25/12/2025
सामाजिक उन्नति: एकजुटता से शिखर तक का सफर
सीमित संसाधनों से संघर्ष करके आगे बढ़ने वाले हममें से कई लोग, जब शिक्षा और मेहनत से स्थिर नौकरी या व्यवसाय प्राप्त करते हैं, तो अपनी उपलब्धियों पर गर्व महसूस करते हैं – और यह गर्व जायज भी है। लेकिन कभी-कभी यह गर्व अपने मूल समाज या रिश्तेदारों की तुलना में खुद को श्रेष्ठ साबित करने का रूप ले लेता है, जो हमें पीछे छोड़ जाता है।
जबकि सच्चाई यह है कि हम जिन संस्थानों या बड़े व्यवसायों में कार्यरत हैं, वहाँ हमारी हैसियत अभी भी सीमित है – ऊपरी स्तर के निर्देशों का पालन, कभी-कभी अनुचित दबाव – ये सब हमारे स्वाभिमान को चुनौती देते हैं।
कल्पना कीजिए, यदि हमारे समुदाय के लोग इन व्यवस्थाओं के शीर्ष पर मजबूत उपस्थिति रखते, तो कितना कुछ बदल जाता! सरकारी आंकड़े इस असमानता को स्पष्ट करते हैं: केंद्र सरकार के सचिव और संयुक्त सचिव स्तर पर SC/ST/OBC की भागीदारी मात्र 4-12% के आसपास है, जबकि ग्रुप A सेवाओं में भी शीर्ष पर यह बहुत कम।
निजी क्षेत्र में तो बड़े कॉर्पोरेट बोर्डों और CEOs में 90% से अधिक ऊपरी वर्गों का प्रभुत्व है – टॉप 200 कंपनियों में OBC/SC/ST का स्वामित्व लगभग नगण्य।
सदियों से कुछ वर्गों का इन क्षेत्रों में मजबूत प्रभाव रहा है, और उनके समुदाय के लोग निचले स्तरों पर भी बेहतर अवसर पाते हैं।
लेकिन यह स्थिति स्थायी नहीं है। बदलाव संभव है – और हम ही इसे ला सकते हैं! अपनी छोटी सफलताओं पर रुकने की बजाय, इस सत्य को स्वीकार करें कि हमारी यात्रा अभी अधर में है।
अपने बच्चों को प्रेरित करें कि वे शीर्ष की तैयारी करें – IAS, IPS, कॉर्पोरेट लीडरशिप, या बड़े उद्यमिता के लिए। जो प्रतिभाशाली युवा हमारी पृष्ठभूमि से हैं, उन्हें सामूहिक रूप से सहयोग दें – मेंटरिंग, संसाधन साझा करना, नेटवर्क बनाना। जब हम एक-दूसरे को उठाएंगे, तो हमारा समुदाय उन निर्णयकारी पदों पर पहुंचेगा जहाँ आज कमी है।
याद रखें, सच्ची प्रगति व्यक्तिगत नहीं, सामूहिक होती है।
दूसरों को नीचा दिखाकर अहंकार की तुष्टि क्षणिक है, लेकिन एकजुट होकर शिखर छूना – यह विरासत बनती है।
आइए, हम संकल्प लें कि अपनी सफलता को सीढ़ी बनाएं, न कि दीवार खड़ी करें,तभी आने वाली पीढ़ियां हमें गर्व से याद करेंगी!