Fruits 'N' Juices

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अमृतफलम् (अमृत-फल)सिर्फ फल नहीं, आयुर्वेद का जीवित फॉर्मूला।जिस पेड़ की छाँव में पोषण पलता है, और जिस फल में सुरक्षा छिप...
09/12/2025

अमृतफलम् (अमृत-फल)
सिर्फ फल नहीं, आयुर्वेद का जीवित फॉर्मूला।
जिस पेड़ की छाँव में पोषण पलता है, और जिस फल में सुरक्षा छिपी होती है, वही अमरूद सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य का प्रतीक माना गया है। जिसे आधुनिक भाषा में "सुपरफ्रूट" कहा जाता है, आयुर्वेद ने सदियों पहले इसे अमृत का नाम दिया था। यह फल शरीर को अंदर से मजबूत करता है, अग्नि को संतुलित करता है और जीवन में स्थिरता लौटाता है।

अमरूद का हर हिस्सा पोषण से भरपूर है। इसमें मौजूद विटामिन C, फाइबर, पोटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट न सिर्फ त्वचा और इम्यूनिटी को बेहतर बनाते हैं, बल्कि दिल और पाचन को भी नया जीवन देते हैं। वैज्ञानिक शोध मानते हैं कि इसमें पाए जाने वाले लाइकोपीन, पॉलीफेनोल और क्वेरसेटिन शरीर को सूजन, संक्रमण और सेल-डैमेज से बचाते हैं। यह वह फल है जो आंतों को शुद्ध करता है, खून में संतुलन लाता है और इम्यून सिस्टम को अंदर से मजबूत करता है।

आयुर्वेद की नज़र में, अमरूद के पत्ते औषधीय हैं, छिलका इलाज है, और फल संपूर्ण पोषण है। इसके पत्तों का काढ़ा दस्त, दांत दर्द, छाले और पेट जैसी समस्याओं में फायदेमंद माना गया है। जड़ और छाल पेट की कमज़ोरी और उल्टी में उपयोगी हैं, और फल कब्ज, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर में संतुलन प्रदान करता है। एक पेड़, कई इलाज। यही आयुर्वेद की खूबसूरती है।

जहां आधुनिक विज्ञान पोषण की भाषा बोलता है, वहीं आयुर्वेद जीवन के संतुलन की कहानी लिखता है। अमरूद इसी संगम का प्रमाण है। स्वाद, विज्ञान और औषधि का अद्भुत मेल। यह वह फल है जो साधारण नहीं, बल्कि संस्कारित है। जो सिर्फ पेट को नहीं, बल्कि पूरे अस्तित्व को पोषण देता है।

देसी अल्केमिस्ट
हर घर के लिए आयुर्वेद और रसशास्त्र
प्रकृति के हर रहस्य का सम्मान करें, उसे अपने जीवन में उतारें।

🍶दूध और खजूर.....रात का रसायन"रात्रौ दुग्धं रसायनम्"रात में लिया गया दूध ओज, बल और स्थिरता का स्रोत बनता है।जब इसमें खजू...
22/11/2025

🍶दूध और खजूर.....
रात का रसायन
"रात्रौ दुग्धं रसायनम्"
रात में लिया गया दूध ओज, बल और स्थिरता का स्रोत बनता है।
जब इसमें खजूर जोड़ा जाए, तो यह अमृत बन जाता है।
🫕.विधि (Method)....
रात्रि सेवन की पारंपरिक विधि

2-4 खजूर को रात में दूध में डालकर हल्का उबालें।

उबालने के बाद ढककर रखें, ताकि दूध में खजूर का रस समा जाए। सोने से 30 मिनट पहले गुनगुना कर सेवन करें। यह विधि प्राचीन स्वर्ण रसायन विधि का ही एक सरल रूप है।
आयुर्वेदिक लाभ🌬️🌬️
दूध और खजूर का संयुक्त प्रभाव
1️⃣. बलवर्धकः मांस, अस्थि और शुक्र धातु को पुष्ट करता है।
2️⃣. ओजवर्धकः मानसिक शांति और गहरी नींद में सहायक।
3️⃣. वात-पित्त संतुलनः थकान, चिड़चिड़ापन और तनाव को घटाता है।
4️⃣. रक्तवर्धकः खजूर का लोह तत्व और दूध का कैल्शियम शरीर को पुनर्जीवित करते हैं।
🧪वैज्ञानिक दृष्टिकोण....

((Science Meets Ayurveda))
दूध का ट्रिप्टोफैन नींद और मूड सुधारता है, जबकि खजूर का मैग्नीशियम व ग्लूकोज त्वरित ऊर्जा और पाचन सुधारता है।
यह संयोजन सेरोटोनिन संतुलन लाकर गहरी नींद और मांसपेशियों की पुनर्निर्मिति में मदद करता है।

कब और क्यों रात में?
रात्रि का समय सर्वश्रेष्ठ क्यों?
आयुर्वेद कहता है कि रात रसायन क्रिया का समय है।
दिन भर की थकान के बाद शरीर पुनर्निर्माण की अवस्था में होता है।
रात्रि का दूध इस प्रक्रिया को पोषक ऊर्जा प्रदान करता है।
🚸.सावधानियाँ..,
संतुलन का ध्यान रखें
1️⃣. गर्मियों में खजूर की मात्रा 1-2 रखें।
2️⃣. डायबेटिक व्यक्ति वैद्य की सलाह से लें।
3️⃣. उबालने के बाद अधिक देर तक न रखें,
ताज़ा सेवन करें।

🧵Thread: Poppy — a small seed that can change your whole lifestyle!It's not just kitchen spice... This is the power of S...
21/10/2025

🧵Thread: Poppy — a small seed that can change your whole lifestyle!

It's not just kitchen spice... This is the power of Sanatan Ayurveda.
Know the miraculous benefits of poppy
👇👇🏻
Khaskhas - called "khaskulla" in Sanskrit,
Ayurveda has been considered to be Watshamak, Balya (power giver) and cool.
This balances the body, mind and soul — all three.
It's not just food, it's a medicine.
What's in the poppy?

Even modern science believes that poppy is a superfood:

🔹 Protein
🔹 Calcium
🔹 Magnesium
🔹 Omega-6 (Linoleic Acid)

And yes — it strengthens the body structure, like resolve the mind!
What does poison do?

✅ Sleep makes deep and peaceful
✅ Digestion balances the fire
✅ Joint pain, arthritis relief
✅ Brighten skin — sharpen within
✅ Strengthens the brain and heart
There is no new discovery.
Poppy has been used in Sanatan India for thousands of years:

🔸 Ayurvedic in the brews
🔸 Ballya in medicines
🔸 Night bed in milk
🔸 In the recipes given to women after delivery
Poppy = Nutrition of Vitality (Ojas)

According to Ayurveda, the diet which increases ojas, is like nectar.

Poppy communicates ojus, sharp and strength in the body —
This is eternal health: where the body is resource, and the soul is achieved.
How to take a poppy? (According to Ayurveda)

🥛 before going to bed at night:
Grind poppy and boil in milk, add some nutmeg.
Deep sleep and mind will experience peace.

In the food:
Use as paste in vegetable/gravy.

⚠️ Avoid excessive volume — restraint is the basic of Ayurveda.
One seed, many benefits
Poppy is :

Sleepy (sleepy)
Firefighter (digestion booster)
Watahar (wat blame calming)
Intellectual Nutrition (Brain Powering)
Heart-Friend (Heartkeeper)
Remember:

> "यथा अन्नं, तथा मनः।
यथा शरीरं, तथा आत्मबोधः।"

As food, so mind.
As food, so clarity of the soul.
Poppy-like diet - body, mind and soul - energizes all three.

02/06/2025

विश्व की सबसे पुरानी है कुल्थी की दाल-
कुल्थी की दाल का इतिहास वैदिक सभ्यता से भी पुराना है, सरस्वती रिवर सभ्यता के समय, हड़प्पा कालीन सभ्यता में लगभग दस हजार वर्षों से भारत वर्ष में कुल्थी की दाल खाई जाती रही है, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश में खुदाई में इस दाल के अवशेष मिले, तो हड़प्पा में भी कुलथ का प्रयोग होता था। वेदों में कुल्थी के औषधीय गुणों का वर्णन है, तमिल में तो संगम साहित्य में कुल्थी के गुणों का कई पुस्तकों में वर्णन है।
पय्यामपल्ली तमिलनाडु के वेल्लोर जिले का एक गाँव है। जानवरों को पालतू बनाने और पौधों की खेती का सबसे पहला साक्ष्य इसी स्थान पर मिला है, जिसकी खुदाई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा की गई थी। इस गांव में मिट्टी के बर्तन बनाने और कुलथी की खेती के साक्ष्य मिले हैं।
धरती पर मौजूद अन्य किसी भी दाल से यह बहुत ज्यादा पौष्टिक है। आयुर्वेद की दृष्टि से यह सुपर फूड है। डायबिटीज, बैड कोलेस्ट्रॉल, किडनी प्रॉब्लम के लिए यह राम बाण है। इस दाल में ऐसे न्यूट्रिएंट पाये जाते हैं, जिनके कारण भूख कम लगती है, पेट जल्दी भर जाता है, इसीलिये वेट लॉस के लिए भी इसका सेवन सर्वोत्तम है।
इन्हीं गुणों की वजह से आदिकाल में मनुष्य इसे स्वयं भी खाता था और अपने घोड़ों को भी खिलाते थे, चूँकि घोड़ों को खिलाते थे, इसलिए नाम पड़ गया घोड़े वाली दाल है और हमने खाना बंद कर दिया और इसका उत्पादन तथा आविष्कार सब बंद हो गया। आज भी भारत में इसका जितना उत्पादन होता है उसका नब्बे प्रतिशत दो तीन पहाड़ी प्रदेशों में होता है। अतः यदि हमें भारतीय सुपर फूड दाल खानी है तो कुलथी को अपने भोजन में अवश्य शामिल करना चाहिए। इसकी दाल का सेवन करने वाले को कभी पथरी बनने का रोग नहीं होता है। यदि पथरी बनी हुई है तो इसके सेवन से पथरी खण्डित होकर निकल जाती है।

30/05/2025
18/09/2024

#आहार के नियम भारतीय 12 महीनों अनुसार

#चैत्र ( मार्च-अप्रैल) – इस महीने में चने का सेवन करे क्योकि चना आपके रक्त संचार और रक्त को शुद्ध करता है एवं कई बीमारियों से भी बचाता है। चैत्र के महीने में नित्य नीम की 4 – 5 कोमल पतियों का उपयोग भी करना चाहिए इससे आप इस महीने के सभी दोषों से बच सकते है। नीम की पतियों को चबाने से शरीर में स्थित दोष शरीर से हटते है।

#वैशाख (अप्रैल – मई)- वैशाख महीने में गर्मी की शुरुआत हो जाती है। बेल का इस्तेमाल इस महीने में अवश्य करना चाहिए जो आपको स्वस्थ रखेगा। वैशाख के महीने में तेल का उपयोग बिल्कुल न करे क्योकि इससे आपका शरीर अस्वस्थ हो सकता है।

#ज्येष्ठ (मई-जून) – भारत में इस महीने में सबसे अधिक गर्मी होती है। ज्येष्ठ के महीने में दोपहर में सोना स्वास्थ्य वर्द्धक होता है , ठंडी छाछ , लस्सी, ज्यूस और अधिक से अधिक पानी का सेवन करें। बासी खाना, गरिष्ठ भोजन एवं गर्म चीजो का सेवन न करे। इनके प्रयोग से आपका शरीर रोग ग्रस्त हो सकता है।

#अषाढ़ (जून-जुलाई) – आषाढ़ के महीने में आम , पुराने गेंहू, सत्तु , जौ, भात, खीर, ठन्डे पदार्थ , ककड़ी, पलवल, करेला आदि का उपयोग करे व आषाढ़ के महीने में भी गर्म प्रकृति की चीजों का प्रयोग करना आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

#श्रावण (जूलाई-अगस्त) – श्रावण के महीने में हरड का इस्तेमाल करना चाहिए। श्रावण में हरी सब्जियों का त्याग करे एव दूध का इस्तेमाल भी कम करे। भोजन की मात्रा भी कम ले – पुराने चावल, पुराने गेंहू, खिचड़ी, दही एवं हलके सुपाच्य भोजन को अपनाएं।

#भाद्रपद (अगस्त-सितम्बर) – इस महीने में हलके सुपाच्य भोजन का इस्तेमाल कर वर्षा का मौसम् होने के कारण आपकी जठराग्नि भी मंद होती है इसलिए भोजन सुपाच्य ग्रहण करे।

#आश्विन (सितम्बर-अक्टूबर) – इस महीने में दूध , घी, गुड़ , नारियल, मुन्नका, गोभी आदि का सेवन कर सकते है। ये गरिष्ठ भोजन है लेकिन फिर भी इस महीने में पच जाते है क्योकि इस महीने में हमारी जठराग्नि तेज होती है।

#कार्तिक (अक्टूबर-नवम्बर) – कार्तिक महीने में गरम दूध, गुड, घी, शक्कर, मुली आदि का उपयोग करे। ठंडे पेय पदार्थो का प्रयोग छोड़ दे। छाछ, लस्सी, ठंडा दही, ठंडा फ्रूट ज्यूस आदि का सेवन न करे , इनसे आपके स्वास्थ्य को हानि हो सकती है।

#अगहन (नवम्बर-दिसम्बर) – इस महीने में ठंडी और अधिक गरम वस्तुओ का प्रयोग न करे।

#पौष (दिसम्बर-जनवरी) – इस ऋतू में दूध, खोया एवं खोये से बने पदार्थ, गौंद के लाडू, गुड़, तिल, घी, आलू, आंवला आदि का प्रयोग करे, ये पदार्थ आपके शरीर को स्वास्थ्य देंगे। ठन्डे पदार्थ, पुराना अन्न, मोठ, कटु और रुक्ष भोजन का उपयोग न करे।

#माघ (जनवरी-फ़रवरी) – इस महीने में भी आप गरम और गरिष्ठ भोजन का इस्तेमाल कर सकते है। घी, नए अन्न, गौंद के लड्डू आदि का प्रयोग कर सकते है।

#फाल्गुन (फरवरी-मार्च) – इस महीने में गुड का उपयोग करे। सुबह के समय योग एवं स्नान का नियम बना ले। चने का उपयोग न करे।

जलेबी सिर्फ मिठाई नहीं आयुर्वेदिक दवाई भी हैये एक राजशाही पकवान है जिसे दूध दही या रबड़ी से खाया जाता है।जलेबी का आयुर्व...
16/09/2024

जलेबी सिर्फ मिठाई नहीं आयुर्वेदिक दवाई भी है

ये एक राजशाही पकवान है जिसे दूध दही या रबड़ी से खाया जाता है।

जलेबी का आयुर्वेदिक उपयोग :

जलेबी एक भारतीय व्यंजन है जो की जलोदर नामक बीमारी का इलाज में प्रयोग की जाती थी

शुगर बीमारी को नियंत्रित करने के लिए जलेबी को दही से खाते थे

खाली पेट दूध जलेबी खाने से वजन और लम्बाई बढ़ाने के लिए किया जाता था ।

माइग्रेन की और सिर दर्द के लिए सूर्योदय से पहले दूध जलेबी खाने को आयुर्वेद में लिखा है

ग्रह शांति अथवा ईश्वर का भोग में जलेबी से ::

जलेबी माता भगवती को भोग में चढ़ाने की प्रथा है।

इमरती जो की उडद दाल से बनती है वो शनिदेव के नाम पर हनुमान जी या पीपल वृक्ष या शनि मंदिर में चढ़ाने काले कौवा और कुत्ते को खिलाने से शनि का प्रभाव कम होता है।

जलेबी बनाने की विधि

हमारे प्राचीन ग्रंथ में जलेबी बनाने की विधि संस्कृत भाषा में लिखी है साथ ही

जलेबी बनाने की विधि पुराणों में भी है इसे रस कुंडलिका नाम दिया है

भोज कुतुहल में इसे जल वल्लीका नाम दिया है

गुण्यगुणबोधिनी' में भी जलेबी बनाने की विधि लिखी है ।

सबसे बड़ी बात की जलेबी कुंडली के आकार की की होती है जिसका संबंध आंतो से है कब्ज का ये रामबाण इलाज है ।

धन्यवाद।

शहरी लोग मटर पनीर और चिकिन के आदी हो चुके है वो क्या जाने हमारे गांव के ककोड़ा का स्वाद, क्या आपके गांव में भी मिलते है क...
31/08/2024

शहरी लोग मटर पनीर और चिकिन के आदी हो चुके है वो क्या जाने हमारे गांव के ककोड़ा का स्वाद, क्या आपके गांव में भी मिलते है ककोड़ा

हमारे गाँव के जंगल मे मिलती है 101% शुद्ध जैविक सब्जी नाम तो सुना ही होगा #ककोड़ा अब हम आपको इसके काम भी बता देते है

रक्षाबंधन पर गांव गया तो नदी नालों में खेतों की तरफ आ रहे पानी का अवलोकन करने के लिए चचेरे भाइयो के साथ खेतो की तरफ चला गया था जोकि जंगल के करीब है वहां देखा तो इन दिनों भयंकर करेला झाड़ियों पर लटके हुए नजर आ रहे थे

तभी राहुल बोला यार भाई इन्हें तोड़ते है रक्षाबंधन पर सिस्टर आई है उसे बहुत पसंद है वो ले जाने की बोल रही थी हम 4-5 लोग तोड़ने लगे मुश्किल से 20-25 मिनट में इतने तोड़ लिए

ककोड़ा बेल में लगता है इसकी ये बरसात में हरा होता है इसकी जड़ें जमीन में पड़ी रहती है ये स्वत् ही उगने वाली सब्जी है ककोड़ा मुख्यत दो प्रकार का होता है एक मीठा और दूसरा कड़वा दोनो के फोटो आप देख सकते है कड़वे वाले कि सब्जी ज्यादा स्वादिष्ट बनती है लेकिन ये कम मिलते है

ककोड़ा / कंटोला के सेवन से वजन घटाने में भी मदद मिलती है. इस सब्जी में बहुत कम मात्रा में कैलोरी और अच्छी मात्रा में फाइबर होता है जो वजन घटाने में फायदेमंद (कंटोला के फायदे) हो सकता है

कंटोला पाचन के लिए फायदेमंद होता है, इसके सेवन से कब्ज और अन्य पाचन समस्याओं से राहत मिलती है

ककोड़ा का पोषक महत्व:-

ककोरा सब्जी सेहत का खजाना है। ये सब्जी शरीर को मजबूत करने के साथ ही मल्टी विटामिन्स भी पहुंचाती है। काकाेरा का लोग सब्जी नहीं औषधि मानते हैं। आम भाषा में इसका नाम वन करेला भी है। इस एक सब्जी में विटामिन बी 12 से लेकर विटामिन डी, कैल्शियम, जिंक, कॉपर और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं।

ककोरा इन बीमारियों में फायदा पहुंचाता है
ककोरा आपको कई तरह की बीमारियों से भी बचाता है. आयुर्वेद में भी ककोरा का बहुत महत्व है:-

1 ककोरा खाने से सिरदर्द, बालों का झड़ना, कान दर्द, खांसी, पेट का इंफेक्शन नहीं होता है.

2 ककोरा खाने से बवासीर और पीलिया जैसी बीमारियां भी दूर हो जाती हैं.

3 इसे खाने से डायबिटीज में भी बहुत फायदा मिलता है. इससे ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रहता है.

4 बारिश में होने वाले दाद- खास, खुजली से भी ककोरा फायदा पहुंचाता है.

5 ककोरा का फायदा लकवा, सूजन, बेहोशी और आंखों की समस्या होने पर भी किया जाता है.

6 बुखार आने पर भी आप ककोरा खा सकते हैं.

7 ब्लडप्रेशर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचाने में मदद करता है.

यदि आपके पास ककोड़ा के बारे में उपर्युक्त जानकारी के अलावा अन्य कोई जानकारी है तो प्लीज शेयर करें

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Tonk Road
Jaipur
302001

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Tuesday 10am - 6pm
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