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17/05/2025

कभी-कभी लगता है कि ज़िंदगी किसी पुराने कपड़े की तरह हो गई है जहाँ धागे उधड़े नहीं, लेकिन सिलाई ढीली पड़ चुकी है।
जो चीज़ें कभी चटक रंगों जैसी लगती थीं, अब फीकी नहीं हुईं, बस आँखों ने उन्हें देखना छोड़ दिया है।
हम वो पीढ़ी हैं, जिसने अलार्म से पहले जागना सीखा था, लेकिन अब नोटिफ़िकेशन के बिना दिन शुरू नहीं होता।
रिश्ते अब वाई-फ़ाई सिग्नल जैसे हैं ।कभी कनेक्टेड, कभी आउट ऑफ़ रीच।
बात करने के लिए अब बातें नहीं, टाइम स्लॉट चाहिए होता है।
“बाद में बात करते हैं” एक ऐसा जुमला बन गया है जिसमें बात कभी होती ही नहीं।
हमने काग़ज़ पर लिखना छोड़ दिया, और शायद उसी के साथ वो बातें भी जो दिल से निकलती थीं।
अब तो जज़्बात टाइप होते हैं, भेजे जाते हैं, और “seen” होकर चुप हो जाते हैं।
जिसे "ऑनलाइन" देखकर दिल धड़कता था, अब उसे "टाइपिंग..." देखकर घबराहट होती है कि कहीं कुछ ऐसा न लिख दे जो अब पढ़ा तो जाए, पर समझा न जाए।
कभी दिल करता है किसी पहाड़ी स्टेशन पर उतर जाऊँ बिना किसी प्लान के, बिना किसी रिज़र्वेशन के।
एक ऐसी जगह, जहाँ कोई मेरा इंतज़ार न कर रहा हो, और न ही कोई जवाब माँग रहा हो।
बस एक खिड़की हो, थोड़ी धूप हो, और एक कप चाय जो ठंडी होने तक कोई कुछ न पूछे।
अब लगता है कि हमें सुकून की नहीं, खालीपन की आदत हो गई है।
शांति से ज़्यादा चुप्पी रास आने लगी है।
और सबसे ज़्यादा डर अब खोने से नहीं, फिर से पाने से लगता है क्योंकि पता है, इस बार संभाल नहीं पाएँगे।
कभी किसी पुराने गाने में अचानक से अपनी ही हँसी सुनाई दे जाती है।
लगता है, जैसे वो वक़्त अब भी वहीं रुका है, हम ही आगे खिसक आए।
कोई तस्वीर देख लो, या कोई महक अचानक पास से गुज़र जाए तो दिल एक झपकी में पूरे सालों पीछे चला जाता है,
जैसे वक़्त ने कभी आगे बढ़ने ही नहीं दिया था।
कभी किसी से पूछने का मन करता है "तुम अब भी वहीं हो जहाँ मुझे छोड़ा था?"
लेकिन फिर लगता है, जवाब मिल भी गया तो क्या होगा?
अब तो अपने ही सवाल अनजाने लगते हैं, और जवाबों से ज़्यादा खामोशियाँ सच्ची लगती हैं।
शायद ज़िंदगी अब कोई तलाश नहीं रही, बस एक धीमी चलती रफ़ूगरी है, जहाँ पुराने छेद भरते-भरते हम खुद में नए बनते जा रहे हैं।
हर दिन थोड़ा-थोड़ा सी लेते हैं उन यादों की सिलाई कभी उधड़ती है, कभी सँवरती है।
और शायद यही है जीवन, एक ऐसा कपड़ा जिसे कोई और पहन नहीं सकता,लेकिन जिसे हम हर मौसम में, हर टूटन में, चुपचाप ओढ़े रहते हैं।

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