जन सवाल

जन सवाल आपका सवाल, हमारी जिम्मेदारी।
सच, तथ्य और जनहित की बात।

18/03/2026

मेरे गांव में मुस्लिम भाईयों की जनसंख्या लगभग एक हजार के आसपास होगी
पर वो कभी जब गांव चौपाल में मिलते हैं तों मुझे कभी यह महसूस ही नहीं होता है कि यह मुस्लिम है में हिन्दू हूं
पर जब सोशल मीडिया पर यह नफरत भरा माहौल देखता हूं तों सोचता हूं कि भावना पनपती कंहा से हैं

07/03/2026

T20 WORLD CUP FINAL
🇮🇳 INDIA vs 🇳🇿 NEW ZEALAND
कौन बनेगा चैंपियन?
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07/03/2026

एंटेबे ऑपरेशन: जब 4000 किमी दूर जाकर बंधकों को बचाया गया
इतिहास में कई ऐसे सैन्य अभियान हुए हैं जो साहस, रणनीति और तेज फैसलों के कारण हमेशा याद रखे जाते हैं। ऐसा ही एक ऑपरेशन था Operation Entebbe, जिसे दुनिया आज भी सबसे साहसी रेस्क्यू मिशनों में गिनती है।
विमान अपहरण से शुरू हुई कहानी
27 जून 1976 को Air France का एक विमान Tel Aviv से Paris जा रहा था। बीच रास्ते में आतंकवादियों ने इस विमान को हाईजैक कर लिया।
इस विमान में लगभग 248 यात्री और 12 क्रू मेंबर सवार थे। अपहरण करने वाले आतंकवादी फिलिस्तीनी संगठन और जर्मन चरमपंथियों से जुड़े थे।
विमान को मजबूरन अफ्रीकी देश Uganda के Entebbe Airport पर उतारा गया।
तानाशाह का समर्थन
उस समय युगांडा में Idi Amin की तानाशाही सरकार थी।
कहा जाता है कि इदी अमीन ने आतंकवादियों को समर्थन दिया और बंधकों को एयरपोर्ट के पुराने टर्मिनल में रखा गया।
आतंकवादियों की मांग थी कि इजरायल अपने कई कैदियों को रिहा करे, वरना वे बंधकों को मार देंगे।
बंधकों की छंटनी
कुछ दिनों बाद आतंकवादियों ने यात्रियों को दो हिस्सों में बांट दिया।
जिन यात्री यहूदी या इजरायली नहीं थे, उन्हें छोड़ दिया गया।
लेकिन इजरायली और यहूदी यात्रियों को वहीं बंदी बनाकर रखा गया।
अब स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी थी।
इजरायल का साहसी फैसला
लगभग 4000 किलोमीटर दूर बैठे इजरायल ने फैसला किया कि वह आतंकवादियों के सामने झुकेगा नहीं।
इजरायल ने एक गुप्त सैन्य मिशन तैयार किया। इस मिशन का नाम था Operation Entebbe।
रात का हमला
3 जुलाई 1976 की रात इजरायल के कमांडो विमानों में बैठकर चुपचाप युगांडा पहुंचे।
उन्होंने एयरपोर्ट पर उतरते ही कुछ ही मिनटों में आतंकवादियों पर हमला कर दिया।
इस ऑपरेशन का नेतृत्व Yonatan Netanyahu कर रहे थे।
कमांडो ने तेजी से कार्रवाई करते हुए लगभग सभी बंधकों को बचा लिया।

03/03/2026

🌺🪔 रंगों का पर्व – होली की हार्दिक शुभकामनाएँ 🪔🌺

आप सभी प्रदेशवासियों एवं देशवासियों को
होली के पावन पर्व की मंगलमय बधाई।
यह होली आप सभी के जीवन में
सद्भाव, एकता, भाईचारा और नई ऊर्जा का संचार करे।
समाज में प्रेम, सौहार्द और सकारात्मक बदलाव के रंग भरें।
आइए, नफरत को मिटाकर
विकास, संवाद और विश्वास के रंगों से
एक बेहतर समाज का निर्माण करें।
🎨 सुरक्षित होली • स्वच्छ होली • सद्भावपूर्ण होली 🎨
— जन सवाल

28/02/2026

👨‍👦 किसी भी बालक की सफलता के पीछे एक पिता का संघर्ष छिपा होता है
कहते हैं कि हर सफल इंसान के पीछे किसी न किसी का हाथ होता है। अक्सर हम माँ के त्याग की बातें करते हैं, जो बिल्कुल सही है… लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि किसी भी बालक की सफलता के पीछे उसके पिता का मौन संघर्ष भी छिपा होता है।
पिता वो इंसान है जो खुद धूप में जलता है, ताकि उसका बेटा या बेटी छांव में रह सके।
वो अपने सपनों को पीछे रख देता है, ताकि उसके बच्चे अपने सपनों को पूरा कर सकें।
जब बच्चा छोटा होता है, तो उसे शायद यह समझ नहीं आता कि जो स्कूल की फीस समय पर जमा हो जाती है, जो किताबें हर साल नई आ जाती हैं, जो साइकिल से शुरू होकर एक दिन बाइक और फिर गाड़ी तक पहुंच जाती है… उसके पीछे किसी के पसीने की कीमत लगी होती है।
वो पसीना पिता का होता है।
पिता अक्सर ज्यादा बोलते नहीं हैं।
वो अपनी थकान को मुस्कान के पीछे छिपा लेते हैं।
घर की परेशानियां बाहर ही छोड़ आते हैं, ताकि बच्चों की हंसी में कोई कमी न आए।
कई बार पिता अपनी जरूरतों को टाल देते हैं।
पुरानी शर्ट सालों पहन लेते हैं, लेकिन बेटे की यूनिफॉर्म नई दिलाते हैं।
खुद की दवाई देर से लेते हैं, पर बच्चे की कोचिंग फीस समय से भरते हैं।
बच्चा जब पहली बार गिरकर उठना सीखता है, तो पीछे से पकड़ने वाला हाथ अक्सर पिता का होता है।
और जब वही बच्चा जिंदगी की बड़ी दौड़ में जीतता है, तो सबसे पीछे खड़ा होकर ताली बजाने वाला भी पिता ही होता है।
पिता का प्यार अक्सर शब्दों में नहीं होता, वह जिम्मेदारियों में दिखता है।
वह “मैं तुमसे प्यार करता हूँ” नहीं कहते, लेकिन हर दिन अपने कर्मों से यह साबित करते हैं।
जब कोई बेटा या बेटी मंच पर खड़े होकर अपनी सफलता की कहानी सुनाता है, तो उसके पीछे उन अनगिनत रातों की कहानी होती है जब पिता ने ओवरटाइम किया…
उन अधूरे सपनों की कहानी होती है जो पिता ने अपने बच्चों के लिए छोड़ दिए।
सच तो यह है कि पिता एक मजबूत दीवार की तरह होते हैं।
जब तक दीवार खड़ी रहती है, घर सुरक्षित रहता है।
और जब हम बड़े होकर पीछे मुड़कर देखते हैं, तब समझ आता है कि उस दीवार में कितनी दरारें थीं — जिन्हें पिता ने कभी हमें दिखने नहीं दिया।
हर सफलता के पीछे एक संघर्ष होता है,
और हर संघर्ष के पीछे एक पिता खड़ा होता है।
इसलिए अगर आज आप सफल हैं,
तो एक बार अपने पिता की आंखों में देखिए…
शायद वहां आपको गर्व के साथ-साथ वो सुकून भी मिलेगा,
जो सिर्फ एक पिता को मिलता है —
जब उसका बच्चा उससे आगे निकल जाता है।
🙏 अपने पिता को आज धन्यवाद जरूर कहें।
क्योंकि उनकी खामोशी में ही आपकी कामयाबी की सबसे बड़ी कहानी छिपी है।

🗳️ चुनाव से पहले सपने… चुनाव के बाद “आप कौन?”चुनाव आते ही देश का माहौल बदल जाता है।गली-गली में मंच, लाउडस्पीकर, झंडे और ...
24/02/2026

🗳️ चुनाव से पहले सपने… चुनाव के बाद “आप कौन?”
चुनाव आते ही देश का माहौल बदल जाता है।
गली-गली में मंच, लाउडस्पीकर, झंडे और वादों की बरसात शुरू हो जाती है।
नेता जी मंच पर खड़े होकर कहते हैं —
“हम 15 लाख देंगे!”
“30 लाख नौकरियाँ देंगे!”
“सब कुछ फ्री कर देंगे!”
भीड़ तालियाँ बजाती है।
लोग उम्मीदों की थाली सजाने लगते हैं।
हर चेहरे पर एक सपना होता है — “शायद इस बार कुछ बदल जाए…”
लेकिन…
🎭 चुनाव के बाद का सीन
वही नेता, वही जनता…
बस संवाद बदल जाता है।
जनता पूछती है —
“नेता जी, हमारा क्या हुआ?”
और जवाब आता है —
“आप कौन? पहली बार देख रहे हैं आपको!”
यही इस कार्टून की असली ताकत है।
दो तस्वीरें…
पहले वादों की बारिश।
फिर पहचानने से इनकार।
🤔 सवाल सिर्फ नेताओं से नहीं…
क्या गलती सिर्फ नेताओं की है?
या हम भी हर बार
वादों के मीठे जाल में फँस जाते हैं?
हम भावनाओं में वोट देते हैं,
तथ्यों को भूल जाते हैं।
जुमलों को याद रखते हैं,
जवाबदेही को नहीं।

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