02/04/2026
कहइ रीछपति सुनु हनुमाना।
का चुप साधि रहेहु बलवाना॥
पवन तनय बल पवन समाना।
बुधि बिबेक बिग्यान निधाना
कवन सो काज कठिन जग माही,
जो नहीं होय तात तुम पाही !
सब सुख लहै तुम्हारी सरना,
तुम रक्षक काहू को डरना।।
॥ ॐ हनुमंताय नमः ॥