतरकर उपरोक्त स्थान पर पहुंच सकते है।
बस और स्टेशन से दूरी 500 मीटर।
सम्पर्क- मा.रमेशचन्द्र अर्जक ज़िलाध्यक्ष अर्जक संघ कानपुर देहात +91 7497-911662
मा.रमेश अर्जक +91 70689 04118-
मा.सी.पी.सिंह +91 70819 95195

14/09/2024

किस राजनेता ने मंत्री रहते हिंदी को राज काज की भाषा बनाने के लिए गिरफ्तारी दी थी?

14/09/2024
14/09/2024

राम स्वरूप वर्मा का हिंदी प्रेम
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–उपेंद्र पथिक

14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। पर इतने वर्षों बाद भी सरकारी कार्यालयों में हिंदी में काम काज नहीं हो पा रहा है। जिस कारण बहुतेरे भारतीयों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि अर्जक संघ के संस्थापक महामना राम स्वरूप वर्मा ने राजभाषा हिंदी को राज–काज की भाषा बनाने के लिए वित्त मंत्री की हैसियत से जो काम उत्तर प्रदेश में किया था,वह किसी राजनेता ने नहीं किया। इसके लिए लोग आज भी वर्मा जी का उदाहरण देते हैं।
1967 में चौधरी चरण सिंह की सरकार में उत्तर प्रदेश में सोशलिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता राम स्वरूप वर्मा वित्त मंत्री बनाए गए थे। तब उन्होंने अपने मंत्रालय के अधीन सभी सरकारी कार्यालयों में अंग्रेजी की टाइप राइटर को नीलाम करवाकर हिंदी टाइप राइटर खरीदवाया।और तब वित्त मंत्रालय का सारा काम काज हिंदी में ही होने लगा था।
दूसरा सबसे बड़ा काम उन्होंने यह किया कि क्लर्क की रिक्ति निकाली जिसमें शर्त लगा दिया कि जो अभ्यर्थी हिंदी में सुंदर अक्षरों में लिख सकता है और तीसरी श्रेणी से मैट्रिक उत्तीर्ण हुआ हो,वही इसका पात्र हो सकता है। इसके बाद सवर्ण समाज में भूचाल आ गया था।वे आंदोलन पर उतर आए थे,फिर भी वर्मा जी टस से मस नहीं हुए। और अंततः ज्यादातर पिछड़े दलित समाज के अभ्यर्थी को क्लर्क की सरकारी नौकरी लग गई।
स्मरणीय है कि उस समय ज्यादातर सवर्ण छात्र अपनी पहुंच के बल पर प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हो जाते थे। इस कारण वे इस नौकरी से वंचित हो गए। क्योंकि शर्त के अनुसार तृतीय श्रेणी से उत्तीर्ण अभ्यर्थी ही उस नौकरी के पात्र हो सकते थे।
मतलब, जब राम स्वरूप वर्मा वित्त मंत्री बने तब उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्रालय में सारा काम काज हिंदी में ही होने लगा था। उनके इस प्रयास की सराहना पूरे देश भर में खासकर हिंदी प्रदेशों में होने लगी थी।
पर ऐसा अनुकरण और किसी ने नहीं किया। वैसे तो वे उत्तर प्रदेश में छः बार विधायक बने।कभी सोसलिस्ट पार्टी से तो कभी शोषित समाज दल से। एक बार तो सवर्ण समाजवादियों की साजिश के कारण उन्हें सोसलिस्ट पार्टी के टिकट से वंचित होने के कारण निर्दलीय विधायक भी बनना पड़ा था। तभी उन्होंने अपनी पार्टी ‘समाज दल’ बाद में बिहार लेनिन जगदेव प्रसाद के साथ मिलकर ”शोषित समाज दल” बनाया था।जिसके वर्मा जी उत्तर प्रदेश में दो दो बार इकलौते विधायक भी वे बने थे।
वित्त मंत्री रहते हुए हिंदी को राज काज की भाषा बनाने के लिए उन्होंने आंदोलन भी किया। इस क्रम में 1967 में वे मंत्री रहते हुए इस मांग को लेकर दिल्ली में गिरफ्तारी भी दी थी।
उन्होंने हिंदी को राजकाज की भाषा बनाने के लिए कई लेख भी लिखे । अर्जक साप्ताहिक में प्रकाशित भी किया। विस्तार से जानने के लिए ‘क्रांति क्यों और कैसे’ पुस्तक में उनका उक्त लेख पढ़ा जा सकता है।
यह था वर्मा जी का हिंदी प्रेम।
उनका मानना था कि भारत के ज्यादातर लोग हिंदी बोलते और समझते हैं । इस कारण सरकारी काम काज हिंदी में ही होना चाहिए। पर एक साजिश के तहत सारा काम काज हिंदी में होने के बजाय अंग्रेजी में ही होता रहा।खासकर न्यायालयों में आज भी ज्यादातर काम अंग्रेजी में ही होता है।
हमें भी हिंदी को राज काज की भाषा बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। ताकि ज्यादातर लोग समझ सकें और लाभान्वित हो सके।
–उपेंद्र पथिक
पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सांस्कृतिक समिति, अर्जक संघ।

14/07/2024

शादी में फिजूलखर्ची पर रोक लगानी ही चाहिए।
जय अर्जक

14/07/2024

: अर्जक संघ का शिक्षा आंदोलन :
( सबको राष्ट्रीय, मानववादी और वैज्ञानिक समस्त शिक्षा एक समान व निशुल्क )

“ राष्ट्रपति, डी.एम. का बेटा, या निर्धन की हो संतान ।
भेदभाव पाखंड रहित, शिक्षा मुफ़्त व एक समान ।”
“ शिक्षा का उद्देश्य महान,
राष्ट्रीय एकता, स्वाभिमान ।”
भारतीय संविधान में सबको समान अवसर उपलब्ध कराने की प्रस्तावना है ।परन्तु भारतीय संविधान लागू होने के 74-75 वर्षों के बाद भी भारत में विपन्न, वंचित व साधनहीन समाज को शासक वर्ग की उदासीनता के कारण समान अवसर उपलब्ध नहीं हैं ।
भारत के नवनिर्माण एवं अन्यान्य समस्याओं के समाधान हेतु सर्वसुलभ, समान राष्ट्रीय शिक्षा की सर्वोच्च प्राथमिकता अपरिहार्य है ।
भारत में अधिकांश समस्याओं की जड़ शिक्षा का अभाव व पाखंड है । जिसके दुष्परिणामस्वरूप देश में लूट-खसोट, छल-प्रपंच, बेरोज़गारी, अंधविश्वास, अपराध, आतंक, महंगाई, नशाखोरी एवं भ्रष्टाचार चरम पर है ।
महान मानववादी संगठन अर्जक संघ अपने स्थापना काल 01 जून 1968 से ही सभी के लिये समान, निशुल्क , वैज्ञानिक व मानववादी राष्ट्रीय शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आंदोलनरत है । अर्जक संघ कई बार प्रखंड, जिला, राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर धरना-प्रदर्शन करके मांगपत्र केन्द्र व राज्य सरकारों के समक्ष प्रस्तुत कर चुका है । परन्तु शोषक प्रधान्य शासकदलों की अहमन्यता, स्वार्थपरता एवं राष्ट्रीयहितों के प्रति उपेक्षा के कारण स्थिति जस की तस है ।
अर्जक संघ फिर से राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति का आंदोलन प्रारंभ कर रहा है । जिसमें देश के प्रवुद्ध नागरिकों, छात्र-छात्राओं व शिक्षक-शिक्षकाओं का वांछित सहयोग अपेक्षित है ।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वरूप:
1- शिक्षा का उद्देश्य राष्ट्रीय स्वाभिमान एवं राष्ट्रीय एकता का वातावरण निर्मित करना हो ।
2- राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा में एकरूपता लाने के लिए संविधान में संशोधन करके शिक्षा को केन्द्रीय सूची में शामिल किया जाय ।
3- सारी शिक्षा निशुल्क, राष्ट्रीयकृत, वैज्ञानिक व मानववादी हो, तथा दसवीं तक अनिवार्य हो ।
4- प्राथमिक शिक्षा में राष्ट्रीयता, नागरिकता, गणित, भूगोल व वैज्ञानिक उपलब्धियाँ ये 5 विषय अनिवार्य रूप से पढ़ाये जायं। किसी भी स्तर के पाठ्यक्रम में पाखंड, पुनर्जन्म, भाग्यवाद, जाति-पाँति, ऊँच-नीच का भेदभाव व चमत्कार न हो ।
5- प्राथमिक शिक्षा के बाद शिक्षा के दो भाग कर दिये जावें - तकनीकी और व्यवसायिक शिक्षा तथा माध्यमिक और उच्च शिक्षा ।
6- सभी स्तर की शिक्षा में मानव-मानव की बराबरी का सिद्धांत प्रतिपादित रहे और विद्यालयों में परस्पर समता का व्यवहार और आचरण करना अनिवार्य हो।
7- तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के पर्याप्त विद्यालय स्थापित किए जावें, ताकि प्रत्येक विद्यार्थी मनपसन्द रोज़गार की निशुल्क शिक्षा प्राप्त कर कुशल बन जाय ।
8- शिक्षा के क्षेत्र में किसी सामाजिक व धार्मिक संस्था का प्रवेश व हस्तक्षेप निषिद्ध रहे ।
9- शिक्षा का बजट रक्षा बजट बराबर किया जाय ।
10- सभी पाठ्यक्रम क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार किए जायें और राष्ट्रभाषा के अतिरिक्त एक अन्य क्षेत्रीय भाषा सीखना अनिवार्य हो ।
चरणबद्ध समशिक्षा आंदोलन :
1- दिनॉंक 01 सितंबर से दिनॉंक 30 सितंबर 2024 तक :- जन जागरण एवं जन समर्थन हेतु पर्चे-पोस्टर व वाल पेंटिंग द्वारा प्रचार-प्रसार व जगह जगह गोष्ठियाँ, जनसभा एवं जन संपर्क ।
2- दिनॉंक 01 अक्टूबर से दिनॉंक 31 अक्टूबर 2024 तक :-प्रखंड, तहसील, जिला व राज्य स्तर पर धरना प्रदर्शन व ज्ञापन देना ।
3- दिनॉंक 15 नवम्बर 2024 को दिल्ली में जंतर मंतर पर राष्ट्रीय स्तर का धरना व ज्ञापन देना ।
निवेदक- प्रो.शिवकुमार भारती राष्ट्रीय अध्यक्ष अर्जक संघ ।

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