21/01/2026
🛑आज सवाल किसी एक हादसे का नहीं है,
आज सवाल उस सिस्टम का है जो समय पर इंसान नहीं बन पाया।🛑
"पिता की आँखों के सामने बेटा डूबता रहा, सरकार देखती रही"
आज एक पिता ज़िंदा है
लेकिन उसकी आत्मा उसी दिन मर गई,
जिस दिन उसकी आँखों के सामने उसका बेटा पानी में डूबता रहा
और पूरा सिस्टम तमाशा देखता रहा।
सोचिए उस पिता का दर्द
जो चिल्लाता रहा, गिड़गिड़ाता रहा,
“मेरे बेटे को बचा लो… कोई तो पानी में उतर जाओ
लेकिन जवाब में मिला सिर्फ़ सन्नाटा,
खामोश खड़ी वर्दी और बेबस प्रशासन।
और उस लड़के का दर्द?
जो आख़िरी सांस तक उम्मीद करता रहा
कि शायद अब कोई हाथ बढ़ेगा,
शायद अब कोई सरकार जागेगी
लेकिन नहीं।
उसे मरने के लिए छोड़ दिया गया।
ये हादसा नहीं था।
ये सरकारी नाकामी, लापरवाही और संवेदनहीन सिस्टम की हत्या थी।
जब सरकार बड़े-बड़े भाषण देती है,
जब बजट और संसाधनों की बात होती है,
तो फिर ज़रूरत के वक़्त
एक जान बचाने के लिए कोई क्यों नहीं उतरता?
अगर यही सिस्टम है,
तो आम आदमी किससे उम्मीद करे?
आज वो लड़का मरा है,
कल कोई और होगा
अगर जवाबदेही तय नहीं हुई।
👉 इस पिता को इंसाफ चाहिए।
👉 उस बेटे की मौत का जवाब चाहिए।
👉 दोषियों पर सख़्त कार्रवाई चाहिए।
MYogiAdityanath
Narendra Modi Rahul Gandhi
आज चुप रहना भी अपराध है।
अगर इंसान हैं, तो आवाज़ उठाइए।