Champaran Natural Farms

Champaran Natural Farms Plz feel free to visit the farm randomly.

To serve the society with organically grown crops and products, we are growing the food using Desi Cows and concepts based on VRIKAHAURVEDA and many more Ancients Literature.

01/02/2026

Save the soil....Nurture the family....Feed the society n build a healthy nation......Chemical free farming

चंपारण नेचुरल फार्म के Natural & Organic सब्जी इकाई मॉडल की जांच हेतु Shri Amit Kumar,  ADC & Nodle officer - Natural Fa...
01/02/2026

चंपारण नेचुरल फार्म के Natural & Organic सब्जी इकाई मॉडल की जांच हेतु Shri Amit Kumar, ADC & Nodle officer - Natural Farming (West Champaran) का आना हुआ।


आपके द्वारा सिर्फ इतना कहना कि "आपका फार्म काफी mentained है" मेरी इस रसायनमुक्त यात्रा की सार्थकता को और बल ही नहीं प्रदान किया बल्कि और संकल्पित किया।

Department of Agriculture, Government of Bihar District Administration, West Champaran, Bettiah Ram Kripal Yadav Shivraj Singh Chouhan Indian Council of Agricultural Research DM West Champaran 𝑭𝒐𝒍𝒍𝒐𝒘𝒆𝒓𝒔. उन्नत कृषि अभियान परिषद-unnat krishi abhiyan parishad

आप है श्रीमान Dr. M Tirumalai। आप मूलतः दक्षिण भारत के पांडिचेरी से हैं। आज आपका आगमन तो स्थानीय चीनी मिल के तरफ से गन्न...
28/01/2026

आप है श्रीमान Dr. M Tirumalai। आप मूलतः दक्षिण भारत के पांडिचेरी से हैं। आज आपका आगमन तो स्थानीय चीनी मिल के तरफ से गन्ना की रोपाई का अवलोकन करने के लिए हुआ था लेकिन आपको जैसे हीं पता चला कि हम प्राकृतिक तरीके से बिना जहर और कीटनाशक के सब्जियों की खेती भी करते है तो Plant Pathologist होने के नाते आपका शुभागमन हमारे Vegetable Unit के बैगन section में हुआ। आपने वहां बनाए हुए विभिन्न जैव उत्पाद जैसे दशपर्णी अर्क, विभिन्न जैव रसायन (Bio Enzymes) के साथ साथ गौ कृपा अमृतम के प्रयोग को देखा। इसके साथ आपने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए जैसे किस तरह से स्टिकी ट्रैप बनाए, कैसे कीट पतंगों को ट्रैप करने के लिए पानी और लाइट का प्रयोग करें। आपने हमारे खेती का आधार हमारी गौ माताओं को भी देखा।

We were really honoured to have you at our farm sir.


Department of Agriculture, Government of Bihar Shivraj Singh Chouhan District Administration, West Champaran, Bettiah Ram Kripal Yadav
Department of Agriculture, Government of Bihar Shivraj Singh Chouhan

छत से थाली तक !छत पर बागवानी करें और पाएँ 75% तक सरकारी  #अनुदान!अब हर छत बने  #हरियाली की पहचान।Ram Kripal Yadav Inform...
16/01/2026

छत से थाली तक !
छत पर बागवानी करें और पाएँ 75% तक सरकारी #अनुदान!
अब हर छत बने #हरियाली की पहचान।

Ram Kripal Yadav
Information & Public Relations Department, Government of Bihar
Ministry of Agriculture & Farmer’s Welfare, Government of India
Department of Agriculture, Government of Bihar



#बागवानी

11/01/2026

निराई गुड़ाई का बेहतरीन उपाय....100% रसायनमुक्त व्यवस्था।

  भारत एक देवतुल्य भूमि यूं ही नहीं है------ स्वावलंबी भारत..सशक्त भारत...आधुनिक भारत।🙏भारत माता की जय🙏Department of Agr...
04/01/2026


भारत एक देवतुल्य भूमि यूं ही नहीं है------

स्वावलंबी भारत..सशक्त भारत...आधुनिक भारत।
🙏भारत माता की जय🙏
Department of Agriculture, Government of Bihar District Administration, West Champaran, Bettiah Ram Kripal Yadav Shivraj Singh Chouhan

गेहूं (Gehu) की फसल में सरसों की खली (Mustard Cake) का उपयोग करना   एक बहुत ही सस्ता और कारगर उपाय है। यह न केवल पौधों क...
03/01/2026

गेहूं (Gehu) की फसल में सरसों की खली (Mustard Cake) का उपयोग करना

एक बहुत ही सस्ता और कारगर उपाय है। यह न केवल पौधों को पोषण देता है, बल्कि मिट्टी की सेहत को भी सुधारता है।
गेहूं की फसल में इसके मुख्य फायदे, उपयोग का तरीका और इसके पोषक तत्वों का विवरण नीचे दिया गया है:
1. पोषक तत्वों का खजाना (Rich in Nutrients)
सरसों की खली एक जैविक खाद (Organic Fertilizer) है। इसमें गेहूं के लिए जरूरी सभी मुख्य तत्व पाए जाते हैं:
• नाइट्रोजन (Nitrogen): लगभग 4-5% (पौधे की बढ़वार और हरियाली के लिए)।
• फॉस्फोरस (Phosphorus): लगभग 1.5-2% (जड़ों के विकास के लिए)।
• पोटाश (Potassium): लगभग 1-1.5% (दाने की मजबूती और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए)।
• सल्फर (Sulphur): यह सबसे महत्वपूर्ण है। खली में सल्फर प्रचुर मात्रा में होता है, जो गेहूं के दानों में चमक और प्रोटीन की मात्रा बढ़ाता है।
2. गेहूं में सरसों की खली के विशेष फायदे
• धीमी गति से पोषण (Slow Release Fertilizer):
रासायनिक खाद (जैसे यूरिया) का असर जल्दी खत्म हो जाता है, लेकिन सरसों की खली धीरे-धीरे मिट्टी में घुलती है। इससे फसल को लंबे समय तक (बुवाई से कटाई तक) पोषण मिलता रहता है।
• जड़ों का विकास (Root Development):
यह मिट्टी को भुरभुरा बनाती है, जिससे गेहूं की जड़ें गहराई तक जाती हैं और पौधा आंधी या बारिश में जल्दी गिरता नहीं है।
• कीड़ों और रोगों से बचाव (Pest & Disease Control):
सरसों की खली की गंध तीखी होती है। इसके इस्तेमाल से मिट्टी में दीमक (Termites), निमाटोड (Nematodes) और अन्य हानिकारक फंगस का खतरा कम हो जाता है।
• पाले से सुरक्षा (Protection from Frost):
सरसों की खली की तासीर गर्म होती है। सर्दियों में (दिसंबर-जनवरी) जब पाला पड़ता है, तो यह मिट्टी का तापमान संतुलित रखने में मदद करती है, जिससे फसल पाले से बची रहती है।
• दानों की चमक और वजन:
इसमें मौजूद सल्फर, जिंक और अन्य माइक्रोन्यूट्रिएंट्स गेहूं की बालियों को भरा हुआ बनाते हैं, जिससे दानों का वजन बढ़ता है और पैदावार (Yield) में सुधार होता है।
3. उपयोग करने का सही तरीका (How to Use)
आप इसे दो तरीकों से इस्तेमाल कर सकते हैं:
1. बुवाई के समय (Basal Dose):
• खेत तैयार करते समय सरसों की खली का पाउडर बना लें।
• इसे मिट्टी में मिला दें।
• मात्रा: लगभग 20-30 किलो प्रति एकड़।
2. पहली या दूसरी सिंचाई पर (Top Dressing):
• अगर आपने बुवाई के समय इसका इस्तेमाल नहीं किया है, तो पहली सिंचाई से पहले खली का बारीक पाउडर यूरिया या मिट्टी के साथ मिलाकर छिड़क दें और फिर पानी लगा दें।

Department of Agriculture, Government of Bihar District Administration, West Champaran, Bettiah Shivraj Singh Chouhan Indian Council of Agricultural Research Ram Kripal Yadav

फर्क समझना होगा....वापसी करनी पड़ेगी....समय बहुत भयावह आ गया है।आधुनिकता के भेड़ चाल में हम कहां जा रहे हैं।
30/12/2025

फर्क समझना होगा....वापसी करनी पड़ेगी....समय बहुत भयावह आ गया है।

आधुनिकता के भेड़ चाल में हम कहां जा रहे हैं।

 #कृषि 2 किलो दही 25 किलो यूरिया के बराबर करता है काम!   हाल के दिनों में यूरिया की किल्लत से परेशानी की खबर देश के हर ज...
21/12/2025

#कृषि
2 किलो दही 25 किलो यूरिया के बराबर करता है काम!


हाल के दिनों में यूरिया की किल्लत से परेशानी की खबर देश के हर जिले से आ रही है। घंटों मशक्कत के बाद भी किसानों को 1-2 बोरी यूरिया मिलने में परेशानी आ रही है। इस तरह के परेशानियों का सामना करने वाले सभी किसान भाइयों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है।

दरअसल खेती में दही का उपयोग करके आप यूरिया सहित अन्य उर्वरकों का दाम बचा सकते हैं।

दही का उपयोग करने के कई लाभ हैं।
दही के उपयोग से खेती से लागत का 95 प्रतिशत बचता है और कृषि उत्पादन में कम से कम 15 प्रतिशत की वृद्धि होती है। दही के फायदों को देखकर, कई किसानों ने इसकी ओर रुख किया है। खासकर जब से इसका प्रयोग भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और गुजरात के कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा किया गया है। दही का उपयोग अब खेत में किया जा रहा है।

● पानी की बचत

अगर आप अपने खेतों में दही का उपयोग करते हैं तो
15 दिनों तक सिंचाई करने की आवश्यकता नहीं है, इसलिए यह प्रति एकड़ 1000 रुपये बचाता है। रासायनिक उर्वरक की प्रति एकड़ लागत रु 1100 है, लेकिन दही की कीमत 110 रुपये प्रति 2 किलो दूध है। कीटनाशकों पर 1500 रुपये प्रति एकड़ खर्च नहीं होता है। इस प्रकार, एक को प्रति एकड़ 3600 रुपये खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन केवल 155 रुपये की मामूली लागत पर दहीं से काम चलता है।

● दही कैसे बनाये

दही बनाने के लिए मिट्टी के बर्तन में देशी गाय का दो लीटर दूध डालें। दो किलो दही में एक तांबे का टुकड़ा या एक तांबे का चम्मच डुबोएं और इसे 8 से 15 दिनों के लिए ढककर छाया में रखें। इसमें हरे रंग का तार होगा। तांबे या पीतल को धोकर दही में मिलाएं। 5 लीटर मिश्रण बनाने के लिए दो किलो दही में 3 लीटर पानी मिलाएं। एक एकड़ में एक पंप द्वारा पानी का छिड़काव किया जाता है। फिर 1 एकड़ में फसल पर पानी छिड़का जाता है। ऐसा करने से पौधे 25 से 45 दिनों तक हरे रहेंगे। नाइट्रोजन की अब जरूरत नहीं है,फसल हरी हो जाएगी।

● 2 किलो दही से 25 किलो यूरिया बचता है.

उत्तर बिहार में 1 लाख किसान यूरिया की जगह दही का इस्तेमाल करते हैं। अनाज, सब्जी और बागों के उत्पादन में 25 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है। 30 मिलीलीटर दही का मिश्रण एक लीटर पानी में डाला जाता है। दिल्ली के आसपास, 9 साल से यूरिया के बजाय दही का उपयोग किया जाता है।

● सभी फसलों में उपयोगी.

यह सभी प्रकार की फसलों जैसे मक्का, गेहूं, आम, केला, सब्जियां, लीची, धान, गन्ना पर छिड़का जा सकता है।

● गार्डन.

बगीचे में फूल आने से 25 दिन पहले दही पानी का उपयोग किया जाता है। यह बगीचों को फास्फोरस और नाइट्रोजन प्रदान करता है। फसल पर जैविक पदार्थ तैयार हो जाएगा। सभी फल एक समान आकार के होते हैं।

● जहरीला मक्खन.

छाछ से निकलने वाला मक्खन किट नियंत्रक के रूप में काम करेगा। जहरीले मक्खन में वर्मीकम्पोस्ट डाल कर पौधे की जड़ों में रगड़ें। कीड़े और कीट चले जाएंगे। विषाक्त पदार्थों के बारे में पता होना महत्वपूर्ण है।

● निस्संक्रामक.

अगर ये किसान इसमें दही के अलावा मेथी का पेस्ट या नीम का तेल मिलाते हैं और इसे कीटनाशक के रूप में स्प्रे करते हैं, तो फसल को फंगस नहीं लगेगा। ऐसा करने से नाइट्रोजन प्रदान करता है, कीटों को समाप्त करता है और अनुकूल कीटों से बचाता है।

● मिट्टी में खाद.

दही का उपयोग मिट्टी में भी किया जा सकता है। 2 किलो दही प्रति एकड़ के हिसाब से लगायें। मिट्टी में माइक्रोबियल दर अधिक है। ऐसा करने से सभी फसलों में उत्पादन 25-30 प्रतिशत बढ़ सकता है। दही का उपयोग पंचगव्य में किया जाता है।

पानी की खपत कम हो जाती है
गर्मी में दही में 300 ग्राम और पानी में 300 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर 300 ग्राम सेंधा नमक छिड़कने से फसल को 15 दिनों तक पानी की जरूरत नहीं होती है।

● कृषि अनुसंधान संस्थान.

जैसा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने मार्च 2017 में इस नवाचार को मान्यता दी थी, मुजफ्फरपुर के किसानों को दही की खेती करके सम्मानित किया गया था।

भारत में, सालाना 500 लाख टन उर्वरक का उपयोग किया जाता है। उपर के अनुभव किसानो का है। कृषि अधिकारी से जानकर ही इसे उपयोग करना चाहीए।
Information & Public Relations Department, Government of Bihar Department of Agriculture, Government of Bihar District Administration, West Champaran, Bettiah Shivraj Singh Chouhan @

किसान हित हेतु सराहनीय पहल...
20/12/2025

किसान हित हेतु सराहनीय पहल...

19/12/2025

The actual health partner

प्राकृतिक तरीके से बिना किसी कीटनाशक एवं रासायनिक खाद का प्रयोग किया "बैगन" जैसी फसल की सफल खेती का हार्वेस्टिंग अपडेट.…

Information & Public Relations Department, Government of Bihar Department of Agriculture, Government of Bihar District Administration, West Champaran, Bettiah Shivraj Singh Chouhan Nitish Kumar Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority Indian Council of Agricultural Research Ram Kripal Yadav

19/12/2025

The Actual Health Partner...


गैर कीटनाशक एवं रासायनिक खाद के बैगन जैसी फसल की सफल खेती।


Information & Public Relations Department, Government of Bihar District Administration, West Champaran, Bettiah Shivraj Singh Chouhan Department of Agriculture, Government of Bihar
उन्नत कृषि अभियान परिषद-unnat krishi abhiyan parishad Nitish Kumar Ram Kripal Yadav Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority Indian Council of Agricultural Research

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