18/06/2023
*आना-जाना छोड़ चुके, पर्वो से नाता तोड़ चुके रखकर पत्थर अपने दिलों पर, घर से मुख मोड़ चुके | किसका दिल करता है यारों, घर का सुख चैन गवाने को फिर भी घर हम छोड़ आए हैं, जीवन सफल बनाने को । नैन में मां की बस्ता सपना, मैं अब काबिल बन जाऊं | कर कर चिंता बूढी हो गई, कभी तो खुशियां दिखलाओ । बाप से मेरे चला ना जाता, फिर भी काम को जाता है । मेरा खर्चा भिजवाने को, रोज कमा कर लाता है | छत घर की टपक रही है, जिसके नीचे सोते हैं | जब जब बाहर हुआ मेरिट से, मुझसे ज्यादा रोते हैं पता है तुमको पता है रब को, मेहनत में मेरी कमी नहीं वो जीवन क्या जीवन है यारों, जिसमें किस्मत से ठनी नहीं |माना चलती कठिन परीक्षा, मेहनत मेरा हथियार है गुरुओं से लेकर दिक्छा, अर्जुन रण को तैयार है सब्र का मैया बांध न टूटे, गला किस्मत का घोटूगा चंद महिने वाकी है बस बन के topaz लोटुगा।।*