क्रांतिकारी किसान यूनियन-ਕੇ ਕੇ ਯੂ-K.k.u

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क्रांतिकारी किसान यूनियन-ਕੇ ਕੇ ਯੂ-K.k.u About educating Agriculture community for getting more income

22/02/2026
12/02/2026

आज देशव्यापी हड़ताल के दौरान अलीगढ़ में क्रांतिकारी किसान यूनियन की तरफ़ से शशिकांत की अगुवाई में मोदी और ट्रंप का पुतला दहन किया गया।

12/02/2026

ਕ੍ਰਾਂਤੀਕਾਰੀ ਕਿਸਾਨ ਯੂਨੀਅਨ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸੂਬਾ ਆਗੂ ਦਲਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਸੇਰਖਾਂ ਸੰਬੋਧਨ ਕਰਦੇ ਹੋਏ

28/01/2026

क्या आपको नहीं लगता कि आजकल देश में विवाद "पैदा" किए जा रहे हैं, ताकि असली सवालों की "हत्या" की जा सके?
ज़रा क्रोनोलॉजी समझिए:
* मदारी का खेल (ध्यान भटकाना):
अचानक यूजीसी (UGC) का कोई नया विवादास्पद फरमान आता है या शंकराचार्य जी को कुंभ में स्नान करने से रोकने/टोकने जैसी खबर हेडलाइन बन जाती है।
पूरा देश भावुक हो जाता है। सोशल मीडिया पर जंग छिड़ जाती है—धर्म, संस्कृति और अपमान की बहस शुरू हो जाती है। आपकी चाय की चर्चा का विषय बदल जाता है।
* असली खेल (चुपचाप समझौता):
ठीक इसी शोर-शराबे के बीच, जब आपकी नज़रें टीवी डिबेट पर होती हैं, सरकार पीछे के दरवाजे से विदेशों के साथ संधियां (Foreign Deals) कर रही होती है।
* FTA (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) की शर्तें तय हो रही हैं।
* खेती और एआई (AI) पर विदेशी कंपनियों का कंट्रोल पक्का किया जा रहा है।?
* निजीकरण की नई फाइलों पर हस्ताक्षर हो रहे हैं।?
यह महज संयोग नहीं, प्रयोग है!
90 के दशक को याद कीजिए—तब भी देश को 'धार्मिक उन्माद' में उलझाकर WTO (विश्व व्यापार संगठन) और वैश्वीकरण का जुआ हमारे गले मढ़ दिया गया था। आज हम उसी आर्थिक गुलामी के कर्जदार हैं।
आज फिर वही स्क्रिप्ट दोहराई जा रही है:
* विषय बदला है: तब मुद्दा कुछ और था, आज मुद्दा 'यूजीसी' और 'शंकराचार्य' है।
* मकसद वही है: FTA और डिजिटल गुलामी पर जनता की चुप्पी।
चुभते हुए सवाल:
* क्या शंकराचार्य जी का अपमान या यूजीसी का विवाद सिर्फ एक "लाल कपड़ा" है जिसे दिखाकर जनता को सांड की तरह भड़काया जा रहा है, ताकि पीछे से 'व्यापारी' अपना काम कर जाएं?
* हम यूजीसी के सिलेबस पर तो लड़ रहे हैं, लेकिन FTA के सिलेबस (शर्तों) पर सवाल क्यों नहीं पूछ रहे जो हमारी आने वाली पीढ़ियों को गुलाम बनाएगा?
सावधान!
जब तक हम भावनात्मक मुद्दों के "झुनझुने" से खेलते रहेंगे, तब तक ये "सौदागर" हमारी ज़मीन और ज़मीर, दोनों का सौदा विदेशी बाज़ार में कर चुके होंगे।?
आंखें खोलिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए! 👁️🚫🇮🇳

06/11/2025

ਮੇਵਾਤ ਵਿੱਚ ਕ੍ਰਾਂਤੀਕਾਰੀ ਕਿਸਾਨ ਯੂਨੀਅਨ ਦੇ ਕੌਮੀ ਪ੍ਰਧਾਨ ਡਾਕਟਰ ਦਰਸ਼ਨ ਪਾਲ ਕਿਸਾਨ ਪੰਚਾਇਤ ਨੂੰ ਸੰਬੋਧਨ ਕਰਦੇ ਹੋਏ

04/11/2025

लखनऊ में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शेलेंद्र दूबे जी और संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ नेता डॉ. दर्शन पाल जी की मीटिंग 02/11/2025 सम्पन्न हुई।

आज लखनऊ में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शेलेंद्र दूबे जी और संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ नेता डॉ. दर्...
03/11/2025

आज लखनऊ में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शेलेंद्र दूबे जी और संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ नेता डॉ. दर्शन पाल जी की संयुक्त मीटिंग सम्पन्न हुई।
बैठक में बिजली के निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 के ख़िलाफ़ साझा रणनीति पर चर्चा हुई।
दोनों नेताओं ने स्पष्ट कहा कि —
“बिजली जनता की है, निजी घरानों की नहीं!
किसानों और बिजली कर्मियों की एकता से ही जनता का हक़ बचाया जा सकता है।”
मीटिंग में यह निर्णय लिया गया कि आने वाले दिनों में
बिजली कर्मचारी, किसान संगठन और मज़दूर संगठन एक साथ मिलकर
देशभर में जनजागरण अभियान चलाएँगे और निजीकरण के विरोध में
एक बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
यह संघर्ष होगा —
जनता बनाम निजीकरण की नीतियों के ख़िलाफ़!
किसान और बिजली कर्मियों की एकता के साथ!


02/11/2025

क्रांतिकारी किसान यूनियन की बेठक आज़ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में

क्रांतिकारी किसान यूनियन की बैठक उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ मेंयूपी में किसान आंदोलन की मजबूती के लिए एकजुटता के साथ आ...
02/11/2025

क्रांतिकारी किसान यूनियन की बैठक उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में
यूपी में किसान आंदोलन की मजबूती के लिए एकजुटता के साथ आगे बढेंगें
लखनऊ में यूनियन की राज्य कमेटी बैठक संपन्न हुई। बैठक में 8 जिलों के 53 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. दर्शन पाल की विशेष उपस्थिति रही।
बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष रामनयन यादव ने की। सभी जिलों से आए प्रतिनिधियों ने जिलावार यूनियन और किसान आंदोलन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की।
डा. दर्शन पाल ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि 26 नवंबर को फसल का पूरा दाम और संपूर्ण कर्जा माफी की मांग को लेकर चल रहे किसान आंदोलन के पांच साल पूरे जायेंगें। मौजूदा भाजपा-आरएसएस नीत मोदी-शाह की सरकार ने किसानों के साथ वादाखिलाफी की है, इस वादाखिलाफी की सजा देने के लिए किसानों को एकजुट व्यापक की तैयारी में जुटने की जरूरत है। सरकार ने वादा किया था निजीकरण का रास्ता साफ करने वाले बिजली संशोधन बिल को किसानों को भरोसे में लिए बिना नहीं लाया जाएगा। बावजूद इसके सरकार बिजली संशोधन बिल 2025 पेश कर चुकी। जिसका देश भर के किसान-मजदूर मिलकर विरोध करेंगें और सड़कों पर आंदोलन करेंगें।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यूनियन 10 नवंबर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर धान की खरीद होने वाली कालाबाजारी खुलासा करेगी। जैसा कि यूपी में धान का समर्थन मूल्य 2369 रूपये होने के बावजूद 1600 से 1800 रूपये में खरीदा जा रहा है।
26 नवंबर को कमिश्नरों के माध्यम से एसकेएम की ओर से जारी ज्ञापन सौंपा जाएगा। इससे पूर्व जिला मुख्यालयों पर गांव-गांव जन अभियान चलाकर आंदोलन के लिए समर्थन जुटाते हुए वाहन रैली आयोजित की जाएंगी।
बैठक के दौरान ही विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे भी डा. दर्शन पाल के लखनऊ आगमन की खबर सुनकर मिलने पहुंचे। उन्होंनें बिजली संशोधन बिल 2025 , यूपी में बिजली के निजीकरण और स्मार्ट मीटर योजना की वापसी को लेकर चल रहे आंदोलन में किसानों की कर्मचारियों के साथ एकजुटता बढ़ाने पर जोर दिया।
बैठक में राष्ट्रीय महासचिव शशिकांत अलीगढ़, राष्ट्रीय संयुक्त सचिव बलवंत यादव, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष नगेन्द्र चौधरी, प्रदेश उपाध्यक्ष रामरतन यादव, उपेन्द्र कुमार, प्रदेश कोषाध्यक्ष एकादशी यादव, लखनऊ प्रभारी दिनेश रावत के अलावा सभी जिलाध्यक्ष एवं प्रभारी शामिल रहे।
जारीकर्ता
रामनयन यादव, प्रदेश अध्यक्ष

Address

900 Adarsh Colony Near Prem Nagar
Patiala
147004

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