19/08/2026
🙏सुबह की शुरुआत माँ के सुन्दर दर्शन और सकारात्मक विचारों के साथ आज का अद्भुत दर्शन आपके दिन को सुखमय और शांतिपूर्ण बनाए 🙏
🛕आज की कथा माँ कामख्या के बारे में 🛕
कामाख्या मंदिर (गुवाहाटी, असम) के बारे में ऐसे कई रहस्य और अनोखे तथ्य हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं:क्या आप गए हों कामाख्या
. मंदिर में कोई मूर्ति नहीं हैकामाख्या मंदिर के मुख्य गर्भगृह में किसी भी देवी या मूर्ति की पूजा नहीं होती। यहाँ एक प्राकृतिक गुफा के भीतर पत्थर की योनि का प्राकृतिक रूप है, जिसके ऊपर से हमेशा एक प्राकृतिक झरने की जलधारा बहती रहती है। इसी की पूजा की जाती है।हर साल आषाढ़ महीने (जून) में माता कामाख्या का वार्षिक मासिक धर्म होता है। इस दौरान 3 दिनों के लिए मंदिर के कपाट पूरी तरह बंद रहते हैं।
इन 3 दिनों में मंदिर के पास से बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का पानी लाल हो जाता है।चौथे दिन जब मंदिर खोला जाता है, तो भक्तों को 'रक्त वस्त्र' (लाल कपड़ा) प्रसाद के रूप में दिया जाता है। कहा जाता है कि जब मंदिर बंद होता है, तब सफेद कपड़े को गर्भगृह में रखा जाता है, जो देवी के प्रभाव से लाल हो जाता है।
कामाख्या मंदिर को तंत्र विद्या का गढ़ माना जाता है।देश-विदेश से तांत्रिक, अघोरी और साधक यहाँ गुप्त रूप से साधना करने आते हैं।पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के 51 टुकड़े किए थे, तब यहाँ माता सती का गर्भ (योनि) गिरा था। इसलिए इसे सभी शक्तिपीठों में सबसे शक्तिशाली माना जाता है।प्राचीन काल में यहाँ पशुओं के साथ-साथ नरबलि (पुरुष बलि) दिए जाने का उल्लेख मिलता है, जिसे समय के साथ पूरी तरह बंद कर दिया गया। आज भी यहाँ केवल पुरुष पशुओं की बलि ही प्रतीकात्मक रूप से चढ़ाई जाती है; किसी भी मादा पशु की बलि यहाँ सख्त वर्जित है।कामाख्या में छोटी कन्याओं को साक्षात देवी का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि कन्या पूजन के बिना कामाख्या देवी की कोई भी पूजा या तांत्रिक साधना अधूरी मानी जाती है।मंदिर का ऐतिहासिक ढांचा 16वीं शताब्दी में कोच राजा नरनारायण द्वारा दोबारा बनवाया गया था। इसके शिखर की बनावट मधुमक्खी के छत्ते जैसी है, जो असमिया और भारतीय स्थापत्य कला का एक अद्भुत और दुर्लभ संगम प्रस्तुत करती है।
🔱हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक मंदिर की गाथा
🚩 मन की शांति और स्नातक घर्म की सुन्दर सीख
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