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13/11/2025
13/11/2025
23/12/2024

_*Our next calender year is a mathematical wonder.*_

_*Interesting 2025*_

_*1) 2025, itself is a square*_

_*2) It's a product of two squares,*_
_*Viz. 9² x 5² = 2025*_

_*3) It is the sum of 3-squares,*_
_*viz. 40²+ 20²+5²= 2025*_

_*4) It's the first square after 1936*_

_*5) It's the sum of cubes, of all the single digits, from 1 to 9,*_
_*viz. 1³+2³+3³+4³+5³+6³+7³+8³+9³= 2025.*_

_*This is going to be our NEXT YEAR.*_

30/09/2024

महाभारत का युद्ध जब ख़तम हुआ तो हर तरफ लाशे बिछी थी।
लोग कहते है कि कुरुक्षेत्र की मिट्टी युद्ध में मरने वालो के खून से लाल हो गई थी।
ऐसे में बहुत सी औरते बेवा हुई और बहुत से बच्चे यतीम हुए।
बेवा हुई औरतों को उस समय कृष्ण ने अपनाकर अपना नाम दिया था।
इसी घटना कि वजह से लोग कहते फिरते है कि कृष्ण ने सोलह हजार से ज्यादा शादियां की थी।
मुझे हिन्दू धर्म में दो कैरेक्टर बहुत खूबसूरत लगते है,
एक कृष्ण और दूसरा कर्ण।
आज कृष्ण की बात करते है कर्न की फिर कभी।
कृष्ण ने लोगो को बताया कि भगवान होने के लिए भगवान जैसा बनना जरूरी नहीं है।
उनकी जिंदगी मुझे इंसानों जैसी लगती है।
उन्होंने चोरी भी की,
प्रेम भी,
छल भी,
और रक्षा भी।
माखन की हांडी में हाथ डाले मुंह के चारो तरफ माखन लगाए कृष्ण की फोटो में मुझे सिर्फ एक बच्चा नजर आता है।
किसी भी बच्चे के सामने उसकी फेवरेट चीज रख दीजिए वो भी अपना हाल वैसा ही कर लेगा जैसे श्री कृष्ण ने अपना बना रखा था।
मतलब भगवान होना कितना सिम्पल सा था कृष्ण के लिए।
भगवान होकर भी उन्होंने खुद को गलतियों से अछूता नहीं रखा।
अधर्म और धर्म की उस लड़ाई का पता कृष्ण को बहुत पहले से था।
गांधारी ने जब अपने पति धृतराष्ट्र के प्रेम में आंख पर पट्टी बांधी तो उसके कई सालो बाद उन्होंने उसे खोलने का फैसला किया।
उन्होंने दुर्योधन से कहा कि मेरे सामने निर्वस्त्र होकर आना।
कृष्ण को मालूम था कि यहां से अधर्म और धर्म की लड़ाई का पूरा किस्सा बदल सकता है।
उन्होंने दुर्योधन को समझाया कि मा है तुम्हारी ऐसे कैसे चले जाओगे?
दुर्योधन केले का पत्ता लपेटे मा के सामने हाजिर हुआ।
इस वजह से पूरा बदन वज्र का होने के बावजूद ढका हुआ हिस्सा छूट गया।
भीम और दुर्योधन की लड़ाई में शायद भीम हरा पाते दुर्योधन को,
अगर कृष्ण न बताते की वार कहा करना है।
कृष्ण को मालूम था कि वो जो कर रहे है इसकी कीमत उन्हें अपना वंश गवाकर चुकानी होगी,
क्युकी उन्हें मालूम था कि ये सब उन्हें एक दिन गांधारी के श्राप का भोगी बना देगा।
कृष्ण भगवान थे,
चाहते तो राधा से विवाह करने के लिए उन्हें दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक पाती,
लेकिन उन्हें तो प्रेम की परिभाषा लिखनी थी।
उन्हें समझाना था कि ये जो मेरे बगल में रखी मूर्ति तुम पूज रहे हो इन्हे इसका अधिकार धर्म ने नहीं,
प्रेम ने दिया है।
सुदामा बचपन में कृष्ण से छुपकर खाते थे इसलिए उन्हें दरिद्रता मिली,
कृष्ण ये बात उस वक्त भी जानते थे,
और उन्हें ये बात तब भी मालूम थी जब वो सुदामा के पाव धूल रहे थे।
पर उन्हें तो बस ये सिखाना था कि मित्रता क्या होती है।
और मित्रता निभाने के लिए भगवान होना जरूरी नहीं है।
कृष्ण सोने के पालने में नहीं पले थे,
उन्होंने पैदा होते ही यमुना की तेज धारा झेली,
बचपन उनका उसी तरह गुजरा जैसा इस दुनिया की एक बड़ी आबादी का गुजरता है।
सोने का सिंहासन उन्हें मिला नहीं उन्होंने हासिल किया था।
वो भगवान थे,
सोने के पालने में भी पल सकते थे,
गाय चराने के बजाय सोने के खिलौने से खेल सकते थे,
लेकिन उन्होंने वो चुना जो वो भगवान रहते हुए औरो के लिए चुनते है।
उन्होंने संघर्ष चुना,
और जीत कर दिखाया कि जीतते कैसे है,
क्युकी उन्हें जीवन का सार सिखाना था।
कृष्ण को पता था कि महाभारत होना तय है,
इसे कोई रोक नहीं सकता।
फिर भी वो दुर्योधन को मनाने गए।
वो चाहते तो एक दिन एक पहर एक घड़ी में महाभारत का युद्ध ख़तम हो जाता,
लेकिन उन्होंने होने दिया सब कुछ,
और अर्जुन का रथ संभाले सब कुछ देखते रहे।
उन्हें मालूम था कि ये होना जरूरी है,
क्युकी गीता का उपदेश वो अगर दरबार में देते तो उसे समझ पाना मुश्किल था।
गीता का सार समझने के लिए महाभारत का युद्ध होना जरूरी था।
उस युद्ध में युधिष्ठिर झूठ नहीं बोलना चाहते थे,
क्युकी उन्हें धर्म ज्यादा प्यारा था,
आज दुनिया उन्हें धर्म राज कहती है,
लेकिन जो कृष्ण ने किया वो अपनी प्रतिष्ठा अपने सम्मान के लिए नहीं किया,
आज आप बहुत आसानी से कह सकते है कि कृष्ण ने छल किया,
लेकिन धर्म की रक्षा के लिए कृष्ण ने वो सब किया जो जरूरी था।
मै बहुत सालों तक ये सवाल मन में लेकर घूमता रहा कि कृष्ण की मृत्यु कैसे हुई थी,
और जब पता चला तो बहुत अजीब लगा।
इतने बड़े योद्धा,
महाभारत के सारे महारथियों को बिना हथियार उठाए सिर्फ अपनी दिमाग से हराने वाले कृष्ण की मृत्यु एक बहेलिया के हाथो कैसे हो सकती है।
लेकिन फिर समझ आया,
कृष्ण अपने पूरे जीवन में भगवान बन के रहे ही नहीं,
उन्होंने सब कुछ इंसानों सा किया,
प्रेम
मित्रता
छल
युद्ध
सब कुछ इंसानों सा।
उनकी मृत्यु भी उसी तरह हुई जैसे कोई आम इंसान की होती है।
आप कृष्ण को भगवान समझकर पूज सकते है,
और कृष्ण को इंसान समझकर उनके जैसा बन भी सकते है।
कृष्ण उन दो लड़कों की दोस्ती में है जो खाते वक्त पनीर का टुकड़ा अपने दोस्त की थाली से बिना सोचे उठा लेते है।
कृष्ण उन दो लोगो के प्रेम में भी है जो बस प्रेम है और कुछ नहीं।
कृष्ण उस लड़के में भी है जिसने दुनियादारी देखकर अच्छाई छोड़कर जैसे को तैसा वाला मिजाज बना लिया है।
कृष्ण वहां भी है जो अपनी रक्षा के लिए सामने वाले से लड़ जाता है।
कृष्ण उस लड़के में भी है जो बस में चढ़ती लड़की से बेवजह चिपकता नहीं,
कृष्ण हर जगह है।
कृष्ण बहुत सिम्पल है कूल है।

(लिखने में एक गलती हुई है मुझसे,
सोलह हजार औरते बन्दी थी नरकासुर नमक राक्षस की,
उसका वध करने के बाद श्री कृष्ण ने उन्हें आज़ाद कराकर अपना नाम दिया था।

🙏🙏🙏

29/09/2024

*एक बार दशहरा बीत चुका था , दीपावली समीप थी , तभी एक दिन कुछ युवक - युवतियों की NGO टाइप टोली एक कॉलेज में आई !*

*उन्होंने छात्रों से कुछ प्रश्न पूछे ; किन्तु एक प्रश्न पर कॉलेज में सन्नाटा छा गया !*

*उन्होंने पूछा , " जब दीपावली भगवान राम के 14 वर्षो के वनवास से अयोध्या लौटने के उत्साह में मनाई जाती है , तो दीपावली पर " लक्ष्मी पूजन " क्यों होता है ? श्री राम की पूजा क्यों नही ?"*

*प्रश्न पर सन्नाटा छा गया , क्यों कि उस समय कोई सोशल मीडिया तो था नहीं , स्मार्ट फोन भी नहीं थे ! किसी को कुछ नहीं पता ! तब , सन्नाटा चीरते हुए , हममें से ही एक हाथ , प्रश्न का उत्तर देने हेतु ऊपर उठा !*

*उसने बताया कि " दीपावली " उत्सव दो युग " सतयुग " और " त्रेता युग " से जुड़ा हुआ है !"*

*" सतयुग में समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी उस दिन प्रगट हुई थी !" इसलिए " लक्ष्मी पूजन " होता है !*

*भगवान श्री राम भी त्रेता युग मे इसी दिन अयोध्या लौटे थे ! तो अयोध्या वासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था ! इसलिए इसका नाम दीपावली है !*

*इसलिए इस पर्व के दो नाम हैं , " लक्ष्मी पूजन " जो सतयुग से जुड़ा है , और दूजा " दीपावली " जो त्रेता युग , प्रभु श्री राम और दीपो से जुड़ा है !*

*हमारे उत्तर के बाद थोड़ी देर तक सन्नाटा छाया रहा , क्यों कि किसी को भी उत्तर नहीं पता था ! यहां तक कि प्रश्न पूछ रही टोली को भी नहीं !*
*बाद में पता चला , कि वो टोली आज की शब्दावली अनुसार " लिबरर्ल्स " ( वामपंथियों ) की थी , जो हर कॉलेज में जाकर युवाओं के मस्तिष्क में यह बात डाल रही थी , कि " लक्ष्मी पूजन " का औचित्य क्या है , जब दीपावली श्री राम से जुड़ी है ?" कुल मिलाकर वह छात्रों का ब्रेनवॉश कर रही थी !*

*लेकिन हमारे उत्तर के बाद , वह टोली गायब हो गई !*

*एक और प्रश्न भी था , कि लक्ष्मी और श्री गणेश का आपस में क्या रिश्ता है ?*

*और दीपावली पर इन दोनों की पूजा क्यों होती है ?*

*सही उत्तर है :*

*लक्ष्मी जी जब सागर मन्थन में मिलीं , और भगवान विष्णु से विवाह किया , तो उन्हें धन और ऐश्वर्य की देवी बनाया गया, उन्होंने धन को बाँटने के लिए मैनेजर कुबेर को बनाया !*
*कुबेर कुछ कंजूस वृति के थे ! वे धन बाँटते नहीं थे , स्वयं धन के भंडारी बन कर बैठ गए !*

*माता लक्ष्मी परेशान हो गई ! उनकी सन्तान को कृपा नहीं मिल रही थी !*

*उन्होंने अपनी व्यथा भगवान विष्णु को बताई ! भगवान विष्णु ने उन्हें कहा , कि " तुम मैनेजर बदल लो !"*

*माँ लक्ष्मी बोली : " यक्षों के राजा कुबेर मेरे परम भक्त हैं ! उन्हें बुरा लगेगा !"*

*तब भगवान विष्णु ने उन्हें श्री गणेश जी की दीर्घ और विशाल बुद्धि को प्रयोग करने की सलाह दी !*

*माँ लक्ष्मी ने श्री गणेश जी को " धन का डिस्ट्रीब्यूटर " बनने को कहा !*

*श्री गणेश जी ठहरे महा बुद्धिमान, वे बोले : " माँ, मैं जिसका भी नाम बताऊंगा , उस पर आप कृपा कर देना ! कोई किंतु , परन्तु नहीं !" माँ लक्ष्मी ने हाँ कर दी !*

*अब श्री गणेश जी लोगों के सौभाग्य के विघ्न / रुकावट को दूर कर उनके लिए धनागमन के द्वार खोलने लगे !*

*कुबेर भंडारी ही बनकर रह गए ! श्री गणेश जी पैसा प्रदान करने वाले बन गए !*

*गणेश जी की दरियादिली देख , माँ लक्ष्मी ने अपने मानस पुत्र श्री गणेश को आशीर्वाद दिया , कि जहाँ वे अपने पति नारायण के सँग ना हों , वहाँ उनका पुत्रवत गणेश उनके साथ रहें !*

*दीपावली आती है कार्तिक अमावस्या को ! भगवान विष्णु उस समय योगनिद्रा में होते हैं ! वे जागते हैं ग्यारह दिन बाद , देव उठावनी एकादशी को !*

*माँ लक्ष्मी को पृथ्वी भ्रमण करने आना होता है , शरद पूर्णिमा से दीवाली के बीच के पन्द्रह दिनों में , तो वे सँग ले आती हैं श्री गणेश जी को ! इसलिए दीपावली को लक्ष्मी - गणेश की पूजा होती है !*
🙏🌹🙏
*( यह कैसी विडंबना है , कि देश और हिंदुओ के सबसे बड़े त्यौहार का पाठ्यक्रम में कोई विस्तृत वर्णन नहीं है ? औऱ जो वर्णन है , वह अधूरा है !)*

*इस लेख को पढ़ कर स्वयं भी लाभान्वित हों , अपनी अगली पीढी को बतायें और दूसरों के साथ साझा करना ना भूलें !*

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