15/07/2026
बहुत ही दुखद!
विनम्र श्रद्धांजलि 💐
बाराबंकी। पापा, मेरा आखिरी बार चेहरा देख लीजिए, अब मैं मरने जा रहा हूं... मोबाइल स्क्रीन की दूसरी तरफ से आए इन शब्दों ने सेवानिवृत्त पिता के पैरों तले से जमीन खिसका दी। वह फोन पर चीखते रहे, गिड़गिड़ाते रहे और बेटे को रोकने के लिए मिन्नतें करते रहे, लेकिन बेटे के कानों तक उस बेबस बाप की आवाज नहीं पहुंच सकी और शिक्षक सुभाषकर तिवारी (32) ने फंदा लगाकर जान दे दी।
सुभाषकर तिवारी बहराइच के प्राथमिक विद्यालय बरौलिया, जरवल में सहायक अध्यापक थे। उनकी पत्नी छाया तिवारी भी बहराइच में ही शिक्षिका हैं। पिता बृजकिशोर तिवारी जिला सांख्यिकी अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। पूरा परिवार लखनऊ के चिनहट में रहता है।
सुभाषकर ने हाल ही में रामनगर के मोहल्ला धमेड़ी द्वितीय में नया मकान बनवाया था। कुछ दिनों में गृह प्रवेश होना था। इसके लिए खरीदारी भी पूरी हो चुकी थी और ज्यादातार सामान लखनऊ स्थित
बहराइच में थी तैनाती, चिनहट में रहता है पूरा परिवार
आवास पर रखा था। पिछले दो दिनों से सुभाषकर नए मकान में अकेले रह रहे थे।
सोमवार सुबह करीब 8:50 बजे सुभाषकर ने पिता को वीडियो कॉल की। कहा... पापा, अब मैं जीना नहीं चाहता। मरने जा रहा हूं... आप अपना ख्याल रखना। यह सुनते ही पिता फफक पड़े और बेटे को मनाते रहें। इसी बीच सुभाषकर ने कमरे में फंदा लगा लिया।
पिता ने तत्काल मोहल्ले के लोगों को सूचना दी। पुलिस पहुंची तो मकान अंदर से बंद मिला। पुलिसकर्मी छत पर चढ़े। जाल तोड़कर रस्सी के सहारे भीतर उतरे और शव को फंदे से नीचे उतारा। सीएचसी में मौत की पुष्टि कर दी गई। एसएचओ अरुण प्रताप सिंह ने बताया कि मौके से सुसाइड नोट नहीं मिला है। जांच में पता चला कि सिद्धार्थनगर में तैनाती के दौरान और बाद में लखनऊ में भी सुभाषकर आत्महत्या का प्रयास कर चुके थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट व अन्य साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। सुभाषकर अपने पीछे पत्नी, चार वर्षीय पुत्र विभव और नौ वर्षीय पुत्री भाग्या को छोड़ गए हैं। परिजनों को भी नहीं पता कि हंसते-खेलते परिवार के बीच सुभाषकर ने दुनिया छोड़ने का फैसला क्यों कर लिया?