03/01/2026
हरी बाबू ने सुबह अपनी बीवी को बुलाया और गमगीन लहजे में बोले - "कमला, मैं मर गया हूं। कल रात को किसी वक्त मेरे प्राण निकल गये। लेकिन जो हुआ सो हुआ, अब तू घर बार सम्भालना और बच्चों का ख्याल रखना ।"
"अरे, पागल हो गये हो क्या?" बीवी कलप कर बोली-"जो ये वाही तबाही बक रहे हो ?"
"मैं सच कह रहा हूं, कमला, पिछली रात मेरा काम हो गया। अब तू दो काम और करना। एक तो सुनिश्चित करना कि 'आशिक का जनाजा है, जरा धूम से निकले', और दूसरे, जितनी जल्दी हो सके, दोबारा शादी कर लेना ।"
"अरे, तुम मरे कहां हो जो..."
"ऊपर बैडरूम में मरा न रात को ! अरे मेरी बन्नो, ऐसा होना कोई बड़ी बात नहीं; अक्सर हो जाता है। किसी के भी साथ हो जाता है।"
"तुम यूं नहीं मानोगे। मैं डाक्टर को बुलाती हूं।"
"अब वो भी कुछ नहीं कर सकेगा क्योंकि..."
"मैं बुलाती हूं।"
डाक्टर आया तो वो उससे बोली "डाक्टर साहब, ये पागल हो गये हैं। इनका मगज हिल गया है। कहते हैं रात को मर गये। भगवान के लिये कुछ करो इनका ।"
"अभी करता हूं।" - डाक्टर बोला और फिर हरी बाबू से सम्बोधित हुआ - "जानते हो न कि मुर्दे में से खून नहीं निकलता ?"
"हां" - हरी बाबू बोले "मैं क्या, सारा जमाना जानता है।"
डाक्टर ने एक सुई जोर से उसके हाथ में चुभाई तो फौरन हाथ में से बूंद बूंद करके खून टपकने लगा।
"देखा ?" - डाक्टर विजेता के से स्वर में बोला ।
"देखा ।" - हरी बाबू बोले ।
"समझा ?"
"समझा।"
"क्या ?"
"यही कि जमाना जो जानता है, गलत जानता है। मुर्दे में से भी खून निकलता है, बराबर निकलता है।" 😂😂😂😂😂😂