The Astrologer - Vedic Way

The Astrologer - Vedic Way Its all about your future , Peace of mind, to know it, avoid or cure it. all is in your hand
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22/04/2020

काली मिर्च के औषधीय, वास्तु और ज्योतिषीय उपयोग - भाग - 2- काली मिर्च के कुछ टोटके और उपाय - Uses Of Black Pepper, FOR PROSPERITY, In ASTROLOGY & VASTU - BLACK PEPPER TO STRENGTHEN, OR PACIFY PLANETS - Part-2 :

नोट : हमने एक नई श्रृंखला शुरू की है. पहले हमने कपूर के औषधीय और दूसरे भाग में, कपूर के ज्योतिषीय व वास्तु से जुड़े लाभ बताये. परसों हमने भाग- 1 में काली-मिर्च के दैनिक घरेलू और औषधीय प्रयोग बताए. आज भाग 2 में देखिये, इसके वास्तु और ज्योतिषीय उपयोग. ऐसे ही, हम लाल-मिर्च, इलाइची, लौंग, नमक, प्याज़, लहसून, गुग्गुल, लोबान, हींग और अन्य कई ऐसे प्राकृतिक रोज़ाना प्रयोग के पदार्थों के बारे में लिखेंगे.

1. काली मिर्च के वास्तु और ज्योतिषीय उपयोग/ टोटके और उपाय :
ज्योतिष अनुसार, ऐसे प्रयोग बताने वाले हैं, जिनको करने के बाद, आपकी जिंदगी में रुके हुए हर काम प्रारंभ हो जाएंगे, संकटों से मुक्ति मिल जाएगी और धन की कमी भी दूर हो जाएगी। कुछ आसान उपायों से आप न केवल कष्टों से छुटकारा पा सकते हैं, बल्कि आप अपने भाग्य में सकारात्मक परिवर्तन लाकर, मालामाल बन सकते हैं.

2. i) ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, काली मिर्च शनि का प्रतीक है। यदि, शनि आपका शत्रु, मारक, या बाधक ग्रह है, शनि की साढे साती/अढैया चल रही है, या बीमार हैं, तो काले कपड़े में काली मिर्च और पैसे बांधकर दान करें। इससे शनि का प्रकोप कम हो जाता है।
ii) पर, यदि आपकी कुंडली यही मुश्किलें हैं, पर शनि आपका मित्र, सयाहक, या योगकारी ग्रह है, तो भोजन करते वक्त काला नमक और काली मिर्च का ही उपयोग करने का प्रयास करें। इस उपाय से शनि को बल मिलेगा, रोग और शोक दूर होंगे।

3. घर व व्यापार में धन की कमी से परेशान हैं, तो काली मिर्च के 5 दाने लें और उन्हें अपने सिर पर से 7 बार वार लें। इसके बाद, आप किसी चौराहे पर या फिर किसी सुनसान जगह पर, चारों दिशाओं में 4 दाने फेंक दें। इसके बाद, 5वें दाने को ऊपर आसमान की ओर उछाल दें। ऐसा करने के तुरंत बाद घर की ओर वापिस चल दें, गलती से भी रास्ते में पीछे की ओर पलटकर न देखें और न ही कहीं और जाएँ। इस उपाय से अचानक धन प्राप्ति के योग बनते हैं।

4. यदि आप व्यापार के किसी काम लिए बाहर जाना है, तो काली मिर्च को दरवाजे पर रखें और जाते समय इस पर पैर रख कर निकले, सफलता मिलेगी। बाहर निकलने के बाद आपको दोबारा किसी भूली-बिसरी चीजों के लिए घर में उसी समय प्रवेश नहीं करना है, बल्कि उस कार्य पर जाकर ही लौटना है.

5. काली मिर्च के 8 दाने ‘ऊं क्लीं’ बीज मंत्र का जप करते, हुए परिवार के सदस्यों के सिर पर घुमाकर दक्षिण दिशा में घर से बाहर फेंक दें, शत्रु शांत हो जाएंगे। अगर किसी बुरी नजर के कारण आपकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है, तो वह दोष भी दूर हो जाएगा।

6. काली मिर्च के 7-8 दाने लेकर उसे घर के किसी कोने में दिए में रखकर जला दें। इस उपाय से घर में बीमारी पैदा करने वाली ऊर्जा का नाश होता है।

7. 5 ग्राम हींग और 5 ग्राम कपूर के साथ 5 ग्राम काली मिर्च को मिलाकर मिश्रण बना लें। फिर, इसकी राई के बराबर गोलियां बना कर, उन्हें छह भागों में बांट लें और तीन दिन तक सुबह और शाम को जलाएं। घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाएगी। इस उपाय से यदि किसी की बुरी नजर के कारण आपकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है, तो वह दोष भी दूर हो जाता है। (इन गोलियां का सेवन करने से उल्टी एवं दस्त भी बंद हो जाते हैं)।

8. अगर आप धनवान बनना चाहते हैं, तो आप अपने पर्स में हमेशा पांच काली मिर्च जरूर रखिये.

9. हर गुरूवार, सुबह पांच काली मिर्च को पीले वस्त्र के साथ किसी गरीब को दान दें, बढ़िया जीवन साथी मिलेगा.

10. रोज सुबह, सूरज भगवान को एक तांबे के लोटे में जल भरके उसमें चार काली मिर्च डाला जल चढ़ाये, आपके घर पर कभी भी बुरी चीजों का साया नहीं पड़ेगा.

नोट : i) यह उपाय मौलिक रूप से हमारे अपने लिखे हुए नहीं हैं, नेट लिंक्स से ही लिए हुए हैं, पर इन्हें हमने अपने अनुभव और बहुत से लोगों से मिले 'फीडबैक' के अनुसार संशोधित किया है. आप को किस पर विश्वास करना है, या कौन सा उपाय करना है, यह आप के विवेक के ऊपर है.
ii) जैसा कि माना जाता है, काली-मिर्च शनि का प्रतीक माना जाता है. अब शनि को बल देकर उसे सशक्त बनाना है, या उसे उपायों आदि से शान्त करना है, यह व्यक्ति की कुण्डली पर ही निर्भर रहता है. कोई भी उपाय करते समय यह बात ध्यान में रखनी चाहिए !
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आप का आज का दिन मंगलमयी हो - आप स्वस्थ रहे, सुखी रहे - इस कामना के साथ।

22/04/2020

किन चीजों में कंजूसी नहीं करनी चाहिए, बल्कि दिल खोलकर करने चाहियें ? - WHICH ARE THE ACTS, IN WHICH ONE SHOULD NOT BE A MISER, INSTEAD, SHOULD BE LARGE-HEARTED :

एक नीति श्लोक के जरिए चाणक्य ने बताया है, कि किन चीजों में कंजूसी नहीं करनी चाहिए। आचार्य कहते हैं, कि कुछ काम दिल खोलकर करने चाहिए।

कौन-से हैं ये काम और क्या हैं इन्हें करने के लाभ, आइए जानते हैं :
मीठी वाणी - यानी सभी के साथ प्यार से बात करना। इस काम में कभी भी कंजूसी नहीं करनी चाहिए। प्यार से बात करने पर आपकी अपनी ही लोकप्रियता में वृद्धि होती है।
दान देना - हर धर्म में दान करने और जरूरतमंदों की मदद करने की बात कही गई है। कहते हैं कि सुपात्र को दान करने से धन-संपदा में कभी कमी नहीं आती बल्कि ऐसे दान से धन वृद्धि होती है।
ज्ञान लेने में - ज्ञान प्राप्ति में कभी भी कंजूसी नहीं करनी चाहिए और न ही किसी को ज्ञान देने में। अगर हमारी मदद से किसी को जीवन में नई राह मिल जाए तो यह पुण्य का काम है।
काम करने में - हमें कभी भी काम करने से मन नहीं चुराना चाहिए। आचार्य कहते हैं कि लगातार मेहनत करने से हम कार्यों में निपुण होते जाते हैं।
खाना खिलाने में - भूखा व्यक्ति है, जिसके बारे में आपको पता है तो उसे भोजन अवश्य कराना चाहिए। ऐसा करने से प्रसन्नता और पुण्य दोनों में वृद्धि होती है।

(साभार : श्री Sunil Mishra, पूर्व self employed - Quora)
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22/04/2020

किन चीजों में कंजूसी नहीं करनी चाहिए, बल्कि दिल खोलकर करने चाहियें ? - WHICH ARE THE ACTS, IN WHICH ONE SHOULD NOT BE A MISER, INSTEAD, SHOULD BE LARGE-HEARTED :

एक नीति श्लोक के जरिए चाणक्य ने बताया है, कि किन चीजों में कंजूसी नहीं करनी चाहिए। आचार्य कहते हैं, कि कुछ काम दिल खोलकर करने चाहिए।

कौन-से हैं ये काम और क्या हैं इन्हें करने के लाभ, आइए जानते हैं :
मीठी वाणी - यानी सभी के साथ प्यार से बात करना। इस काम में कभी भी कंजूसी नहीं करनी चाहिए। प्यार से बात करने पर आपकी अपनी ही लोकप्रियता में वृद्धि होती है।
दान देना - हर धर्म में दान करने और जरूरतमंदों की मदद करने की बात कही गई है। कहते हैं कि सुपात्र को दान करने से धन-संपदा में कभी कमी नहीं आती बल्कि ऐसे दान से धन वृद्धि होती है।
ज्ञान लेने में - ज्ञान प्राप्ति में कभी भी कंजूसी नहीं करनी चाहिए और न ही किसी को ज्ञान देने में। अगर हमारी मदद से किसी को जीवन में नई राह मिल जाए तो यह पुण्य का काम है।
काम करने में - हमें कभी भी काम करने से मन नहीं चुराना चाहिए। आचार्य कहते हैं कि लगातार मेहनत करने से हम कार्यों में निपुण होते जाते हैं।
खाना खिलाने में - भूखा व्यक्ति है, जिसके बारे में आपको पता है तो उसे भोजन अवश्य कराना चाहिए। ऐसा करने से प्रसन्नता और पुण्य दोनों में वृद्धि होती है।

(साभार : श्री Sunil Mishra, पूर्व self employed - Quora)
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13/07/2015

सदा उनके कर्जदार रहिये जो आपके लिए कभी खुद का वक्त नहीं देखता है,
और
सदा उनसे वफ़ादार रहिये जो व्यस्त होने के बावजूद भी आपके लिए वक़्त निकालता है।
👉💎 फलदार पेड़ और गुणवान व्यक्ति ही झुकते है ,
सुखा पेड़ और मुर्ख व्यक्ति कभी नहीं झुकते।
👉💎 पानी मर्यादा तोड़े तो "विनाश"
"और"
वाणी मर्यादा तोड़े तो "सर्वनाश"
इसलिए हमेशा अपनी वाणी पर संयम रखो।

09/07/2015

मोटापा एवं अनेक रोगों से मुक्त होने का अचूक उपाय...!

मेथी दाना -250 ग्राम ,
अजवाइन-100 ग्राम ,
काली जीरा-50 ग्राम ।

उपरोक्त तीनो चीज़ों को साफ़ करके हल्का सा सेंक लें ,फिर तीनों को मिलाकर मिक्सर मेंइसका पॉवडरबना लें और कांच की किसी शीशी में भर कर रख लें । रात को सोते समय 1/2 चम्मच पॉवडर एक गिलास कुनकुने पानी के साथ नित्य लें ,इसके बाद कुछ भी खाना या पीना नहीं है ।इसे सभी उम्र के लोग ले सकते हैं

फायदा पूर्ण रूप से 80-90 दिन में हो जायेगा ।

लाभ :-

इस चूर्ण को नित्य लेने से शरीर के कोने -कोने में जमा पड़ी सभी गंदगी (कचरा )मल और पेशाब द्वारा निकलजाता है ,

फ़ालतू चर्बी गल जाती है ,

चमड़ी की झुर्रियां अपने आप दूर हो जाती है ,

और शरीर तेजस्वी और फुर्तीला होजाता है ।

अन्य लाभ इस प्रकार हैं ----------

1. गठिया जैसा ज़िद्दी रोग दूर हो जाताहै ।

2. शरीर की रोग प्रतिकारक शक्ति को बढ़ाता है ।

3. पुरानी कब्ज़ से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है ।

4. रक्त -संचार शरीर में ठीक से होने लगता है ,शरीर की रक्त -नलिकाएं शुद्ध हो जाती हैं ,रक्त में सफाई और शुद्धता की वृद्धि होती है ।

5. ह्रदय की कार्य क्षमता में वृद्धिहोती है ,कोलेस्ट्रोलकम होता है ,जिस से हार्ट अटैक का खतरा नहीं रहता |

6. हड्डियां मजबूत होती हैं ,कार्य करने की शक्तिबढ़ती हैं ,स्मरण शक्ति में भी वृद्धि होतीहै ।थकान नहीं होती है ।

7. आँखों का तेज़ बढ़ता है ,बहरापन दूर होता है ,बालों का भी विकास होता है,दांत मजबूत होते हैं ।

8. भूतकाल में सेवन की गयी एलोपैथिकदवाओं के साइड -इफेक्ट्स से मुक्ति मिलतीहै ।

9. खाना भारी मात्रा में या ज्यादाखाने के बाद भी पच जाता है (इसका मतलब ये नहीं है कि आप जानबूझ कर ज्यादा खा ले) ।

10. स्त्रियों का शरीर शादी के बादबेडौल नहीं होता ,शेप में रहता है ,,शादी के बाद होने वालीतकलीफें दूर होती हैं ।

11. चमड़ी के रंग में निखार आता है ,चमड़ी सूख जाना ,झुर्रियां पड़ना आदि चमड़ी के रोगों से शरीर मुक्त रहता है ।

12. शरीर पानी ,हवा ,धूपऔर तापमान द्वारा होने वाले रोगों से मुक्त रहता है

13. डाइबिटीज़ काबू में रहती है ,चाहें तोइसकी दवा ज़ारी रख सकते हैं।

14. कफ से मुक्ति मिलती है ,नपुंसकता दूर होती है,,व्यक्ति का तेज़ इस से बढ़ता है ,जल्दी बुढ़ापा नहीं आता ,। उम्र बढ़ जाती है |

15. कोई भी व्यक्ति ,किसी भी उम्र का हो ,इस चूर्ण का सेवन कर सकता
है,मात्रा का ध्यान रखें ।

09/07/2015

मंदिर जाएं तो परिक्रमा और ये काम जरूर करें

हम जब मंदिर जाते हैं तो पूजा अर्चना के साथ ईश्वर की परिक्रमा भी करते हैं। परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु भगवान का ध्यान करते हैं और प्रतिमा की पीठ के पास अपनी मनोकामना कहते हैं। माना जाता है कि इससे भगवान शीघ्र ही उसकी इच्छा पूरी करते हैं। इसके अलावा मंदिर जाने पर हम क्या ऐसा करें कि हमें बेहतर फल मिले।
ब्रह्मांड में विभिन्न ग्रह-उपग्रह अपने पथ पर परिक्रमा करते हैं जिससे दिन-रात, ऋतु-माह बदलते हैं, सृष्टि का संतुलन बना रहता है। साथ ही वे इससे ऊर्जा भी प्राप्त करते हैं। परिक्रमा के संबंध में एक पौराणिक कथा भी कही जाती है। कहते हैं कि जब गणेश और कार्तिकेयजी के बीच यह प्रश्न उठा कि दोनों में से श्रेष्ठ कौन है, तो वे कार्तिकेय संपूर्ण ब्रह्मांड की परिक्रमा करने निकले और गणेशजी ने वहीं माता पार्वती और भगवान शिव की परिक्रमा कर ली।
प्रतियोगिता में गणेशजी विजयी हुए। भगवान की परिक्रमा करने मात्र से संपूर्ण ब्रह्मांड की परिक्रमा, तीर्थों का फल मिल जाता है। इसलिए मंदिर में भगवान के दर्शन-पूजन के साथ ही परिक्रमा करने का भी विधान है।
परिक्रमा के दौरान मन में शुभ भावों पर ही मनन करना चाहिए। बहुत तेजी से या बहुत धीमी गति से परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। परिक्रमा पथ में सांसारिक विषयों से संबंधित बातें नहीं करनी चाहिए। पथ में पीछे की ओर लौटना, हंसी-मजाक करना या उच्च स्वर में नहीं बोलना चाहिए।परिक्रमा के दौरान अपने इष्ट देव के मंत्र का जाप करने से उसका शुभ फल मिलता है। हर परिक्रमा के बाद देव प्रतिमा को प्रणाम करें। परिक्रमा के बाद भगवान को पीठ नहीं दिखानी चाहिए। भगवान गणपति 1 परिक्रमा, विष्णुजी 3 परिक्रमा, मां दुर्गा 6 और भगवान शिव आधी परिक्रमा से भी प्रसन्न हो जाते हैं।
जब हम मंदिर जाते है तो हम भगवान की परिक्रमा जरुर लगाते है | पर क्या कभी हमने ये सोचा है कि देव मूर्ति की परिक्रमा क्यों की जाती है? शास्त्रों में लिखा है जिस स्थान पर मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई हो, उसके मध्य बिंदु से लेकर कुछ दूरी तक दिव्य प्रभा अथवा प्रभाव रहता है | यह निकट होने पर अधिक गहरा और दूर दूर होने पर घटता जाता है, इसलिए प्रतिमा के निकट परिक्रमा करने से दैवीय शक्ति के ज्योतिर्मंडल से निकलने वाले तेज की सहज ही प्राप्ति हो जाती है |
कैसे करें परिक्रमा…
देवमूर्ति की परिक्रमा सदैव दाएं हाथ की ओर से करनी चाहिए क्योकि दैवीय शक्ति की आभामंडल की गति दक्षिणावर्ती होती है । बाएं हाथ की ओर से परिक्रमा करने पर दैवीय शक्ति के ज्योतिर्मडल की गति और हमारे अंदर विद्यमान दिव्य परमाणुओं में टकराव पैदा होता है, जिससे हमारा तेज नष्ट हो जाता है | जाने-अनजाने की गई उल्टी परिक्रमा का दुष्परिणाम भुगतना पडता है |
किस देव की कितनी परिक्रमा करनी चाहिये ?
वैसे तो सामान्यत: सभी देवी-देवताओं की एक ही परिक्रमा की जाती है परंतु शास्त्रों के अनुसार अलग-अलग देवी-देवताओं के लिए परिक्रमा की अलग संख्या निर्धारित की गई है। इस संबंध में धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान की परिक्रमा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और इससे हमारे पाप नष्ट होते है | सभी देवताओं की परिक्रमा के संबंध में अलग-अलग नियम बताए गए हैं |
– महिलाओं द्वारा “वटवृक्ष” की परिक्रमा करना सौभाग्य का सूचक है |
– “शिवजी” की आधी परिक्रमा की जाती है | शिव जी की परिक्रमा करने से बुरे खयालात और अनर्गल स्वप्नों का खात्मा होता है। भगवान शिव की परिक्रमा करते समय अभिषेक की धार को न लांघे |
– “देवी मां” की एक परिक्रमा की जानी चाहिए |
– “श्रीगणेशजी और हनुमानजी” की तीन परिक्रमा करने का विधान है | गणेश जी की परिक्रमा करने से अपनी सोची हुई कई अतृप्त कामनाओं की तृप्ति होती है | गणेशजी के विराट स्वरूप व मंत्र का विधिवत ध्यान करने पर कार्य सिद्ध होने लगते हैं |
– “भगवान विष्णुजी” एवं उनके सभी अवतारों की चार परिक्रमा करनी चाहिए | विष्णु जी की परिक्रमा करने से हृदय परिपुष्ट और संकल्प ऊर्जावान बनकर सकारात्मक सोच की वृद्धि करते हैं |
6. – सूर्य मंदिर की सात परिक्रमा करने से मन पवित्र और आनंद से भर उठता है तथा बुरे और कड़वे विचारों का विनाश होकर श्रेष्ठ विचार पोषित होते हैं | हमें भास्कराय मंत्र का भी उच्चारण करना चाहिए, जो कई रोगों का नाशक है | जैसे सूर्य को अर्घ्य देकर “ॐ भास्कराय नमः” का जाप करना | देवी के मंदिर में महज एक परिक्रमा कर नवार्ण मंत्र का ध्यान जरूरी है; इससे सँजोए गए संकल्प और लक्ष्य सकारात्मक रूप लेते हैं |
परिक्रमा के संबंध में नियम
परिक्रमा शुरु करने के पश्चात बीच में रुकना नहीं चाहिए; साथ ही परिक्रमा वहीं खत्म करें जहां से शुरु की गई थी | ध्यान रखें कि परिक्रमा बीच में रोकने से वह पूर्ण नही मानी जाती |
– परिक्रमा के दौरान किसी से बातचीत कतई ना करें | जिस देवता की परिक्रमा कर रहे हैं, उनका ही ध्यान करें |
- उलटी अर्थात बाये हाथ की तरफ परिक्रमा नहीं करनी चाहिये |
इस प्रकार देवी-देवताओं की परिक्रमा विधिवत करने से जीवन में हो रही उथल-पुथल व समस्याओं का समाधान सहज ही हो जाता है | इस प्रकार सही परिक्रमा करने से पूर्ण लाभ की प्राप्ती होती है |
इसके अलावा मंदिर में जाएं तो ये काम जरूर करें
अगर आप मंदिर जाते हैं तो वहां मूर्ति के सामने जरूर बैठना चाहिए। यह अपने मन को शांत और वश में करने का भी एक तरीका है। मंदिर में सुंदर प्रतिमाएं इसीलिए बनाते हैं ताकि वहां बैठने के बाद अच्छा लगे।
मंदिर में हीरे, पन्ने, स्वर्ण और चांदी के साथ। वे फल फूल, अगरबत्ती, मिठाई इत्यादि मूर्ति के सामने रखते हैं। ताकि मन और सारी इंद्रियां ईश्वर पर केंद्रित हो जाएं। एक बार मन ठहर जाता है, वे आपको आंखें बंद कर के ध्यान करने को कहते हैं। यह दूसरा कदम है। ध्यान में आप भगवान को स्वयं में पाते हैं। एक बहुत सुंदर श्रुति है वेदांत में।
जब कोई व्यक्ति पूछता है भगवान कहां है? बुद्धिमान व्यक्ति उत्तर देते हैं कि मनुष्यों के लिए प्रेम ही भगवान है। कम बुद्धिमान उन्हें लकड़ी और पत्थर की मूर्तियों में देखते हैं, पर बुद्धिमान लोग भगवान को स्वयं में देखते हैं। चाहे पूजा में बहुत से विस्तृत कार्य बताए जाते हैं, हमें उन सबको करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि जब हम ध्यान करते हैं तो हमें दिखता है कि सब कुछ वह ईश्वर ही है।
प्राचीन परंपराओं को बनाए रखने के लिए हमें यह सब रीतियां और रस्में करनी चाहिए। इस लिए, हमें नियम से दिया जलाना चाहिए, भगवान को पुष्प अर्पित करने चाहिए। साथ ही मंदिर में जाएं तो भगवान के दर्शन के दौरान वहां ठहरना चाहिए और ध्यान लगाना चाहिए।

08/07/2015

ऐसे दूर करें वास्तु दोष :

वास्तु न सिर्फ आपके घर को बल्कि आपके जीवन को भी प्रभावित करता है। जीवन में आने वाली परेशानियों का कारण घर का वास्तु दोष भी हो सकता है।
नीचे लिखे कुछ सरल उपाय कर इन वास्तु दोषों को दूर किया जा सकता है-
1- स्वस्तिक, मंगल कलश, ओम, 786 आदि मंगल चिन्हों की तस्वीरें घर में अवश्य लगाएं। इनसे घर में सुख-शांति बढ़ती है।
2- पूर्वजों के चित्र, देवी-देवताओं के साथ कभी न लगाएं।
3- शयन कक्ष में सदैव सुंदर, कलात्मक फूलों या हंसते हुए बच्चों की तस्वीरें लगाने से नींद भी बेहतर आती है।
4- डाइनिंग हॉल की दीवारों का रंग हल्का व शांत व शीतलता प्रदान करने वाला हो। भारी सजावट से भी बचें।
5- डाइनिंग हॉल की दीवारों पर फल-फूलों व प्राकृतिक दृश्यों के अच्छे चित्र लगाए जा सकते हैं।
6 – अनुपयोगी वस्तुएं घर में न रखें। उन्हें घर से निकालते रहें।
7- यदि जनरेटर सेट अथवा इन्वर्टर ईशान में हो तो उसे वहां से हटाकर आग्नेय कोण में स्थापित करें।

07/07/2015

बिना कसरत किए मोटापा कम करने के ये नायाब नुस्खें

मोटापा शरीर के लिए बीमारी का घर होता है। मोटापा शरीर में जमा होनेवाली अतिरिक्त चर्बी होती है जिससे वजन बढ़ जाता है और यही मोटापा कई बीमारियों का घर बनता है। मोटापे का मतलब है, शरीर में बहुत ज्यादा चर्बी होना। जबकि ज्यादा वजनदार होने का मतलब है, वजन का सामान्य से ज्यादा होना।

जिस व्यक्ति का BMI यानी बॉडी मास इंडेक्स 25 से 29.9 के बीच होता है, उसे डॉक्टरी भाषा में ओवरवेट या ज्यादा वजनदार कहा जाता है। दूसरी ओर जब BMI 30 या उससे अधिक होता है, तो इसे मोटापा कहा जाता है। मोटापा घटाने के लिए खान-पान में सुधार जरूरी है।

कुछ प्राकृतिक चीजें ऐसी हैं, जिनके सेवन से वजन नियंत्रित रहता है। मोटापा कम करने के लिए यूं तो खानपान पर कंट्रोल करना बहुत जरूरी है। कुछ कसरत और योग के आसनों को भी नियमित कर मोटापा पर काबू पाया जा सकता है। साथ ही कुछ प्राकृतिक चीजों को रोजाना अपनाकर आप मोटापा कम कर सकते हैं। यदि आप वजन कम करने के लिए बहुत मेहनत नहीं कर पाते हैं तो ये छोटे-छोटे उपाय आपके बढ़ते वजन को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

-खाना खाने के बाद गुनगुने पानी को पीने से वजन तेजी से घटता है। लेकिन खाना खाने के लगभग पौन या एक घंटे बाद एक ग्लास पानी का सेवन करना चाहिए।

-कच्चे ये पके हुए पपीत का सेवन खूब करना चाहिए। इससे शरीर में अतिरिक्त चर्बी नहीं जमती और वजन तेजी से घटता है।

-दही का सेवन करने से शरीर की फालतू चर्बी घट जाती है। छाछ का भी सेवन दिन में दो-तीन बार करना लाभदायक है।

-छोटी पीपल का बारीक चूर्ण पीसकर उसे कपड़े से छान लें। यह चूर्ण तीन ग्राम रोजाना सुबह के वक्त छाछ के साथ लेने से बाहर निकला हुआ पेट अंदर हो जाता है।

-गरम पानी में नींबू का रस और शहद घोलकर रोज सुबह खाली पेट पिएं। इससे पेट सही रहेगा और मोटापा दूर होगा।

-ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो मोटापा घटाने के साथ-साथ चेहरे की झुर्रियों को भी दूर करता है। ग्रीन टी को बिना चीनी के पीने से इसका फायदा जल्द होता है।

-एप्पल साइडर वेनिगर को पानी या जूस के साथ मिलाकर पीने से मोटापा कम होता है। यह पाचन तंत्र को सही रखता है और कोलेस्ट्रॉल भी कम करता है।

- एक रिसर्च के मुताबिक वजन कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका मिर्च खाना है। हरी या काली मिर्च में पाए जाने वाले तत्व कैप्साइसिन से भूख कम होती है। इससे ऊर्जा की खपत भी बढ़ जाती है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है।

-रोज सुबह-सुबह एक गिलास ठंडे पानी में दो चम्मच शहद मिलाकर पिएं। इस घोल को पीने से शरीर से वसा की मात्रा कम होती है।

- रोज पत्तागोभी का जूस पिएं। पत्तागोभी में चर्बी घटाने के गुण होते हैं। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म सही रहता है।

- सुबह उठते ही 250 ग्राम टमाटर का रस 2-3 महीने तक पीने से वसा में कमी होती है।

- एक चम्मच पुदीना रस को 2 चम्मच शहद में मिलाकर लेते रहने से मोटापा कम होता है।

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