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 #अनसुना_पाँचवाँ_वेदक्या आप जानते हैं?परमेश्वर कबीर जी द्वारा दिए गए तत्वज्ञान यानि कबीर वाणी को ही सूक्ष्मवेद कहा जाता ...
14/07/2024

#अनसुना_पाँचवाँ_वेद
क्या आप जानते हैं?
परमेश्वर कबीर जी द्वारा दिए गए तत्वज्ञान यानि कबीर वाणी को ही सूक्ष्मवेद कहा जाता है।

 #अनसुना_पाँचवाँ_वेदवेद, गीता, पुराण, कुरआन आदि सभी सद्ग्रंथों में अधूरा ज्ञान है यही कारण है कि ये सभी सद्ग्रंथ हमें तत...
14/07/2024

#अनसुना_पाँचवाँ_वेद
वेद, गीता, पुराण, कुरआन आदि सभी सद्ग्रंथों में अधूरा ज्ञान है यही कारण है कि ये सभी सद्ग्रंथ हमें तत्त्वदर्शी संत की शरण में जाने के लिए संकेत करते हैं।जबकि पांचवें वेद सूक्ष्मवेद में अध्यात्म का सम्पूर्ण ज्ञान है।

 #अनसुना_पाँचवाँ_वेदसद्ग्रथा म अधूरा ज्ञान ह यहा कारण है कि य सभी सद्ग्रंथ हमें तत्त्वदर्शी संत की शरण में जाने के लिए स...
14/07/2024

#अनसुना_पाँचवाँ_वेद
सद्ग्रथा म अधूरा ज्ञान ह यहा कारण है कि य सभी सद्ग्रंथ हमें तत्त्वदर्शी संत की शरण में जाने के लिए संकेत करते हैं।जबकि पांचवें वेद "सूक्ष्मवेद" में अध्यात्म का सम्पूर्ण ज्ञान है।

 #अनसुना_पाँचवाँ_वेदगीता अध्याय 4 श्लोक 34 में कहा है कि उस तत्वज्ञान यानी सूक्ष्मवेद के ज्ञान को तू तत्त्वदर्शी संतों क...
14/07/2024

#अनसुना_पाँचवाँ_वेद
गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में कहा है कि उस तत्वज्ञान यानी सूक्ष्मवेद के ज्ञान को तू तत्त्वदर्शी संतों के पास जाकर प्राप्त कर समझ ।तो उस तत्वज्ञान अर्थात "सूक्ष्मवेद" के ज्ञान को जानने के लिए देखिए

 #अनसुना_पाँचवाँ_वेदपाँचवें वेद "सूक्ष्मवेद" में अध्यात्म का रहस्य युक्त सम्पूर्ण ज्ञान है। जो गीता, वेद, पुराणों सहित अ...
14/07/2024

#अनसुना_पाँचवाँ_वेद
पाँचवें वेद "सूक्ष्मवेद" में अध्यात्म का रहस्य युक्त सम्पूर्ण ज्ञान है। जो गीता, वेद, पुराणों सहित अन्य धर्मग्रंथों में भी नहीं है।"सूक्ष्मवेद" के ज्ञान को जानने के लिए देखिए
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 #अनसुना_पाँचवाँ_वेदकबीर, गंगा कांठे घर करें, पीवै निर्मल नीर। मुक्ति नहीं सत्यनाम बिन, कह सच्च कबीर ।। कबीर, तीर्थ कर-क...
14/07/2024

#अनसुना_पाँचवाँ_वेद
कबीर, गंगा कांठे घर करें, पीवै निर्मल नीर। मुक्ति नहीं सत्यनाम बिन, कह सच्च कबीर ।। कबीर, तीर्थ कर-कर जग मुआ, ऊड़े पानी न्हाय । सत्यनाम जपा नहीं, काल घसीटें जाय ।।अबीर सागरअथर्थात् चाहे मोक्षदायिनी मानकर गंगा नदी का निर्मल पानी पीओ, चाहे उसमें नहाओ। भक्ति के शास्त्र प्रमाणित नाम (मंत्र) बिना मोक्ष संभव नहीं है और उनको उस साधना से राहत नहीं मिलेगी। बल्कि इन साधनाओं को करने वालों को काल के दूत बलपूर्वक घसीटकर ले जाते हैं, दंडित करते हैं।

 #कबीरसाहेब_की_प्रमाणित_लीलामाघ महीने की शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी वि. सं. 1575 को कबीर परमेश्वर जी के मगहर से सतलोक गमन के...
15/06/2024

#कबीरसाहेब_की_प्रमाणित_लीला
माघ महीने की शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी वि. सं. 1575 को कबीर परमेश्वर जी के मगहर से सतलोक गमन के समय जो सुगंधित फूल पाए गए थे उनमें से कुछ फूल लाकर काशी में जहाँ कबीर परमेश्वर जी एक चबूतरे (चौरा) पर बैठकर सत्संग किया करते थे वहाँ काशी चौरा नाम से यादगार बन

 #कबीरसाहेब_की_प्रमाणित_लीलामाघ महीने की शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी वि. सं. 1575 को परमेश्वर कबीर साहेब जी ने मगहर से सशरीर ...
15/06/2024

#कबीरसाहेब_की_प्रमाणित_लीला
माघ महीने की शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी वि. सं. 1575 को परमेश्वर कबीर साहेब जी ने मगहर से सशरीर सतलोक जाने की लीला की। उससे पहले उन्होंने एक चादर नीचे बिछाई और एक ऊपर ओढ़ ली। कुछ फूल नीचे वाली चादर पर बिछा दिए गए। थोड़ी देर में आकाशवाणी हुई कि मैं तो जा

 #कबीरसाहेब_की_प्रमाणित_लीलाकबीर परमेश्वर जी आज से लगभग ६२५ वर्ष पहले सशरीर लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर प्रकट हुए और...
15/06/2024

#कबीरसाहेब_की_प्रमाणित_लीला
कबीर परमेश्वर जी आज से लगभग ६२५ वर्ष पहले सशरीर लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर प्रकट हुए और सशरीर मगहर से सतलोक चले गए। आज भी इसके प्रमाण के तौर पर मगहर में उनकी यादगारें १००-१०० फुट के अंतराल में बनी हुई

 #कबीरसाहेब_की_प्रमाणित_लीलाकबीर परमेश्वर जी वि.सं.1505 (सन 1448) में द्वारिका गए। समुद्र के किनारे जहां गोमती नदी समुद्...
15/06/2024

#कबीरसाहेब_की_प्रमाणित_लीला
कबीर परमेश्वर जी वि.सं.1505 (सन 1448) में द्वारिका गए। समुद्र के किनारे जहां गोमती नदी समुद्र में मिलती है।उसके पास बालू रेत के टीले पर बैठकर आने वाले श्रब्दालुओं को तत्वज्ञान सुनाकर उपदेश देते थे। उस स्थान पर गोलाकार चबूतरा (कोठा) बना रखा है।

 #कबीरसाहेब_की_प्रमाणित_लीलागुजरात में जीवा-दत्ता नाम के परमात्मा में आस्थावान भक्त रहते थे। जिन्हें तत्वदर्शी संत की तल...
15/06/2024

#कबीरसाहेब_की_प्रमाणित_लीला
गुजरात में जीवा-दत्ता नाम के परमात्मा में आस्थावान भक्त रहते थे। जिन्हें तत्वदर्शी संत की तलाश थी। उन्होंने एक गमले में सूखी टहनी डाल दी और तय किया कि जिस संत के चरण धोने के पश्चात जल से गमले की टहनी हरी हो जाएगी वह संत पूर्ण तत्वदर्शी संत होगा। वे कई

 #कबीरसाहेब_की_प्रमाणित_लीलाकबीर परमेश्वर जी आज से लगभग 625 वर्ष पहले सशरीर लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर प्रकट हुए और...
15/06/2024

#कबीरसाहेब_की_प्रमाणित_लीला
कबीर परमेश्वर जी आज से लगभग 625 वर्ष पहले सशरीर लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर प्रकट हुए और सशरीर मगहर से सतलोक चले गए। आज भी इसके प्रमाण के तौर पर मगहर में उनकी यादगारें 100-100 फुट के अंतराल में बनी हुई हैं। मगहर में आज

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