13/06/2026
सेब बागवानी पर कुठाराघात बर्दाश्त नहीं होगा!
SDM रोहड़ू के आदेश के बाद बोतल और कैनों में पेट्रोल-डीज़ल देना बंद कर दिया गया है। अब प्रशासन यह बताए कि ऐसे में सेब बागवानी कैसे चलेगी? छौहारा, रोहड़ू, जुब्बल, डोडरा-क्वार और आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था लगभग पूरी तरह से सेब बागवानी पर निर्भर है।
बागवानों द्वारा उपयोग की जाने वाली स्प्रे मशीनें, घास काटने वाली मशीनें, पावर टिलर और अन्य कृषि उपकरण पेट्रोल एवं डीज़ल से ही चलते हैं। दूरदराज़ के बगीचों तक वाहन नहीं पहुँचते, इसलिए किसान वर्षों से कैनों में ईंधन ले जाकर अपने कृषि कार्य करते रहे हैं। यदि कैनों में ईंधन देना पूरी तरह बंद कर दिया जाता है, तो इसका सीधा असर बागवानी और किसानों की आजीविका पर पड़ेगा।
हम सुरक्षा नियमों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसे निर्णय लेने से पहले जमीनी हकीकत को समझना भी आवश्यक है। किसानों और बागवानों को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के परेशानी में डालना न्यायसंगत नहीं है।
यदि यह निर्णय शीघ्र वापस नहीं लिया गया अथवा बागवानों के हित में कोई व्यावहारिक समाधान नहीं निकाला गया, तो छौहारा वैली ऐपल सोसायटी किसानों और बागवानों के हितों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरने और लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगी।
किसान और बागवान देश की रीढ़ हैं, उन पर बार-बार बोझ डालना बंद किया जाए। 🍎✊🏻