Rahul Kumar Bharat

Rahul Kumar  Bharat अपनी तन्हाई की पलकें भिगो लू पहले,
फिर ग़ज़ल तुझ पे लिखूं, बैठ के रो लू पहले.

12/10/2023

मोहब्बत चाहिए नहीं हम अकेले ठीक हैं हमारे साथ दोस्त है वही ठीक है

09/10/2023

तुझे भुलाने के लिए तेरी यादों को भुलाना होगा बेवफ़ा है तु

05/10/2023

मां की आंखों का तारा था मैं पिता का सहारा था मैं

05/10/2023

meri zindagi railway station Jaisi ho gayi hai

03/10/2023

जिसने जैसा समझा वैसा हूं मैं वह वह ‌वह बाकि मेरा रब जनता है कैसा हु मै

02/10/2023

मैंने भगवान को नहीं देखा है पर अपने मां को दिखा है मेरी तकलीफ में मुझसे ज्यादा उन्हें तड़पते हुए देखा है

01/10/2023

बुरे वक्त पर छोड़कर जा रही हो जाओ शौख से जाओ पर वादा करता हूं अपनी मेहनत

30/09/2023

कोई तलवार नहीं जिसे कोई ढाल रोक दे मां बाप का आर्शीवाद है मुझपे

30/09/2023

आज के दुनिया में कोई इज्जत नहीं पैसा है तो इज्जत है तो भाई पैसा कमाना जरुरी है

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