31/01/2026
“जो लोग बिना अन्न के जी सकते हैं, यह लेख उनके लिए नहीं है।
बाकी लोगों के लिए कल सुबह 11 बजे तय होगा कि,
बजट-26-27 में किसान बोझ है या देश की रीढ़।”
खेतों की कराह और दिल्ली की चुप्पी के बीच लिखा गया यह लेख आज के अखबार में प्रकाशित है।
पढ़िए। सोचिए। साझा कीजिए।
क्योंकि सवाल केवल बजट का नहीं,
खेती किसान के अस्तित्व का है। हमारे ही नहीं हमारे आने वाली पीढ़ियों की भोजन की थाली का है।
सादर 🙏
डॉ. राजाराम त्रिपाठी